नक्सलवाद का पाँच दशकों बाद अंत: अमित शाह बोले — 31 मार्च 2026 को खत्म हुई यह चुनौती
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 28 मई 2026 को अहमदाबाद में घोषणा की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश से नक्सलवाद का पूर्ण उन्मूलन हो चुका है। उनके अनुसार, पाँच दशकों से भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बना नक्सलवाद 31 मार्च 2026 को औपचारिक रूप से समाप्त हो गया।
मुख्य घोषणा और संदर्भ
अहमदाबाद स्थित माता उमिया धाम में दो नए छात्रावास भवनों के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार ने देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव किए हैं। उन्होंने कहा, "देश में आर्थिक बदलाव तो हुआ ही है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिला है।"
शाह ने आगे कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केवल 10 वर्षों के भीतर आतंकवाद और नक्सलवाद को समाप्त कर दिया गया है।" गौरतलब है कि नक्सलवाद 1960 के दशक के उत्तरार्ध से भारत के कई राज्यों में सक्रिय रहा है और इसे देश की सबसे लंबी चलने वाली आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में से एक माना जाता रहा है।
डेमोग्राफिक चेंज कमीशन का गठन
गृह मंत्री ने अपने संबोधन में पश्चिम बंगाल और घुसपैठ के मुद्दे का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय ने 'डेमोग्राफिक चेंज कमीशन' का गठन किया है। यह आयोग असामान्य जनसंख्या बदलावों, उनके कारणों और घुसपैठ से जुड़े जनसंख्या परिवर्तन के कानूनी पहलुओं का अध्ययन करेगा।
छात्रावास परियोजना का विवरण
यह कार्यक्रम जे.एस. पटेल हॉस्टल और तपस्वी कुमार अरविंदभाई पटेल गर्ल्स हॉस्टल के उद्घाटन के अवसर पर आयोजित किया गया था। आयोजकों के अनुसार, दोनों 13 मंजिला छात्रावास भवनों का निर्माण ₹170 करोड़ से अधिक की लागत से हुआ है। इनमें अहमदाबाद और गांधीनगर में पढ़ाई करने वाले करीब 1,600 छात्रों को आवास सुविधा मिलेगी।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख नेता
इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, वरिष्ठ BJP नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल, राजकोट सांसद पुरुषोत्तम रूपाला, राज्य सरकार के मंत्री तथा उमिया माता संस्थान के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। शाह ने परियोजना से जुड़े आयोजकों और दानदाताओं को बधाई दी और संस्थान की शेष परियोजनाओं के शीघ्र पूर्ण होने की उम्मीद जताई।
आगे क्या
शाह के इस दावे की विपक्षी दलों और सुरक्षा विशेषज्ञों द्वारा जाँच अपेक्षित है, क्योंकि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ज़मीनी स्थिति का स्वतंत्र सत्यापन अभी बाकी है। डेमोग्राफिक चेंज कमीशन के कार्यक्षेत्र और समयसीमा पर भी आने वाले दिनों में स्पष्टता की उम्मीद है।