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सहकारिता मंत्रालय के 5 साल: अमित शाह बोले — मोदी के फैसले ने करोड़ों को दिया नया जीवन

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सहकारिता मंत्रालय के 5 साल: अमित शाह बोले — मोदी के फैसले ने करोड़ों को दिया नया जीवन

सारांश

सहकारिता मंत्रालय के पाँच साल पूरे होने पर अमित शाह ने कहा कि 75 वर्षों की उपेक्षा के बाद मोदी के एक फैसले ने करोड़ों सहकारिता सदस्यों को नई उम्मीद दी। 55,000 पैक्स का CSC नेटवर्क और राष्ट्रीय बीज सहकारी समिति इस बदलाव की ठोस मिसाल हैं।

मुख्य बातें

केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय ने 6 जुलाई 2026 को अपने पाँच वर्ष पूरे किए; नई दिल्ली में विशेष समारोह आयोजित हुआ।
अमित शाह ने कहा कि 75 वर्षों तक उपेक्षित रहे सहकारिता आंदोलन को 2021 में मंत्रालय बनने के बाद नया जीवन मिला।
देशभर के 55,000 पैक्स अब CSC के ज़रिए 300 से अधिक सेवाएँ देकर ग्रामीण गतिविधि का केंद्र बन रहे हैं।
राष्ट्रीय सहकारी बीज उत्पादन समिति अगले तीन वर्षों में देश की सबसे बड़ी गैर-सरकारी बीज उत्पादन संस्था बनने की राह पर।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर केंद्र सरकार ने हर कस्बे में उनका जन्मदिन मनाने का निर्णय लिया।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 6 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक फैसले ने सहकारिता आंदोलन को नया जीवन दिया है। केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के पाँच वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस समारोह में शाह ने मंत्रालय की उपलब्धियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया और भविष्य के रोडमैप की रूपरेखा भी साझा की।

मुख्य घटनाक्रम

अमित शाह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ही के दिन केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय को केंद्र सरकार में प्रस्तावित करने का काम किया था। सभी सहकारिता सदस्यों की ओर से प्रधानमंत्री का धन्यवाद करना चाहूंगा।' उन्होंने आगे कहा कि 75 वर्षों तक सहकारिता आंदोलन उपेक्षित रहा और उसे हमेशा दोयम दर्जे का माना जाता रहा, लेकिन 2021 में मंत्रालय की स्थापना के बाद से इस क्षेत्र को नई दिशा मिली है।

विरोधियों को जवाब

शाह ने स्मरण कराया कि मंत्रालय के गठन के समय विरोधियों ने तर्क दिया था कि सहकारिता राज्य का विषय है और केंद्र को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाँच वर्षों में किसी भी विपक्षी दल ने कोई ठोस विरोध नहीं किया, जो इस बात का प्रमाण है कि मंत्रालय राज्यों की मदद के लिए काम कर रहा है, न कि उनके अधिकारों में दखल देने के लिए।

पाँच साल की प्रमुख उपलब्धियाँ

केंद्रीय मंत्री के अनुसार, पूरे देश की पीएसी (प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ) अब एक ही मॉडल बायलॉज के तहत काम कर रही हैं। 55,000 पैक्स अब कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से 300 से अधिक सेवाएँ देकर गाँवों की गतिविधि का केंद्र बन रहे हैं। इसके अलावा, बीज उत्पादन के क्षेत्र में स्थापित राष्ट्रीय सहकारी समिति के अगले तीन वर्षों में भारत की सबसे बड़ी गैर-सरकारी बीज उत्पादन संस्था बनने की उम्मीद है। यह समिति किसानों को शुद्ध एवं मिलावट-मुक्त बीज उपलब्ध कराने, उन्नत बीज किस्मों के विकास-वितरण और भारतीय पारंपरिक बीजों के संरक्षण — तीन लक्ष्यों पर काम कर रही है।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि

कार्यक्रम में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के भारत में अभिन्न रहने का श्रेय मुखर्जी को जाता है, जिन्होंने 'दो निशान, दो विधान' के विरुद्ध आंदोलन में अपने प्राण तक न्योछावर किए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अनुच्छेद 370 हटाकर मुखर्जी के सपने को साकार किया। केंद्र सरकार ने यह निर्णय लिया है कि मुखर्जी का जन्मदिन हर कस्बे में मनाया जाएगा।

एनडीए की परंपरा और आगे की राह

शाह ने एनडीए की शासन-परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि जब भी एनडीए को शासन मिला, उसने दबे-कुचले वर्गों को सशक्त बनाने के लिए नए मंत्रालय बनाए — जनजातीय मंत्रालय (अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में), जलशक्ति, मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय (मोदी के कार्यकाल में), और अंततः 2021 में सहकारिता मंत्रालय। उन्होंने संकेत दिया कि मंत्रालय की भावी रोडमैप में कई नई परियोजनाएँ पाइपलाइन से बाहर आकर क्रियान्वयन चरण में प्रवेश करेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि 55,000 पैक्स में से कितने वास्तव में आर्थिक रूप से स्वावलंबी हो पाए हैं और कितने केवल सरकारी सेवा-वितरण के माध्यम बनकर रह गए हैं। राष्ट्रीय बीज सहकारी समिति की तीन वर्षों में 'सबसे बड़ी संस्था' बनने की महत्वाकांक्षा सुनने में बड़ी लगती है, पर इसके लिए जिस आपूर्ति-श्रृंखला और गुणवत्ता-नियंत्रण ढाँचे की ज़रूरत है, उसका कोई सत्यापन-योग्य रोडमैप अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। सहकारिता को राज्य-सूची से केंद्र की प्राथमिकता में लाना नीतिगत साहस था, परंतु यह भी देखना होगा कि क्या यह केंद्रीकरण वास्तव में जमीनी लोकतांत्रिक सहकारिता को मज़बूत करता है या उसे नौकरशाही के अधीन कर देता है।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय की स्थापना कब और क्यों हुई?
केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय की स्थापना 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर हुई। इसका उद्देश्य 75 वर्षों से उपेक्षित सहकारिता आंदोलन को एक समर्पित नीतिगत ढाँचा देकर करोड़ों सदस्यों तक लाभ पहुँचाना था।
55,000 पैक्स और CSC का क्या संबंध है?
देशभर के 55,000 पैक्स (प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ) अब कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से 300 से अधिक सरकारी और गैर-सरकारी सेवाएँ ग्रामीण नागरिकों को उपलब्ध करा रहे हैं। इससे ये समितियाँ केवल ऋण-वितरण केंद्र न रहकर गाँवों की बहु-सेवा इकाइयाँ बन रही हैं।
राष्ट्रीय सहकारी बीज उत्पादन समिति क्या काम करती है?
यह समिति तीन लक्ष्यों पर काम करती है — किसानों को शुद्ध एवं मिलावट-मुक्त बीज देना, उन्नत बीज किस्मों का विकास एवं वितरण, और भारतीय पारंपरिक बीजों का संरक्षण। अमित शाह के अनुसार, यह अगले तीन वर्षों में देश की सबसे बड़ी गैर-सरकारी बीज उत्पादन संस्था बनेगी।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर केंद्र सरकार ने क्या निर्णय लिया?
केंद्र सरकार ने निर्णय लिया है कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्मदिन देशभर के हर कस्बे में मनाया जाएगा। अमित शाह ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के भारत में बने रहने का श्रेय मुखर्जी को जाता है।
विपक्ष ने सहकारिता मंत्रालय का विरोध क्यों किया था?
मंत्रालय गठन के समय विरोधियों का तर्क था कि सहकारिता संविधान की राज्य-सूची का विषय है, इसलिए केंद्र को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। अमित शाह ने कहा कि पाँच वर्षों में किसी विपक्षी दल ने ठोस विरोध नहीं किया, जो मंत्रालय की सहयोगी भूमिका को प्रमाणित करता है।
राष्ट्र प्रेस
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