आईएमएफ का भारत पर भरोसा: 2026 में 6.4% ग्रोथ, मध्यपूर्व तेल संकट के बावजूद अर्थव्यवस्था मजबूत
सारांश
मुख्य बातें
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने 9 जुलाई 2026 को जारी अपनी ताज़ा 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि मध्य पूर्व संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ी के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था अपनी मज़बूती बनाए हुए है। संस्था ने 2026 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान मामूली रूप से 0.1 प्रतिशत अंक घटाकर 6.4 प्रतिशत किया है, जबकि 2027 के लिए इसे 0.2 प्रतिशत अंक बढ़ाकर लगभग 6.5 प्रतिशत आंका गया है।
मुख्य घटनाक्रम
आईएमएफ ने अप्रैल 2026 के अनुमानों में यह संशोधन तब किया जब मध्य पूर्व में जारी टकराव ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों को अस्थिर कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अधिकांश अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में इस वैश्विक अनिश्चितता का सामना बेहतर ढंग से किया है। आईएमएफ के रिसर्च विभाग की प्रमुख डेनिज़ इगन ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा, "भारत के लिए, हमने इस साल के अनुमान को बहुत मामूली रूप से 0.1 प्रतिशत अंक घटाकर 6.4 कर दिया है। और अगले साल, यानी 2027 के लिए विकास दर के अनुमान को 0.2 प्रतिशत अंक बढ़ा दिया है।"
इगन ने यह भी कहा, "हाल के डेटा में नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं। अप्रैल तक के हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर भी दिखाते हैं कि कुल मिलाकर आर्थिक गतिविधियों में काफी मज़बूती बनी हुई है।"
ऊर्जा कीमतों का असर
आईएमएफ ने स्वीकार किया कि 2026 में ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने भारत की सकारात्मक आर्थिक गति के असर को आंशिक रूप से सीमित किया है। भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरतों का 80 प्रतिशत से अधिक आयात करता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतें देश की महंगाई, चालू खाते और समग्र विकास दर को सीधे प्रभावित करती हैं। यदि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति में दीर्घकालिक बाधा आती है, तो भारत की आयात लागत बढ़ सकती है और घरेलू ईंधन कीमतों पर नया दबाव पड़ सकता है।
गौरतलब है कि आईएमएफ को उम्मीद है कि 2027 तक ये ऊर्जा दबाव कम हो जाएंगे, जिससे भारत की विकास दर को फिर से गति मिलेगी। इगन के अनुसार, "2027 की ओर बढ़ते हुए, हमें उम्मीद है कि भारत की ग्रोथ और मज़बूत होगी क्योंकि एनर्जी शॉक का असर कम हो जाएगा और मीडियम-टर्म ग्रोथ लगभग 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है।"
वैश्विक परिदृश्य और भारत की स्थिति
आईएमएफ ने 2026 के लिए वैश्विक विकास दर का अनुमान 3 प्रतिशत और 2027 के लिए 3.4 प्रतिशत पर बनाए रखा है। इस पृष्ठभूमि में भारत का 6.4 प्रतिशत का अनुमान वैश्विक औसत से दोगुने से भी अधिक है, जो देश की सापेक्षिक आर्थिक मज़बूती को रेखांकित करता है। संस्था ने यह भी कहा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था ने मध्य पूर्व संघर्ष का सामना शुरुआती आशंकाओं से बेहतर तरीके से किया है।
इसके अतिरिक्त, 2026 के लिए वैश्विक हेडलाइन महंगाई का अनुमान 4.7 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है। आईएमएफ के अनुसार, 2024 की शुरुआत से जारी महंगाई में गिरावट का रुझान अब रुक गया है।
AI निवेश से राहत
आईएमएफ ने एक सकारात्मक पहलू की ओर भी ध्यान दिलाया — आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में तेज़ी से हो रहा निवेश ऊर्जा की ऊँची कीमतों से हुए कुछ आर्थिक नुकसान की भरपाई करने में मदद कर रहा है। इससे विशेष रूप से वैश्विक टेक्नोलॉजी वैल्यू चेन से जुड़े देशों को लाभ मिल रहा है — एक श्रेणी जिसमें भारत की बढ़ती उपस्थिति उल्लेखनीय है।
आगे की राह
आईएमएफ की यह रिपोर्ट भारत के नीति-निर्माताओं के लिए मिश्रित संदेश लेकर आई है — अल्पकालिक ऊर्जा दबाव के बावजूद मध्यम अवधि की संभावनाएं उत्साहजनक हैं। मज़बूत घरेलू माँग और उम्मीद से बेहतर आर्थिक गतिविधि भारत के लिए अनुकूल संकेत हैं, बशर्ते मध्य पूर्व में तनाव और न बढ़े।