13 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अमित शाह का मुंबई में एशियाटिक सोसाइटी दौरा, 'श्री गणेश ज्ञानारती' प्रदर्शनी का अवलोकन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अमित शाह का मुंबई में एशियाटिक सोसाइटी दौरा, 'श्री गणेश ज्ञानारती' प्रदर्शनी का अवलोकन

सारांश

गृह मंत्री अमित शाह का एशियाटिक सोसाइटी ऑफ मुंबई दौरा महज़ एक औपचारिक विज़िट नहीं था — यह केंद्र और राज्य दोनों के स्तर पर संस्था को नई ताकत देने का संकेत है। ढाई लाख दस्तावेज़ों की विरासत, अधूरा डिजिटाइजेशन और परिसर का नियंत्रण — ये सब अब राजनीतिक प्राथमिकता की सूची में आ गए हैं।

मुख्य बातें

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 13 सितंबर 2026 को एशियाटिक सोसाइटी ऑफ मुंबई का दौरा किया।
विशेष प्रदर्शनी 'श्री गणेश ज्ञानारती' में प्राचीन ग्रंथ संपदा, अभिलेखीय संग्रह और सिक्के प्रदर्शित किए गए।
सोसाइटी के पास लगभग ढाई लाख किताबें और दस्तावेज़, जिनमें से 50% से अधिक का डिजिटाइजेशन पूर्ण।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पूरे परिसर को सोसाइटी के नियंत्रण में देने और अतिरिक्त धनराशि का आश्वासन दिया।
पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने डिजिटाइजेशन के लिए ₹5 करोड़ की राशि प्रदान की थी।
अमित शाह ने ब्रिटिश काल में इंडोलॉजी के राजनीतिक दुरुपयोग पर भी टिप्पणी की।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 13 सितंबर 2026 को मुंबई स्थित एशियाटिक सोसाइटी ऑफ मुंबई का दौरा किया और संस्था की प्राचीन ग्रंथ संपदा, अभिलेखीय संग्रह तथा सिक्कों पर आधारित विशेष प्रदर्शनी 'श्री गणेश ज्ञानारती' का गहन अवलोकन किया। सोसाइटी के अध्यक्ष विनय सहस्रबुद्धे ने कहा कि गृह मंत्री ने भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रकाश को विश्व में फैलाते रहने का आशीर्वाद दिया।

दौरे की पृष्ठभूमि और आमंत्रण

विनय सहस्रबुद्धे ने बताया कि जब वे पहले अमित शाह से मिले थे, तभी उन्होंने संस्था को स्वयं आँखों से देखने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा, 'उन्होंने इस निमंत्रण को सहर्ष स्वीकार किया, समय निकाला और पूरे काम को बड़ी गंभीरता से देखा-समझा।' सहस्रबुद्धे ने स्पष्ट किया कि 'श्री गणेश ज्ञानारती' नामक यह प्रदर्शनी विशेष रूप से गृह मंत्री और अन्य गणमान्य अतिथियों के लिए आयोजित की गई थी और आम जनता के लिए नहीं थी। गणेश उत्सव की पूर्वसंध्या पर इस नाम का चयन प्रतीकात्मक था।

ब्रिटिश शासन और इंडोलॉजी पर टिप्पणी

सहस्रबुद्धे के अनुसार, अमित शाह ने अपने अध्ययन और अंतर्दृष्टि के आधार पर इस बात पर भी टिप्पणी की कि किस प्रकार ब्रिटिश शासन के दौरान इंडोलॉजी को राजनीति के एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया था। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार भारतीय ज्ञान परंपरा को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रमों में स्थान देने पर ज़ोर दे रही है। गृह मंत्री ने सोसाइटी को हर तरह का सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।

महाराष्ट्र सरकार का समर्थन और परिसर का भविष्य

दौरे के दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शिक्षा मंत्री भी उपस्थित थे। सहस्रबुद्धे ने बताया कि मुख्यमंत्री ने पूरे परिसर को सोसाइटी के नियंत्रण में लाने की दिशा में आश्वासन दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि धन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी और डिजिटाइजेशन के लिए अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराई जाएगी।

डिजिटाइजेशन और विरासत संरक्षण

सहस्रबुद्धे ने जानकारी दी कि सोसाइटी के पास लगभग ढाई लाख किताबें और दस्तावेज़ हैं, जिनमें से 50 प्रतिशत से अधिक का डिजिटाइजेशन पूरा हो चुका है। पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने इस कार्य के लिए ₹5 करोड़ की राशि दी थी। उन्होंने नासिक, कोल्हापुर, रत्नागिरी और नागपुर जैसे शहरों में मौजूद प्राचीन पोथियों और पूर्वजों द्वारा बनाए गए चित्रों को संकलित करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, ताकि नई पीढ़ी इन धरोहरों को खो न दे।

आगे की राह

सोसाइटी के अध्यक्ष ने कहा कि संस्था को नई ऊँचाई पर ले जाने के प्रयास अब केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के समर्थन से और अधिक गति पकड़ेंगे। विरासत दस्तावेज़ों के डिजिटल संरक्षण और परिसर के पूर्ण नियंत्रण के साथ, एशियाटिक सोसाइटी ऑफ मुंबई भारतीय ज्ञान परंपरा के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने की दिशा में अग्रसर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश है — भारतीय ज्ञान परंपरा को संस्थागत समर्थन देना अब केंद्र सरकार की सांस्कृतिक कूटनीति का हिस्सा बन चुका है। असली सवाल यह है कि ₹5 करोड़ के बाद भी 50% डिजिटाइजेशन ही क्यों हुआ और शेष ढाई लाख दस्तावेज़ों के लिए ठोस समयसीमा कब तय होगी। परिसर नियंत्रण का 'आश्वासन' वर्षों से चला आ रहा है — इस बार मुख्यमंत्री की उपस्थिति में दिए गए वचन को क्रियान्वयन से परखा जाएगा।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित शाह ने एशियाटिक सोसाइटी ऑफ मुंबई का दौरा क्यों किया?
अध्यक्ष विनय सहस्रबुद्धे के निमंत्रण पर गृह मंत्री अमित शाह ने 13 सितंबर 2026 को संस्था का दौरा किया। उन्होंने प्राचीन ग्रंथ संपदा, अभिलेखीय संग्रह और 'श्री गणेश ज्ञानारती' प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा संस्था की कार्यप्रणाली को समझा।
'श्री गणेश ज्ञानारती' प्रदर्शनी क्या थी?
यह एशियाटिक सोसाइटी द्वारा गृह मंत्री और अन्य गणमान्य अतिथियों के स्वागत में आयोजित विशेष प्रदर्शनी थी, जिसमें प्राचीन सिक्के, ग्रंथ और अभिलेखीय सामग्री प्रदर्शित की गई। गणेश उत्सव की पूर्वसंध्या पर आयोजित होने के कारण इसे यह प्रतीकात्मक नाम दिया गया था और यह आम जनता के लिए नहीं थी।
एशियाटिक सोसाइटी ऑफ मुंबई का डिजिटाइजेशन कहाँ तक पहुँचा है?
सोसाइटी के पास लगभग ढाई लाख किताबें और दस्तावेज़ हैं, जिनमें से 50 प्रतिशत से अधिक का डिजिटाइजेशन पूरा हो चुका है। पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने इस कार्य के लिए ₹5 करोड़ की राशि दी थी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आगे और राशि उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
महाराष्ट्र सरकार ने एशियाटिक सोसाइटी को क्या आश्वासन दिया?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पूरे परिसर को सोसाइटी के नियंत्रण में लाने और पैसे की कमी न होने देने का आश्वासन दिया। दौरे के दौरान उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शिक्षा मंत्री भी उपस्थित थे।
अमित शाह ने ब्रिटिश काल में इंडोलॉजी के बारे में क्या कहा?
सहस्रबुद्धे के अनुसार, अमित शाह ने टिप्पणी की कि ब्रिटिश शासन के दौरान इंडोलॉजी को राजनीति के एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया था। यह टिप्पणी उनके अपने अध्ययन और अंतर्दृष्टि पर आधारित थी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 7 घंटे पहले
  2. 4 दिन पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 9 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 12 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले