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मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम नियुक्ति पर दलवई का हमला — 'हर क्षेत्र में हाशिए पर धकेला जा रहा है'

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मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम नियुक्ति पर दलवई का हमला — 'हर क्षेत्र में हाशिए पर धकेला जा रहा है'

सारांश

मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने इसे अल्पसंख्यकों को हाशिए पर धकेलने की कोशिश बताया और राम मंदिर ट्रस्ट से सीधी तुलना कर सरकार को घेरा।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बना जिसने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया।
नए 10 सदस्यीय बोर्ड में मनोज मलपानी (इंदौर) और अनिमेष भार्गव (राघोगढ़, गुना) को गैर-मुस्लिम सदस्य नियुक्त किया गया।
सांवर पटेल को बोर्ड का चेयरमैन फिर से नियुक्त किया गया है।
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने इसे 'पूरी तरह गलत' बताते हुए हिंदू धार्मिक ट्रस्टों में समान प्रतिनिधित्व का सवाल उठाया।
दलवई ने UCC का विरोध नहीं किया, लेकिन लागू करने से पहले व्यापक बहस की माँग की।

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने 8 जुलाई 2026 को मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति की कड़ी आलोचना करते हुए इसे 'पूरी तरह गलत' करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब हिंदू धार्मिक ट्रस्टों में मुसलमानों को प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाता, तो वक्फ बोर्ड में यह बदलाव किस आधार पर किया गया।

मध्य प्रदेश का पुनर्गठित वक्फ बोर्ड

मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश सरकार ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत राज्य के वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया है। राज्य सरकार के अनुसार, मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने इस संशोधित कानून के तहत अपने बोर्ड को नए सिरे से गठित किया है।

नए 10 सदस्यीय बोर्ड में इंदौर के मनोज मलपानी और गुना के राघोगढ़ के अनिमेष भार्गव को गैर-मुस्लिम सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है। सांवर पटेल को एक बार फिर बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया है। अन्य सदस्यों में नजमा हेपतुल्ला, आतिफ अकील, फैजान खान, फातेमा चौधरी, शाइस्ता सुल्तान और शबाना खान शामिल हैं।

कानूनी बदलाव की पृष्ठभूमि

संशोधित वक्फ अधिनियम, 2025 के अनुसार, राज्य वक्फ बोर्डों में कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना अनिवार्य है। यह पूर्ववर्ती वक्फ अधिनियम, 1995 से एक उल्लेखनीय बदलाव है, जिसके तहत बोर्ड में केवल मुस्लिम समुदाय के सदस्य ही नियुक्त किए जा सकते थे। गौरतलब है कि यह संशोधन संसद में व्यापक बहस के बाद पारित हुआ था और तब से विपक्षी दलों की आपत्तियों का केंद्र रहा है।

दलवई की तीखी प्रतिक्रिया

दलवई ने कहा, 'क्या हिंदू धार्मिक ट्रस्टों में भी इसी तरह मुसलमानों को शामिल किया जाएगा? क्या राम मंदिर ट्रस्ट में मुसलमानों को शामिल किया जाएगा? यह पूरी तरह गलत है। कहीं न कहीं, हर क्षेत्र में मुसलमानों को हाशिए पर धकेलने की कोशिश हो रही है। इससे देश को किसी भी तरह का फायदा नहीं होगा।'

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वक्फ संशोधन कानून को लेकर देशभर में राजनीतिक तनाव बना हुआ है। आलोचकों का कहना है कि यह कदम अल्पसंख्यक धार्मिक संस्थाओं की स्वायत्तता को कमज़ोर करता है, जबकि सरकार का तर्क है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी।

यूसीसी पर दलवई का रुख

दलवई ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के सवाल पर कहा कि वे इसके विरोधी नहीं हैं, लेकिन इसे लागू करने से पहले व्यापक जन-जागरूकता और खुली बहस आवश्यक है। उन्होंने कहा, 'एक से ज़्यादा शादियाँ करना गलत है, लेकिन क्या ऐसा सिर्फ मुसलमान ही करते हैं? हिंदुओं में भी ऐसे कई मामले हैं। महिलाओं को बराबरी का दर्जा मिलना चाहिए और अगर UCC इसे पक्का करने के लिए लाया जा रहा है, तो मैं इसका स्वागत करूंगा।'

आगे क्या होगा

मध्य प्रदेश में वक्फ बोर्ड के इस पुनर्गठन के बाद यह देखा जाएगा कि अन्य राज्य सरकारें भी इसी तर्ज पर कदम उठाती हैं या नहीं। विपक्षी दलों के विरोध को देखते हुए इस मुद्दे के आने वाले दिनों में और गहराने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि गहरे धार्मिक-राजनीतिक तनाव को छूता है। दलवई का राम मंदिर ट्रस्ट से तुलना करना एक तीखा राजनीतिक दाँव है, लेकिन यह सवाल वैध है कि क्या यह सिद्धांत सभी धार्मिक संस्थाओं पर समान रूप से लागू होगा। सरकार 'पारदर्शिता' का तर्क देती है, पर बिना समान मानक के यह तर्क एकतरफा लगता है। असली जाँच यह होगी कि नए बोर्ड के गैर-मुस्लिम सदस्य वक्फ सम्पत्तियों के प्रबंधन में वास्तविक भूमिका निभाते हैं या यह नियुक्ति महज़ प्रतीकात्मक बनकर रह जाती है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति क्यों की गई?
वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत राज्य वक्फ बोर्डों में कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह 1995 के पुराने वक्फ कानून से एक बड़ा बदलाव है, जिसमें केवल मुस्लिम समुदाय के सदस्य ही बोर्ड में हो सकते थे।
हुसैन दलवई ने वक्फ बोर्ड की नियुक्ति पर क्या कहा?
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने इस नियुक्ति को 'पूरी तरह गलत' बताया और सवाल उठाया कि क्या राम मंदिर ट्रस्ट जैसे हिंदू धार्मिक ट्रस्टों में भी मुसलमानों को शामिल किया जाएगा। उन्होंने इसे मुसलमानों को हर क्षेत्र में हाशिए पर धकेलने की कोशिश बताया।
मध्य प्रदेश के नए वक्फ बोर्ड में कौन-कौन शामिल हैं?
10 सदस्यीय बोर्ड में सांवर पटेल को चेयरमैन, मनोज मलपानी और अनिमेष भार्गव को गैर-मुस्लिम सदस्य नियुक्त किया गया है। अन्य सदस्यों में नजमा हेपतुल्ला, आतिफ अकील, फैजान खान, फातेमा चौधरी, शाइस्ता सुल्तान और शबाना खान शामिल हैं।
क्या मध्य प्रदेश इस संशोधित कानून के तहत पहला राज्य है?
हाँ, राज्य सरकार के दावे के अनुसार मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत अपने वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया है।
दलवई का यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर क्या रुख है?
दलवई ने स्पष्ट किया कि वे UCC के विरोधी नहीं हैं, लेकिन इसे लागू करने से पहले व्यापक जन-जागरूकता और खुली बहस होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर UCC महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिलाने के लिए लाया जा रहा है, तो वे इसका स्वागत करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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