अमित शाह का मुंबई में एशियाटिक सोसाइटी दौरा, 'श्री गणेश ज्ञानारती' प्रदर्शनी का अवलोकन
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 13 सितंबर 2026 को मुंबई स्थित एशियाटिक सोसाइटी ऑफ मुंबई का दौरा किया और संस्था की प्राचीन ग्रंथ संपदा, अभिलेखीय संग्रह तथा सिक्कों पर आधारित विशेष प्रदर्शनी 'श्री गणेश ज्ञानारती' का गहन अवलोकन किया। सोसाइटी के अध्यक्ष विनय सहस्रबुद्धे ने कहा कि गृह मंत्री ने भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रकाश को विश्व में फैलाते रहने का आशीर्वाद दिया।
दौरे की पृष्ठभूमि और आमंत्रण
विनय सहस्रबुद्धे ने बताया कि जब वे पहले अमित शाह से मिले थे, तभी उन्होंने संस्था को स्वयं आँखों से देखने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा, 'उन्होंने इस निमंत्रण को सहर्ष स्वीकार किया, समय निकाला और पूरे काम को बड़ी गंभीरता से देखा-समझा।' सहस्रबुद्धे ने स्पष्ट किया कि 'श्री गणेश ज्ञानारती' नामक यह प्रदर्शनी विशेष रूप से गृह मंत्री और अन्य गणमान्य अतिथियों के लिए आयोजित की गई थी और आम जनता के लिए नहीं थी। गणेश उत्सव की पूर्वसंध्या पर इस नाम का चयन प्रतीकात्मक था।
ब्रिटिश शासन और इंडोलॉजी पर टिप्पणी
सहस्रबुद्धे के अनुसार, अमित शाह ने अपने अध्ययन और अंतर्दृष्टि के आधार पर इस बात पर भी टिप्पणी की कि किस प्रकार ब्रिटिश शासन के दौरान इंडोलॉजी को राजनीति के एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया था। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार भारतीय ज्ञान परंपरा को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रमों में स्थान देने पर ज़ोर दे रही है। गृह मंत्री ने सोसाइटी को हर तरह का सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।
महाराष्ट्र सरकार का समर्थन और परिसर का भविष्य
दौरे के दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शिक्षा मंत्री भी उपस्थित थे। सहस्रबुद्धे ने बताया कि मुख्यमंत्री ने पूरे परिसर को सोसाइटी के नियंत्रण में लाने की दिशा में आश्वासन दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि धन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी और डिजिटाइजेशन के लिए अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
डिजिटाइजेशन और विरासत संरक्षण
सहस्रबुद्धे ने जानकारी दी कि सोसाइटी के पास लगभग ढाई लाख किताबें और दस्तावेज़ हैं, जिनमें से 50 प्रतिशत से अधिक का डिजिटाइजेशन पूरा हो चुका है। पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने इस कार्य के लिए ₹5 करोड़ की राशि दी थी। उन्होंने नासिक, कोल्हापुर, रत्नागिरी और नागपुर जैसे शहरों में मौजूद प्राचीन पोथियों और पूर्वजों द्वारा बनाए गए चित्रों को संकलित करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, ताकि नई पीढ़ी इन धरोहरों को खो न दे।
आगे की राह
सोसाइटी के अध्यक्ष ने कहा कि संस्था को नई ऊँचाई पर ले जाने के प्रयास अब केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के समर्थन से और अधिक गति पकड़ेंगे। विरासत दस्तावेज़ों के डिजिटल संरक्षण और परिसर के पूर्ण नियंत्रण के साथ, एशियाटिक सोसाइटी ऑफ मुंबई भारतीय ज्ञान परंपरा के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने की दिशा में अग्रसर है।