राज्यसभा में बड़ा बदलाव: 'आप' के 7 पूर्व सांसद आधिकारिक रूप से भाजपा में शामिल, BJP की संख्या 113 पहुंची
सारांश
Key Takeaways
- राज्यसभा सचिवालय ने 27 अप्रैल 2026 को आधिकारिक 'पार्टी पोजीशन' सूची जारी की जिसमें 'आप' के 7 पूर्व सांसद भाजपा में दर्ज हुए।
- राघव चड्ढा, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, संदीप कुमार पाठक, डॉ. अशोक कुमार मित्तल, विक्रमजीत सिंह साहनी और राजिंदर गुप्ता अब आधिकारिक तौर पर भाजपा सांसद हैं।
- राज्यसभा में भाजपा की सदस्य संख्या 113 हो गई है, जो उच्च सदन में पार्टी की अब तक की सबसे बड़ी उपस्थिति है।
- आम आदमी पार्टी की राज्यसभा में सदस्य संख्या 10 से घटकर सिर्फ 3 रह गई है।
- राज्यसभा में कांग्रेस 29, तृणमूल कांग्रेस 13 और डीएमके 8 सांसदों के साथ प्रमुख विपक्षी दलों में शामिल हैं।
- यह बदलाव 24 अप्रैल 2026 तक की स्थिति को दर्शाता है और आने वाले समय में संसदीय विधेयकों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2026 — भारतीय संसद के उच्च सदन राज्यसभा में राजनीतिक शक्ति संतुलन एक बार फिर बदल गया है। राज्यसभा सचिवालय द्वारा सोमवार को जारी आधिकारिक 'पार्टी पोजीशन' दस्तावेज में आम आदमी पार्टी (AAP) के सात पूर्व सांसदों के नाम भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसदों की सूची में दर्ज कर दिए गए हैं। इस बदलाव के साथ ही राज्यसभा में भाजपा की कुल सदस्य संख्या बढ़कर 113 हो गई है, जबकि आम आदमी पार्टी महज 3 सांसदों तक सिमट गई है।
किन नेताओं के नाम भाजपा सूची में हुए दर्ज?
राज्यसभा सचिवालय द्वारा जारी सूची के अनुसार जिन सात पूर्व 'आप' नेताओं को अब आधिकारिक रूप से भाजपा सांसद के रूप में मान्यता दी गई है, उनके नाम इस प्रकार हैं — डॉ. अशोक कुमार मित्तल, राघव चड्ढा, हरभजन सिंह, संदीप कुमार पाठक, विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता। यह सूची 24 अप्रैल 2026 तक की स्थिति को प्रतिबिंबित करती है।
इनमें से राघव चड्ढा और संदीप कुमार पाठक 'आप' के कभी सबसे मुखर चेहरों में से थे, जबकि हरभजन सिंह क्रिकेट जगत से राजनीति में आए थे। स्वाति मालीवाल का मामला तो पहले से ही विवादों में रहा था और उन्होंने 'आप' से अपनी दूरी सार्वजनिक रूप से जाहिर कर दी थी।
राज्यसभा में दलों की मौजूदा स्थिति
राज्यसभा सचिवालय के ताज़े आंकड़ों के अनुसार उच्च सदन में दलों की स्थिति इस प्रकार है:
भाजपा — 113 सदस्य (सबसे बड़ी पार्टी)
कांग्रेस — 29 सदस्य (मुख्य विपक्षी दल)
तृणमूल कांग्रेस — 13 सदस्य
डीएमके — 8 सदस्य
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी — 7 सदस्य
बीजू जनता दल — 6 सदस्य
अन्नाद्रमुक — 5 सदस्य
जनता दल (यूनाइटेड), समाजवादी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी — 4-4 सदस्य
राष्ट्रीय जनता दल, भारत राष्ट्र समिति, माकपा, जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस — 3-3 सदस्य
आम आदमी पार्टी — 3 सदस्य
झारखंड मुक्ति मोर्चा, भाकपा — 2-2 सदस्य
निर्दलीय — 3 सदस्य
नामित सदस्य — 7
'आप' के लिए बड़ा झटका — राजनीतिक संदर्भ
यह घटनाक्रम आम आदमी पार्टी के लिए किसी गहरे राजनीतिक संकट से कम नहीं है। महज कुछ वर्षों पहले 'आप' ने राज्यसभा में अपनी उपस्थिति को 10 सांसदों तक पहुंचाया था, जो अब घटकर 3 रह गई है। यह गिरावट न केवल संख्यात्मक है बल्कि प्रतीकात्मक रूप से भी पार्टी की राष्ट्रीय साख पर प्रश्नचिह्न लगाती है।
गौरतलब है कि 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत से जीत के बाद 'आप' ने खुद को एक राष्ट्रीय विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया था। लेकिन 2025-26 के दौरान दिल्ली विधानसभा चुनाव में करारी हार और फिर राज्यसभा सांसदों के एक-एक कर पार्टी छोड़ने से 'आप' की स्थिति कमज़ोर होती गई।
विश्लेषकों का मानना है कि जिन नेताओं ने 'आप' छोड़कर भाजपा का दामन थामा, उनमें से अधिकांश के राज्यसभा कार्यकाल अभी शेष हैं। यह भाजपा के लिए रणनीतिक लाभ है क्योंकि बिना किसी उपचुनाव के ही उसकी संख्या बढ़ गई।
राज्यसभा में भाजपा की बढ़ती ताकत — आगे क्या?
113 सांसदों के साथ भाजपा राज्यसभा में अब तक की अपनी सबसे मजबूत स्थिति में है। हालांकि उच्च सदन में बहुमत के लिए लगभग 123 सीटें आवश्यक होती हैं, फिर भी एनडीए के सहयोगी दलों को मिलाकर सरकार की स्थिति काफी सुदृढ़ है।
इससे महत्वपूर्ण विधेयकों को राज्यसभा में पारित कराने में भाजपा को पहले से अधिक आसानी होगी। विपक्षी दलों की संयुक्त संख्या अभी भी उल्लेखनीय है, लेकिन 'आप' जैसी पार्टी का कमज़ोर होना विपक्ष की एकजुटता को प्रभावित कर सकता है।
आने वाले महीनों में जैसे-जैसे राज्यसभा के विभिन्न सदस्यों के कार्यकाल समाप्त होंगे और नए चुनाव होंगे, उच्च सदन का राजनीतिक समीकरण और बदल सकता है। राज्यसभा सचिवालय की यह सूची संसदीय राजनीति की बदलती धारा का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बन गई है।