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आईएमएफ का कहना: भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत, पर महंगी ऊर्जा का खतरा बरकरार

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आईएमएफ का कहना: भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत, पर महंगी ऊर्जा का खतरा बरकरार

सारांश

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत की आर्थिक वृद्धि की मजबूती की पुष्टि की। लेकिन चेतावनी दी कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों का बढ़ना अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर समस्या बन सकता है। जानिए इस रिपोर्ट में और क्या कहा गया है।

मुख्य बातें

भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत है।
महंगी ऊर्जा एक संभावित खतरा है।
टैक्स सुधारों का भारत को लाभ मिला है।
रेमिटेंस स्थिर और मजबूत बना हुआ है।
सरकार को कमजोर वर्गों की सुरक्षा करनी चाहिए।

वॉशिंगटन, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने बताया है कि भारत की आर्थिक वृद्धि का दृष्टिकोण अभी भी मजबूत बना हुआ है। हालांकि, अगर वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतें लंबे समय तक बढ़ती रहीं, तो यह अर्थव्यवस्था के लिए एक चुनौती हो सकती है।

आईएमएफ के एशिया और पैसिफिक विभाग के निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन ने स्प्रिंग मीटिंग्स के दौरान एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि हमने अपने पूर्वानुमान में 0.1 प्रतिशत की हल्की वृद्धि की है।

उन्होंने बताया कि यह सुधार 2026 की शुरुआत में मजबूत आर्थिक गति और टैरिफ में कमी के कारण हुआ है। उन्होंने कहा कि 2026 में प्रवेश करते समय अर्थव्यवस्था में अच्छा मोमेंटम था। टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला।

आईएमएफ ने यह भी कहा कि भारत को पहले किए गए टैक्स सुधारों का लाभ मिला है, जिसने घरेलू मांग के साथ मिलकर विकास को सहारा दिया है।

हालांकि, श्रीनिवासन ने चेतावनी दी कि मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष से जुड़े खतरे अभी भी बड़े हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह संकट लंबे समय तक चलता है और केवल तेल-गैस तक सीमित नहीं रहता, तो यह भारत के लिए हानिकारक हो सकता है।

भारत, एशिया के कई अन्य देशों की तरह, ऊर्जा के लिए आयात पर काफी निर्भर है। ऐसे में तेल और गैस की बढ़ती कीमतें महंगाई बढ़ा सकती हैं और बाहरी आर्थिक संतुलन को बिगाड़ सकती हैं।

आईएमएफ ने कहा कि भारत ने अब तक समझदारी से वित्तीय नीति अपनाई है। श्रीनिवासन ने कहा कि उन्होंने अपनी फिस्कल पॉलिसी को बहुत संतुलित रखा है। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने अच्छे बफर बनाए हैं और आवश्यकता पड़ने पर सहारा देने में सक्षम रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यदि वैश्विक हालात बिगड़ते हैं, तो ये बफर बहुत काम आएंगे। यदि स्थिति और खराब होती है, तो इसका असर सभी देशों पर पड़ेगा, जिसमें भारत भी शामिल है।

आईएमएफ ने क्षेत्र के लिए अपनी सामान्य सलाह दोहराते हुए कहा कि सरकारों को बाजार के संकेतों को काम करने देना चाहिए, लेकिन कमजोर वर्गों की सुरक्षा भी करनी चाहिए।

रेमिटेंस (विदेश से आने वाला पैसा), जो भारत के लिए एक बड़ा सहारा है, पर आईएमएफ ने कहा कि यह अभी भी मजबूत बना हुआ है। श्रीनिवासन ने कहा कि रेमिटेंस काफी स्थिर और मजबूत है, और बताया कि भारत और एशिया के अन्य देशों के ज्यादातर कामगार अभी भी मिडिल ईस्ट में कार्यरत हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि वहां पुनर्निर्माण का काम आगे चलकर रेमिटेंस को बनाए रखने में मदद कर सकता है। मुझे लगता है कि रेमिटेंस आगे भी मजबूत रह सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि भारत की आर्थिक वृद्धि की मजबूती एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन बाहरी ऊर्जा कीमतों में वृद्धि से उत्पन्न होने वाले जोखिमों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना आवश्यक है। सरकार को इन संकेतों पर ध्यान देना चाहिए।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की आर्थिक वृद्धि की वर्तमान स्थिति क्या है?
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुसार, भारत की आर्थिक वृद्धि का दृष्टिकोण मजबूत बना हुआ है।
महंगी ऊर्जा की कीमतों का भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव हो सकता है?
यदि ऊर्जा की कीमतें लंबे समय तक बढ़ती हैं, तो यह भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक चुनौती बन सकती है।
भारत ने किस प्रकार के टैक्स सुधार किए हैं?
भारत ने पहले किए गए टैक्स सुधारों का लाभ उठाया है, जिसने घरेलू मांग को सहारा दिया है।
रेमिटेंस का भारत की अर्थव्यवस्था में क्या योगदान है?
रेमिटेंस भारत के लिए एक बड़ा सहारा है और यह अभी भी मजबूत बना हुआ है।
आईएमएफ ने भारत की वित्तीय नीति के बारे में क्या कहा है?
आईएमएफ ने भारत की वित्तीय नीति को समझदारी से अपनाई गई बताया है।
राष्ट्र प्रेस
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