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प्रधानमंत्री मोदी ने अमित शाह के भाषण की सराहना की, संसदीय परंपराओं का महत्व बताया

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प्रधानमंत्री मोदी ने अमित शाह के भाषण की सराहना की, संसदीय परंपराओं का महत्व बताया

सारांश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लोकसभा में दिए गए भाषण की सराहना की, जिसमें संसद की परंपराओं और सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया गया। यह भाषण न सिर्फ तथ्यों से भरा था, बल्कि देश की प्रगति के लिए सहयोग का भी आह्वान करता है।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री मोदी ने अमित शाह के भाषण की सराहना की।
संसद की परंपराओं का महत्व उजागर किया गया।
अविश्वास प्रस्ताव पर गंभीर चर्चा हुई।
संसदीय गरिमा और सदस्य अधिकारों की रक्षा की आवश्यकता।
संसद की उत्पादकता के आंकड़े साझा किए गए।

नई दिल्ली, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भाषण की सराहना की है। उन्होंने उल्लेख किया कि इस भाषण में संसद की परंपराओं के महत्व और देश की प्रगति के लिए सामूहिक प्रयासों की चर्चा की गई थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "गृह मंत्री अमित शाह का यह भाषण अत्यंत प्रभावशाली है। इसमें तथ्यों की भरपूरता के साथ-साथ संसदीय परंपराओं का महत्व और देश की प्रगति के लिए आपसी सहयोग की आवश्यकता का भी वर्णन किया गया है।"

केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ पेश अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में चर्चा का उत्तर दिया। उन्होंने कहा कि यह कोई साधारण घटना नहीं है। लगभग चार दशक बाद लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया है। उन्होंने इसे संसदीय राजनीति के लिए एक दुखद घटना बताया।

अमित शाह ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष किसी खास दल के नहीं होते, बल्कि पूरे सदन के होते हैं और सभी सदस्यों के अधिकारों के संरक्षक होते हैं। स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना साहसिक नहीं है।

उन्होंने बताया कि लगभग 13 घंटों तक पक्ष-विपक्ष ने इस मुद्दे पर चर्चा की, जिसमें 42 से अधिक सांसदों ने भाग लिया। स्पीकर के निर्णय को अंतिम मानने के बजाय विपक्ष ने उनकी निष्ठा पर सवाल उठाया है। शाह ने कहा कि लोकसभा भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत है, और यदि इसके मुखिया की निष्ठा पर सवाल उठता है, तो यह केवल भारत नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में हमारे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है।

अमित शाह ने कहा कि वे भी विपक्ष में रहे हैं, और उस दौरान तीन बार स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया, लेकिन उनकी पार्टी और गठबंधन ने कभी ऐसा प्रस्ताव पेश नहीं किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने रचनात्मक विपक्ष के रूप में कार्य किया है और स्पीकर की गरिमा का संरक्षण किया है।

अपने भाषण में अमित शाह ने कहा कि लोकसभा के नियम 374 में अव्यवस्था और अनुशासनहीनता की स्थिति में स्पीकर को चेतावनी देने, नामित करने, निष्कासित करने और निलंबन का अधिकार है। उन्होंने कहा कि आंदोलन और एक्टिविस्ट को सदन के नियमों के अनुसार ही चलना होगा।

उन्होंने कहा कि लय में की गई असंसदीय टिप्पणियां संसद के इतिहास में नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि इससे आने वाले सांसद भी यही संस्कार लेकर जाएंगे। शाह ने कहा कि असंसदीय शब्दों की सूची सदन के अस्तित्व में आने से लेकर अब तक कई महानुभावों ने बनाई है और यह सभी के लिए बाध्यकारी है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया कि 16वीं लोकसभा में 331 बैठकें हुईं, 17वीं लोकसभा में 274 और मौजूदा लोकसभा में 2025 तक 103 बैठकें होने की संभावना है। वर्ष 2025 का बजट सत्र 118 प्रतिशत उत्पादकता वाला रहा। उन्होंने कहा कि 16वीं लोकसभा की उत्पादकता 91 प्रतिशत, 17वीं की भी 91 प्रतिशत और 18वीं की भी 91 प्रतिशत रही, जिसमें अधिकतम उत्पादकता मौजूदा स्पीकर ओम बिरला के कार्यकाल में हुई है। अध्यक्ष ने शून्य काल की अवधि को 5 घंटे तक बढ़ाया है।

शाह ने कहा कि विधायक और सांसद रहते हुए उन्हें 30 साल हो चुके हैं, लेकिन उन्होंने कभी नहीं देखा कि स्पीकर ने सदस्यों को रात 12 बजे तक शून्य काल के मुद्दे उठाने का मौका दिया हो। उन्होंने 202 सांसदों को प्रश्न उठाने का मौका दिया है, जबकि विपक्ष का कहना है कि उन्हें मुद्दे उठाने का अवसर नहीं मिलता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि देश की प्रगति के लिए सहयोग की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह का यह संवाद लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित शाह ने भाषण में क्या मुख्य बातें कहीं?
अमित शाह ने संसद की परंपराओं के महत्व, अविश्वास प्रस्ताव की गंभीरता और स्पीकर के अधिकारों पर चर्चा की।
प्रधानमंत्री मोदी ने अमित शाह के भाषण की कैसी सराहना की?
प्रधानमंत्री मोदी ने इसे तथ्यों से भरा और संसदीय परंपराओं के महत्व को उजागर करने वाला बताया।
लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव क्यों पेश किया गया?
यह प्रस्ताव लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ पेश किया गया, जो संसदीय राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है।
अमित शाह ने स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर क्या कहा?
उन्होंने इसे साहसिक नहीं बल्कि संसदीय गरिमा के लिए चिंता का विषय बताया।
संसद में नियमों का क्या महत्व होता है?
नियम संसद की कार्यवाही को सुचारू और अनुशासित रखने में मदद करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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