धर्मांतरण मामलों की निष्पक्ष जांच हो: शिया धर्मगुरुओं ने कहा, इस्लाम जबरन धर्म परिवर्तन की अनुमति नहीं देता
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा केजीएमयू और एसजीपीजीआई से जुड़े कथित धर्मांतरण मामलों का संज्ञान लेने और हर डेंटल व मेडिकल कॉलेज में धर्मांतरण रोकथाम केंद्र स्थापित करने के आदेश के बाद, शिया धर्मगुरुओं ने 11 जून 2026 को लखनऊ में अपनी प्रतिक्रिया दी। दोनों धर्मगुरुओं ने स्पष्ट कहा कि इस्लाम किसी भी प्रकार के जबरन धर्म परिवर्तन की इजाज़त नहीं देता, और मामलों की निष्पक्ष जांच का समर्थन किया।
सैयद सैफ अब्बास की प्रतिक्रिया
शिया धर्मगुरु सैयद सैफ अब्बास ने कहा कि इस्लाम जबरन धर्मांतरण की निंदा करता है। उन्होंने कहा, 'कोई भी मुसलमान किसी का जबरन धर्म परिवर्तन नहीं करवा सकता। अगर करवाता भी है तो यह निंदनीय और गलत है।' उन्होंने यह भी कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में धर्मांतरण की जो बातें सामने आ रही हैं, उनमें अक्सर पहले दोस्ती होती है और जब वह दोस्ती टूटती है, तो सीधे धर्मांतरण का आरोप लगा दिया जाता है।
सैयद सैफ अब्बास ने एक उदाहरण देते हुए बताया कि एक व्यक्ति की शादी 20 साल पहले हुई थी और अब महिला कह रही है कि उसे नहीं पता था कि लड़का मुसलमान है। उनके अनुसार, जब किसी कारण से विवाद होता है तभी धर्मांतरण का आरोप सामने आता है। उन्होंने मांग की कि कोई निष्पक्ष समिति बनाई जाए जो गंभीरता से जांच करे कि मामला वाकई धर्मांतरण का है या कुछ और।
सरकार के कदम पर रुख
सैयद सैफ अब्बास ने स्पष्ट किया कि यदि राज्यपाल ने शैक्षणिक संस्थानों में गड़बड़ियों को रोकने के लिए कोई जांच समिति गठित की है, तो इस पर कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि जांच होनी चाहिए — लेकिन वह जांच तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होनी चाहिए।
यासूब अब्बास का बयान
शिया धर्मगुरु यासूब अब्बास ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि राज्यपाल जैसे बड़े पद पर बैठे व्यक्ति यदि प्रदेश की स्थिति को देखते हुए कोई कदम उठाते हैं, तो उसमें कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने कहा, 'इस्लाम कहता है कि दीन में कोई जबरदस्ती नहीं है — अगर जबरदस्ती होती है तो वहां मजहब नहीं होता।'
यासूब अब्बास ने आगे कहा कि जबरन धर्म परिवर्तन कराने के लिए कोई भी धर्म नहीं कहता। धर्मांतरण के बढ़ते मामलों को देखते हुए यदि प्रशासनिक कदम उठाए जाते हैं, तो वह उचित है।
पृष्ठभूमि: राज्यपाल का आदेश
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने केजीएमयू (किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी) और एसजीपीजीआई (संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) से जुड़े कथित धर्मांतरण मामलों का संज्ञान लिया है। उन्होंने हर डेंटल और मेडिकल कॉलेज में धर्मांतरण रोकथाम केंद्र स्थापित करने का आदेश दिया है। यह आदेश ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण और लव जिहाद से जुड़े मामले बार-बार सुर्खियों में आ रहे हैं।
आगे क्या होगा
शिया धर्मगुरुओं के इस बयान के बाद मुस्लिम समुदाय के भीतर से भी जांच की मांग उठना उल्लेखनीय है। अब देखना होगा कि राज्यपाल के आदेश पर विश्वविद्यालय प्रशासन किस तरह अमल करता है और प्रस्तावित धर्मांतरण रोकथाम केंद्रों की कार्यप्रणाली क्या होगी।