8 जुलाई 2026
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भारत सबसे तेज़ बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था: IMF का 2026 में 7% GDP वृद्धि का अनुमान

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भारत सबसे तेज़ बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था: IMF का 2026 में 7% GDP वृद्धि का अनुमान

सारांश

IMF ने भारत को 2026 में 7% वृद्धि दर के साथ दुनिया की सबसे तेज़ बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था घोषित किया है — चीन (4.6%), अमेरिका (2.3%) और EU (0.9%) से कहीं आगे। विश्व बैंक, गोल्डमैन सैक्स और RBI के अनुमान भी इसी दिशा में हैं।

मुख्य बातें

IMF ने WEO अपडेट में कैलेंडर वर्ष 2026 में भारत की GDP वृद्धि दर 7% रहने का अनुमान लगाया।
वित्त वर्ष आधार पर 2026-27 में 6.4% और अगले वित्त वर्ष में 6.7% वृद्धि का अनुमान।
भारत की वृद्धि दर वैश्विक औसत ( 3% ) से दोगुने से भी अधिक; चीन 4.6% , अमेरिका 2.3% , EU 0.9% ।
विश्व बैंक ने 6.6% , RBI ने 6.6% , गोल्डमैन सैक्स ने 6.8% और बैंक ऑफ अमेरिका ने 7% वृद्धि का अनुमान लगाया।
ईरान युद्ध से पहले वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की वृद्धि दर 7.7% थी।
निजी खपत और सेवा क्षेत्र की मज़बूती को IMF ने भारत की वृद्धि का मुख्य आधार बताया।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अपने वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (WEO) अपडेट में 8 जुलाई 2026 को यह अनुमान जारी किया कि भारत चालू कैलेंडर वर्ष में 7% की दर से आर्थिक वृद्धि करेगा — जो इसे वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाए रखता है। IMF के अनुसार, निजी खपत और सेवा क्षेत्र की निरंतर मज़बूती इस वृद्धि के मुख्य आधार हैं।

IMF के अनुमान: कैलेंडर वर्ष बनाम वित्त वर्ष

IMF ने भारत के लिए दो अलग-अलग आधारों पर अनुमान प्रस्तुत किए हैं। कैलेंडर वर्ष 2026 में 7% वृद्धि का अनुमान है, जो 2027 में घटकर 6.4% रह सकती है। वित्त वर्ष आधार पर — जो भारत का आधिकारिक बजट चक्र है — चालू वित्त वर्ष 2026-27 में वृद्धि दर 6.4% और अगले वित्त वर्ष में 6.7% रहने का अनुमान है।

IMF ने अप्रैल 2026 की अपनी पिछली रिपोर्ट की तुलना में चालू वित्त वर्ष के अनुमान में 0.1% की मामूली कटौती की है, जबकि अगले वित्त वर्ष के अनुमान को 0.2% बढ़ाया है। गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2025-26 में — ईरान युद्ध के प्रभाव से पहले — भारत की विकास दर 7.7% दर्ज की गई थी।

वैश्विक परिदृश्य में भारत की स्थिति

IMF के अनुमानों के अनुसार, भारत की वृद्धि दर वैश्विक औसत से दोगुने से भी अधिक रहने की संभावना है। संस्था ने इस वर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 3% और अगले वर्ष 3.4% रहने का अनुमान लगाया है। तुलनात्मक रूप से, चीन की वृद्धि दर इस वर्ष 4.6% और अगले वर्ष 4.1% रहने का अनुमान है, जबकि अमेरिका के लिए क्रमशः 2.3% और 2.2% का अनुमान है। यूरोपीय संघ (EU) की वृद्धि दर इस वर्ष मात्र 0.9% और अगले वर्ष 1.2% रहने की संभावना है।

IMF ने यह भी कहा कि युद्ध के झटकों का असर कमोडिटी कीमतों, महंगाई की उम्मीदों और वित्तीय परिस्थितियों पर सीमित रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में तेज़ी से बढ़ते उपयोग ने वैश्विक तकनीकी क्षेत्र में मांग बढ़ाई, जिसने पश्चिम एशिया में युद्ध के नकारात्मक प्रभाव को आंशिक रूप से संतुलित किया।

अन्य वैश्विक संस्थाओं के अनुमान

IMF का यह अनुमान अन्य प्रमुख वैश्विक संस्थाओं के आकलन से मेल खाता है। विश्व बैंक ने पिछले महीने जारी अपनी रिपोर्ट में चालू वित्त वर्ष में 6.6% और अगले वित्त वर्ष में 7.2% वृद्धि का अनुमान लगाया था। संयुक्त राष्ट्र ने इस वर्ष भारत की वृद्धि दर 6.4% रहने का अनुमान जताया है।

संयुक्त राष्ट्र के ग्लोबल इकोनॉमिक मॉनिटरिंग ब्रांच के प्रमुख अर्थशास्त्री इंगो पिटरले ने पिछले महीने कहा था कि भारत में उपभोक्ता मांग, सार्वजनिक निवेश और सेवा निर्यात के मज़बूत प्रदर्शन के कारण आर्थिक वृद्धि 'संरचनात्मक रूप से मज़बूत' बनी हुई है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने भी पिछले महीने चालू वित्त वर्ष के लिए 6.6% वृद्धि का अनुमान दिया था।

बैंक ऑफ अमेरिका ने वर्ष 2026 में भारत की GDP वृद्धि दर 7% तक पहुँचने का अनुमान लगाया है — जो उसके अप्रैल के 6.2% के अनुमान से काफी अधिक है। गोल्डमैन सैक्स ने भी पिछले महीने के अंत में कैलेंडर वर्ष 2026 के लिए अपना अनुमान 6.5% से बढ़ाकर 6.8% कर दिया।

ट्रंप की टिप्पणी और वैश्विक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक टीवी इंटरव्यू में कहा था कि भारत की 7-8% आर्थिक वृद्धि अमेरिका के लिए भी एक 'बेंचमार्क' हो सकती है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका का फेडरल रिज़र्व ऊँची ब्याज दरें बनाए रखकर महत्वाकांक्षी विकास लक्ष्यों की राह में बाधा बन रहा है।

आगे की राह

इन अनुमानों का समवेत संदेश स्पष्ट है — भारत वैश्विक आर्थिक मंच पर अपनी अग्रणी स्थिति बनाए हुए है। हालाँकि, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव और उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में धीमी वृद्धि भविष्य के लिए जोखिम बने हुए हैं। अगले वित्त वर्ष में 6.7% की संभावित वृद्धि दर यह दर्शाती है कि भारत की विकास गाथा अभी जारी रहने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि IMF ने चालू वित्त वर्ष के अनुमान में 0.1% की कटौती भी की है — और वित्त वर्ष 2025-26 की 7.7% वृद्धि का बड़ा हिस्सा युद्ध-पूर्व परिस्थितियों की देन था। निजी खपत और सेवा क्षेत्र की मज़बूती वास्तविक है, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग में संरचनात्मक कमज़ोरी और वैश्विक कमोडिटी कीमतों की अनिश्चितता अनदेखी नहीं की जा सकती। ट्रंप का भारत की वृद्धि दर को 'बेंचमार्क' बताना राजनीतिक बयानबाज़ी है — असली सवाल यह है कि क्या यह वृद्धि रोज़गार और आय वितरण में परिलक्षित हो रही है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IMF ने 2026 में भारत की GDP वृद्धि दर कितनी बताई है?
IMF ने अपने WEO अपडेट में कैलेंडर वर्ष 2026 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर 7% रहने का अनुमान लगाया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए यह अनुमान 6.4% है, जो अगले वित्त वर्ष में 6.7% हो सकता है।
भारत की आर्थिक वृद्धि के पीछे मुख्य कारण क्या हैं?
IMF के अनुसार, निजी खपत और सेवा क्षेत्र की निरंतर मज़बूत गतिविधियाँ भारत की वृद्धि के प्रमुख आधार हैं। संयुक्त राष्ट्र के अर्थशास्त्री इंगो पिटरले ने उपभोक्ता मांग, सार्वजनिक निवेश और सेवा निर्यात को भी इसमें अहम बताया है।
भारत की वृद्धि दर चीन और अमेरिका से कितनी अधिक है?
IMF के अनुमान के अनुसार, चीन की वृद्धि दर 2026 में 4.6% और अमेरिका की 2.3% रहने का अनुमान है, जबकि भारत 7% के साथ दोनों से काफी आगे है। वैश्विक औसत 3% के मुकाबले भारत की वृद्धि दर दोगुने से भी अधिक है।
अन्य वैश्विक संस्थाओं ने भारत के बारे में क्या अनुमान लगाए हैं?
विश्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष में 6.6% और अगले में 7.2%, RBI ने 6.6%, गोल्डमैन सैक्स ने 6.8% और बैंक ऑफ अमेरिका ने 7% वृद्धि का अनुमान लगाया है। संयुक्त राष्ट्र ने 6.4% का अनुमान दिया है।
क्या IMF ने भारत के अनुमान में कोई बदलाव किया है?
हाँ, IMF ने अप्रैल 2026 की पिछली रिपोर्ट की तुलना में चालू वित्त वर्ष के अनुमान में 0.1% की मामूली कटौती की है, जबकि अगले वित्त वर्ष के अनुमान को 0.2% बढ़ाया है। इससे पहले वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की वृद्धि दर 7.7% रही थी।
राष्ट्र प्रेस
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