यूपी मेडिकल कॉलेजों में धर्मांतरण रोकथाम सेल: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का बड़ा निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राज्य के सभी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में धर्मांतरण रोकथाम सेल स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश 11 जून 2026 को जारी किया गया और इसके तत्काल बाद अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी ने अपने सभी संबद्ध संस्थानों को अनुपालन रिपोर्ट सहित ये सेल तुरंत गठित करने के लिए कहा। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दो अलग-अलग मामलों ने लखनऊ के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में हलचल मचा रखी है।
मुख्य घटनाक्रम
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से जुड़े एक मामले में एक पूर्व जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर पर आरोप है कि उसने महिला सहकर्मियों का शोषण कर उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए कथित तौर पर मजबूर किया। इस मामले की जाँच स्पेशल टास्क फोर्स (STF) कर रही है और परिसर में निगरानी बढ़ा दी गई है।
दूसरा मामला संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGIMS) के एक कर्मचारी की 21 वर्षीय बेटी से जुड़ा है, जो 21 मई से लापता है। परिवार ने इरशाद अली नामक व्यक्ति पर अपहरण, पीछा करने और ब्लैकमेल का आरोप लगाया है तथा दावा किया है कि उसे देश से बाहर ले जाया गया हो सकता है। इस मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं।
सेल की जिम्मेदारियाँ और कार्यक्षेत्र
निर्देशों के अनुसार, इन धर्मांतरण रोकथाम सेल का दायित्व होगा कि वे छात्रों, रेजिडेंट डॉक्टरों, फैकल्टी और अन्य कर्मचारियों को संबंधित कानूनों और संस्थागत जिम्मेदारियों के बारे में जागरूक करें। इन सेल को संदिग्ध गतिविधियों पर नज़र रखने और किसी भी शिकायत को उचित जाँच के लिए आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी सौंपी जाएगी।
संस्थानों को जागरूकता अभियान और शैक्षणिक कार्यक्रम चलाने के भी निर्देश दिए गए हैं, ताकि परिसर में मौजूद सभी लोग कानून, अधिकार और कर्तव्यों से परिचित रहें। शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था करना भी अनिवार्य किया गया है।
धार्मिक नेताओं की प्रतिक्रिया
कुछ मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि इस्लाम जबरन धर्म परिवर्तन की अनुमति नहीं देता, हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी मामले की जाँच निष्पक्ष होनी चाहिए। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि राज्यपाल के इस कदम से कोई आपत्ति नहीं है और जबरन धर्म परिवर्तन किसी भी धर्म में स्वीकार्य नहीं है।
आम जनता और संस्थानों पर असर
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण विरोधी कानून पहले से लागू है और इन सेल की स्थापना उसी कानूनी ढाँचे के तहत संस्थागत जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास बताई जा रही है। सभी संबद्ध मेडिकल और डेंटल कॉलेजों को सेल गठित करने के बाद अनुपालन रिपोर्ट विश्वविद्यालय को सौंपनी होगी।
क्या होगा आगे
STF द्वारा KGMU मामले की जाँच जारी है और SGPGIMS लापता युवती के मामले में भी पुलिस की कार्रवाई चल रही है। विश्लेषकों का मानना है कि इन सेल के गठन के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इनका संचालन किस प्रकार किया जाता है और क्या ये संस्थागत स्वायत्तता को प्रभावित करते हैं।