27 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

यूपी मेडिकल कॉलेजों में धर्मांतरण रोकथाम सेल: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का बड़ा निर्देश

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
यूपी मेडिकल कॉलेजों में धर्मांतरण रोकथाम सेल: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का बड़ा निर्देश

सारांश

यूपी राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने KGMU धर्मांतरण मामले और SGPGIMS कर्मचारी की लापता बेटी की घटनाओं के बाद राज्य के सभी मेडिकल-डेंटल कॉलेजों में धर्मांतरण रोकथाम सेल बनाने का आदेश दिया है। यह कदम मेडिकल परिसरों में संस्थागत निगरानी की नई परत जोड़ता है।

मुख्य बातें

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 11 जून 2026 को यूपी के सभी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में धर्मांतरण रोकथाम सेल स्थापित करने के निर्देश दिए।
अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी ने सभी संबद्ध संस्थानों को तत्काल अनुपालन के निर्देश जारी किए।
यह कदम KGMU के एक पूर्व रेजिडेंट डॉक्टर पर जबरन धर्मांतरण के आरोप और SGPGIMS कर्मचारी की 21 वर्षीय बेटी के 21 मई से लापता होने की घटनाओं के बाद उठाया गया।
इन सेल की जिम्मेदारी — जागरूकता अभियान, संदिग्ध गतिविधियों पर नज़र, और शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई।
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने राज्यपाल के कदम का समर्थन किया।

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राज्य के सभी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में धर्मांतरण रोकथाम सेल स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश 11 जून 2026 को जारी किया गया और इसके तत्काल बाद अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी ने अपने सभी संबद्ध संस्थानों को अनुपालन रिपोर्ट सहित ये सेल तुरंत गठित करने के लिए कहा। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दो अलग-अलग मामलों ने लखनऊ के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में हलचल मचा रखी है।

मुख्य घटनाक्रम

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से जुड़े एक मामले में एक पूर्व जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर पर आरोप है कि उसने महिला सहकर्मियों का शोषण कर उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए कथित तौर पर मजबूर किया। इस मामले की जाँच स्पेशल टास्क फोर्स (STF) कर रही है और परिसर में निगरानी बढ़ा दी गई है।

दूसरा मामला संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGIMS) के एक कर्मचारी की 21 वर्षीय बेटी से जुड़ा है, जो 21 मई से लापता है। परिवार ने इरशाद अली नामक व्यक्ति पर अपहरण, पीछा करने और ब्लैकमेल का आरोप लगाया है तथा दावा किया है कि उसे देश से बाहर ले जाया गया हो सकता है। इस मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं।

सेल की जिम्मेदारियाँ और कार्यक्षेत्र

निर्देशों के अनुसार, इन धर्मांतरण रोकथाम सेल का दायित्व होगा कि वे छात्रों, रेजिडेंट डॉक्टरों, फैकल्टी और अन्य कर्मचारियों को संबंधित कानूनों और संस्थागत जिम्मेदारियों के बारे में जागरूक करें। इन सेल को संदिग्ध गतिविधियों पर नज़र रखने और किसी भी शिकायत को उचित जाँच के लिए आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी सौंपी जाएगी।

संस्थानों को जागरूकता अभियान और शैक्षणिक कार्यक्रम चलाने के भी निर्देश दिए गए हैं, ताकि परिसर में मौजूद सभी लोग कानून, अधिकार और कर्तव्यों से परिचित रहें। शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था करना भी अनिवार्य किया गया है।

धार्मिक नेताओं की प्रतिक्रिया

कुछ मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि इस्लाम जबरन धर्म परिवर्तन की अनुमति नहीं देता, हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी मामले की जाँच निष्पक्ष होनी चाहिए। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि राज्यपाल के इस कदम से कोई आपत्ति नहीं है और जबरन धर्म परिवर्तन किसी भी धर्म में स्वीकार्य नहीं है।

आम जनता और संस्थानों पर असर

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण विरोधी कानून पहले से लागू है और इन सेल की स्थापना उसी कानूनी ढाँचे के तहत संस्थागत जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास बताई जा रही है। सभी संबद्ध मेडिकल और डेंटल कॉलेजों को सेल गठित करने के बाद अनुपालन रिपोर्ट विश्वविद्यालय को सौंपनी होगी।

क्या होगा आगे

STF द्वारा KGMU मामले की जाँच जारी है और SGPGIMS लापता युवती के मामले में भी पुलिस की कार्रवाई चल रही है। विश्लेषकों का मानना है कि इन सेल के गठन के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इनका संचालन किस प्रकार किया जाता है और क्या ये संस्थागत स्वायत्तता को प्रभावित करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका दायरा पूरे राज्य के मेडिकल तंत्र तक फैला दिया गया है — यह अनुपात पर सवाल उठाता है। मेडिकल संस्थानों में ऐसे सेल का गठन शैक्षणिक स्वायत्तता और निगरानी के बीच की रेखा को धुंधला कर सकता है, खासकर तब जब 'संदिग्ध गतिविधि' की परिभाषा स्पष्ट नहीं है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि KGMU मामले की STF जाँच अभी जारी है — आरोप अभी सिद्ध नहीं हुए। ऐसे में एक अप्रमाणित मामले के आधार पर संस्थागत ढाँचा खड़ा करना, जवाबदेही के बजाय पूर्वाग्रह का जोखिम भी पैदा करता है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी के मेडिकल कॉलेजों में धर्मांतरण रोकथाम सेल क्या है?
यह राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के निर्देश पर उत्तर प्रदेश के सभी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में स्थापित की जाने वाली एक संस्थागत इकाई है। इसका काम छात्रों, डॉक्टरों और कर्मचारियों को धर्मांतरण संबंधी कानूनों के बारे में जागरूक करना, संदिग्ध गतिविधियों पर नज़र रखना और शिकायतों पर कार्रवाई करना होगा।
यह आदेश किन मामलों के बाद जारी किया गया?
यह आदेश दो घटनाओं के बाद आया — KGMU के एक पूर्व जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर पर महिला सहकर्मियों को जबरन धर्म परिवर्तन कराने के कथित आरोप, और SGPGIMS कर्मचारी की 21 वर्षीय बेटी का 21 मई से लापता होना। दोनों मामलों में जाँच जारी है।
KGMU धर्मांतरण मामले में अब तक क्या हुआ है?
KGMU मामले में एक पूर्व जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर पर महिला सहकर्मियों का शोषण कर कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने के आरोप हैं। STF इस मामले की जाँच कर रही है और परिसर में निगरानी बढ़ा दी गई है। आरोप अभी न्यायालय में सिद्ध नहीं हुए हैं।
मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इस पहल पर क्या कहा?
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने राज्यपाल के कदम का समर्थन किया और कहा कि जबरन धर्म परिवर्तन इस्लाम में स्वीकार्य नहीं है। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी मामले की जाँच निष्पक्ष होनी चाहिए।
इन सेल के गठन के बाद कॉलेजों को क्या करना होगा?
सभी संबद्ध मेडिकल और डेंटल कॉलेजों को जल्द से जल्द ये सेल गठित करके अनुपालन रिपोर्ट विश्वविद्यालय को सौंपनी होगी। साथ ही जागरूकता अभियान चलाने और शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था बनाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले