वर्ल्ड बैंक ने भारत की विकास दर 6.6% की, 2027 में 7.2% का अनुमान; मध्य पूर्व तनाव के बावजूद शीर्ष अर्थव्यवस्था
सारांश
मुख्य बातें
विश्व बैंक (World Bank) ने 11 जून 2026 को जारी अपनी ताज़ा ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स रिपोर्ट में भारत की विकास दर का अनुमान 2026 के लिए बढ़ाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है — जो जनवरी के 6.5 प्रतिशत के पूर्वानुमान से अधिक है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष से उपजे वैश्विक आर्थिक दबाव के बीच भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
विकास दर में संशोधन: क्या बदला
रिपोर्ट के अनुसार, 2027 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान पहले के 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया गया है। 2028 में यह दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इस ऊर्ध्वगामी संशोधन की मुख्य वजह उम्मीद से अधिक मज़बूत घरेलू माँग और निर्यात में आई तेज़ी को बताया गया है।
गौरतलब है कि यह संशोधन ऐसे समय में आया है जब वैश्विक विकास दर 2025 के 2.9 प्रतिशत से घटकर 2026 में 2.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है — जो कोविड-19 महामारी की शुरुआत के बाद से सबसे धीमी वैश्विक गति होगी।
विशेषज्ञ की राय: 'जबरदस्त गति'
विश्व बैंक के डिप्टी चीफ इकोनॉमिस्ट आयहान कोसे ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बेहतर अनुमान घरेलू माँग में 'उम्मीद से अधिक मज़बूत गति' को दर्शाता है, जो मध्य पूर्व संघर्ष के प्रतिकूल प्रभावों की भरपाई से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा, "भारत ने ज़रूरी नीतिगत उपाय लागू किए हैं। जब हम भारत की बड़ी तस्वीर देखते हैं, तो उसमें अभी भी जबरदस्त गति दिखाई देती है।"
कोसे ने स्पष्ट किया कि अनिश्चित वैश्विक माहौल के बावजूद भारत के आर्थिक आधार मज़बूत बने हुए हैं। उन्होंने कहा, "घरेलू माँग और एक्सपोर्ट में तेज़ी की वजह से उम्मीद से अधिक वृद्धि हुई।"
दक्षिण एशिया: सबसे तेज़ बढ़ता क्षेत्र
विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में दक्षिण एशिया वैश्विक स्तर पर सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला क्षेत्र बना रहेगा। हालाँकि, ऊर्जा की ऊँची कीमतों और संघर्ष के व्यापक प्रभाव के कारण 2025 में क्षेत्रीय विकास दर 7 प्रतिशत से घटकर 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। 2027 में यह दर 6.9 प्रतिशत तक पहुँचने का अनुमान है।
भारत का लगातार विस्तार ही इस क्षेत्र की वृद्धि का मुख्य इंजन है। आँकड़ों के अनुसार, भारत उन चुनिंदा बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है जिनके विकास अनुमान में इस दौर में सुधार हुआ है।
वैश्विक चुनौतियाँ और भारत का अपवाद
विश्व बैंक ने आगाह किया है कि मध्य पूर्व संघर्ष के कारण तेल की ऊँची कीमतें, बढ़ती महंगाई और कड़े वित्तीय हालात दुनिया के अधिकांश हिस्सों में आर्थिक गतिविधियों पर असर डाल रहे हैं। इसके बावजूद, भारत की मज़बूत घरेलू माँग और नीतिगत स्थिरता ने इसे इस वैश्विक मंदी से अलग रखा है। यह ऐसे समय में आया है जब कई उभरती अर्थव्यवस्थाएँ बाहरी दबावों से जूझ रही हैं।
आगे चलकर, भारत के विकास पथ की दिशा घरेलू निवेश चक्र, वैश्विक कमोडिटी कीमतों और मध्य पूर्व में स्थिरता की संभावनाओं पर काफी हद तक निर्भर करेगी।