अनिल अंबानी ग्रुप के बैंक घोटाले में ईडी की छापेमारी, ₹15,548 करोड़ की अपराध आय चिह्नित
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 8 जुलाई 2025 को बैंक घोटाला मामले की जांच के तहत ई-कॉम्प्लेक्स प्राइवेट लिमिटेड के परिसर और उसके एक निदेशक के आवास पर छापेमारी की। इस अभियान में रिलायंस अनिल अंबानी समूह के स्वामित्व या नियंत्रण से जुड़े संदिग्ध लेनदेन और संपत्तियों से संबंधित अहम साक्ष्य बरामद किए गए हैं। 9 जुलाई को जारी आधिकारिक बयान में यह जानकारी सार्वजनिक की गई।
छापेमारी में क्या मिला
ईडी के अनुसार, तलाशी के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज, अचल संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड और बैंक घोटाले की जांच से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए गए हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि ये सबूत मामले में आगे की कार्रवाई के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।
घोटाले का ढाँचा: शेल कंपनियों का जाल
अब तक की जांच में सामने आया है कि रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) द्वारा जुटाए गए हजारों करोड़ रुपए के सार्वजनिक धन को रिलायंस अनिल अंबानी समूह के नियंत्रण वाली शेल तथा समूह की अन्य कंपनियों के नेटवर्क के जरिए सुनियोजित तरीके से अन्यत्र भेजा गया।
जांच एजेंसी के अनुसार, इन कंपनियों को सामान्य बैंकिंग नियमों का गंभीर उल्लंघन करते हुए — पर्याप्त जांच-पड़ताल, उचित दस्तावेजी प्रक्रिया और ऋण चुकाने की क्षमता का आकलन किए बिना — कॉरपोरेट लोन मंजूर किए गए। ये कंपनियाँ आर्थिक रूप से कमजोर थीं, उनका वास्तविक कारोबारी संचालन नहीं था और उनके पास ऋण चुकाने की क्षमता भी बेहद सीमित थी।
ईडी की जांच में यह भी पता चला है कि इन शेल कंपनियों के निदेशक रिलायंस अनिल अंबानी समूह के कर्मचारी या करीबी सहयोगी थे और वे समूह के वरिष्ठ प्रबंधन के निर्देशों पर काम कर रहे थे। इन कंपनियों के बैंक खाते और लेखा-जोखा रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, रिलायंस पावर लिमिटेड और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के अधिकारियों द्वारा संचालित किए जाते थे, जिससे इन शेल कंपनियों पर समूह के प्रभावी नियंत्रण की पुष्टि होती है।
आर्थिक कार्रवाई और कुर्की
जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में अब तक ₹15,548 करोड़ की कथित अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) का आकलन किया गया है। इसके अलावा, ₹4,510 करोड़ की संपत्तियाँ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत कुर्क की जा चुकी हैं, जिनमें से ₹3,926 करोड़ की कुर्की को निर्णायक प्राधिकरण की मंजूरी भी मिल चुकी है। ईडी ने 12 जून 2026 को पीएमएलए के तहत विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) भी दाखिल की थी।
गिरफ्तारियाँ और न्यायिक हिरासत
ईडी ने 15 अप्रैल 2026 को रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के पूर्व निदेशक अमिताभ झुनझुनवाला और पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) अमित बापना को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि दोनों की आरएचएफएल और आरसीएफएल से धन के कथित डायवर्जन में सक्रिय भूमिका थी। फिलहाल दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं।
गौरतलब है कि यह जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), दिल्ली द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। ये एफआईआर यस बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, केनरा बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), यूको बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और एक्सिस बैंक की शिकायतों के आधार पर दर्ज की गई थीं।
आगे क्या होगा
ईडी के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले समय में और कार्रवाइयों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह मामला देश के बड़े कॉरपोरेट बैंकिंग घोटालों में से एक बनता जा रहा है, जिसमें एक दर्जन से अधिक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक प्रभावित हैं।