MP वक्फ बोर्ड विवाद पर मौलाना सैफ अब्बास बोले: सभी धार्मिक ट्रस्टों में समान नियम लागू हों
सारांश
मुख्य बातें
शिया धर्मगुरु मौलाना सैफ अब्बास ने 8 जुलाई 2025 को लखनऊ में मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्य की नियुक्ति को लेकर उठे विवाद पर अपनी स्पष्ट प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार समानता का सिद्धांत वास्तव में लागू करना चाहती है, तो केवल वक्फ बोर्ड तक सीमित न रहकर सभी धार्मिक ट्रस्टों में एकसमान व्यवस्था लागू करनी होगी।
विरोध का आधार क्या है
मौलाना सैफ अब्बास ने स्पष्ट किया कि वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्य की नियुक्ति का विरोध किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि वक्फ संस्थाओं की धार्मिक प्रकृति को लेकर है। उन्होंने कहा, 'हमें हिंदू भाइयों से कोई परेशानी नहीं है, लेकिन वक्फ की संपत्तियाँ, उनके नियम और उनसे जुड़े धार्मिक मामलों को एक मुसलमान ही बेहतर तरीके से समझ सकता है।' उनके अनुसार, सभी मुस्लिम संगठनों और समुदायों ने इस नियुक्ति का विरोध किया है।
समानता की शर्त
मौलाना ने तर्क दिया कि यदि हिंदू धार्मिक ट्रस्टों में मुस्लिम प्रतिनिधियों को और मुस्लिम धार्मिक ट्रस्टों में हिंदू सदस्यों को समान रूप से शामिल किया जाए, तभी इसे संविधान की भावना के अनुरूप माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि केवल एकतरफा व्यवस्था लागू करना न्यायसंगत नहीं होगा — यह समानता नहीं, बल्कि अन्याय होगा।
धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता पर जोर
सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए मौलाना सैफ अब्बास ने अयोध्या के मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित विवादों का उल्लेख किया, जिनमें निर्माण कार्यों में कथित कमीशन, जमीन खरीद-फरोख्त में अनियमितताओं और दान राशि से जुड़े आरोप शामिल हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता और ईमानदारी सर्वोपरि होनी चाहिए, क्योंकि ये करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ी हैं।
गोरखनाथ पीठ का उदाहरण
मौलाना ने यह भी कहा कि गोरखनाथ पीठ में लंबे समय से एक मुस्लिम कर्मचारी के कार्यरत होने की बातें सामने आती रही हैं। उनके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति ईमानदारी और निष्ठा से अपना दायित्व निभाता है, तो उसकी कार्यशैली को महत्व मिलना चाहिए — न कि केवल उसके धर्म को। सरकार को ऐसे लोगों को आगे लाना चाहिए जो धार्मिक संस्थानों में पूरी निष्पक्षता के साथ काम करें।
आगे की राह
मौलाना सैफ अब्बास का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्य की नियुक्ति को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है। आलोचकों का कहना है कि इस मुद्दे पर सरकार की नीति में स्पष्टता का अभाव है। यह विवाद व्यापक वक्फ संशोधन कानून की पृष्ठभूमि में और अधिक प्रासंगिक हो गया है, जिसके क्रियान्वयन पर देशभर में नजरें टिकी हैं।