30 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

राज्यसभा में बड़ा बदलाव: 'आप' के 7 पूर्व सांसद आधिकारिक रूप से भाजपा में शामिल, BJP की संख्या 113 पहुंची

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
राज्यसभा में बड़ा बदलाव: 'आप' के 7 पूर्व सांसद आधिकारिक रूप से भाजपा में शामिल, BJP की संख्या 113 पहुंची

सारांश

राज्यसभा सचिवालय की आधिकारिक सूची में 'आप' के 7 पूर्व सांसद — राघव चड्ढा, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल समेत — अब भाजपा सांसद के रूप में दर्ज। भाजपा की संख्या 113, 'आप' सिर्फ 3 सांसदों तक सिमटी।

मुख्य बातें

राज्यसभा सचिवालय ने 27 अप्रैल 2026 को आधिकारिक 'पार्टी पोजीशन' सूची जारी की जिसमें 'आप' के 7 पूर्व सांसद भाजपा में दर्ज हुए।
राघव चड्ढा, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, संदीप कुमार पाठक, डॉ.
अशोक कुमार मित्तल, विक्रमजीत सिंह साहनी और राजिंदर गुप्ता अब आधिकारिक तौर पर भाजपा सांसद हैं।
राज्यसभा में भाजपा की सदस्य संख्या 113 हो गई है, जो उच्च सदन में पार्टी की अब तक की सबसे बड़ी उपस्थिति है।
आम आदमी पार्टी की राज्यसभा में सदस्य संख्या 10 से घटकर सिर्फ 3 रह गई है।
राज्यसभा में कांग्रेस 29, तृणमूल कांग्रेस 13 और डीएमके 8 सांसदों के साथ प्रमुख विपक्षी दलों में शामिल हैं।
यह बदलाव 24 अप्रैल 2026 तक की स्थिति को दर्शाता है और आने वाले समय में संसदीय विधेयकों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2026 — भारतीय संसद के उच्च सदन राज्यसभा में राजनीतिक शक्ति संतुलन एक बार फिर बदल गया है। राज्यसभा सचिवालय द्वारा सोमवार को जारी आधिकारिक 'पार्टी पोजीशन' दस्तावेज में आम आदमी पार्टी (AAP) के सात पूर्व सांसदों के नाम भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसदों की सूची में दर्ज कर दिए गए हैं। इस बदलाव के साथ ही राज्यसभा में भाजपा की कुल सदस्य संख्या बढ़कर 113 हो गई है, जबकि आम आदमी पार्टी महज 3 सांसदों तक सिमट गई है।

किन नेताओं के नाम भाजपा सूची में हुए दर्ज?

राज्यसभा सचिवालय द्वारा जारी सूची के अनुसार जिन सात पूर्व 'आप' नेताओं को अब आधिकारिक रूप से भाजपा सांसद के रूप में मान्यता दी गई है, उनके नाम इस प्रकार हैं — डॉ. अशोक कुमार मित्तल, राघव चड्ढा, हरभजन सिंह, संदीप कुमार पाठक, विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता। यह सूची 24 अप्रैल 2026 तक की स्थिति को प्रतिबिंबित करती है।

इनमें से राघव चड्ढा और संदीप कुमार पाठक 'आप' के कभी सबसे मुखर चेहरों में से थे, जबकि हरभजन सिंह क्रिकेट जगत से राजनीति में आए थे। स्वाति मालीवाल का मामला तो पहले से ही विवादों में रहा था और उन्होंने 'आप' से अपनी दूरी सार्वजनिक रूप से जाहिर कर दी थी।

राज्यसभा में दलों की मौजूदा स्थिति

राज्यसभा सचिवालय के ताज़े आंकड़ों के अनुसार उच्च सदन में दलों की स्थिति इस प्रकार है:

भाजपा113 सदस्य (सबसे बड़ी पार्टी)
कांग्रेस29 सदस्य (मुख्य विपक्षी दल)
तृणमूल कांग्रेस13 सदस्य
डीएमके8 सदस्य
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी7 सदस्य
बीजू जनता दल6 सदस्य
अन्नाद्रमुक5 सदस्य
जनता दल (यूनाइटेड), समाजवादी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी4-4 सदस्य
राष्ट्रीय जनता दल, भारत राष्ट्र समिति, माकपा, जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस3-3 सदस्य
आम आदमी पार्टी3 सदस्य
झारखंड मुक्ति मोर्चा, भाकपा2-2 सदस्य
निर्दलीय3 सदस्य
नामित सदस्य7

'आप' के लिए बड़ा झटका — राजनीतिक संदर्भ

यह घटनाक्रम आम आदमी पार्टी के लिए किसी गहरे राजनीतिक संकट से कम नहीं है। महज कुछ वर्षों पहले 'आप' ने राज्यसभा में अपनी उपस्थिति को 10 सांसदों तक पहुंचाया था, जो अब घटकर 3 रह गई है। यह गिरावट न केवल संख्यात्मक है बल्कि प्रतीकात्मक रूप से भी पार्टी की राष्ट्रीय साख पर प्रश्नचिह्न लगाती है।

गौरतलब है कि 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत से जीत के बाद 'आप' ने खुद को एक राष्ट्रीय विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया था। लेकिन 2025-26 के दौरान दिल्ली विधानसभा चुनाव में करारी हार और फिर राज्यसभा सांसदों के एक-एक कर पार्टी छोड़ने से 'आप' की स्थिति कमज़ोर होती गई।

विश्लेषकों का मानना है कि जिन नेताओं ने 'आप' छोड़कर भाजपा का दामन थामा, उनमें से अधिकांश के राज्यसभा कार्यकाल अभी शेष हैं। यह भाजपा के लिए रणनीतिक लाभ है क्योंकि बिना किसी उपचुनाव के ही उसकी संख्या बढ़ गई।

राज्यसभा में भाजपा की बढ़ती ताकत — आगे क्या?

113 सांसदों के साथ भाजपा राज्यसभा में अब तक की अपनी सबसे मजबूत स्थिति में है। हालांकि उच्च सदन में बहुमत के लिए लगभग 123 सीटें आवश्यक होती हैं, फिर भी एनडीए के सहयोगी दलों को मिलाकर सरकार की स्थिति काफी सुदृढ़ है।

इससे महत्वपूर्ण विधेयकों को राज्यसभा में पारित कराने में भाजपा को पहले से अधिक आसानी होगी। विपक्षी दलों की संयुक्त संख्या अभी भी उल्लेखनीय है, लेकिन 'आप' जैसी पार्टी का कमज़ोर होना विपक्ष की एकजुटता को प्रभावित कर सकता है।

आने वाले महीनों में जैसे-जैसे राज्यसभा के विभिन्न सदस्यों के कार्यकाल समाप्त होंगे और नए चुनाव होंगे, उच्च सदन का राजनीतिक समीकरण और बदल सकता है। राज्यसभा सचिवालय की यह सूची संसदीय राजनीति की बदलती धारा का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बन गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह उस राजनीतिक परियोजना के पतन की कहानी है जो खुद को 'भ्रष्टाचार के खिलाफ विकल्प' बताकर उभरी थी। विडंबना यह है कि जिन नेताओं ने 'आप' के बैनर तले जनता का विश्वास जीता, वे अब उसी भाजपा का हिस्सा हैं जिसके खिलाफ उन्होंने वर्षों प्रचार किया। राज्यसभा में भाजपा की 113 सदस्यों तक की पहुंच यह बताती है कि 'मिशन उच्च सदन' अब लगभग पूरा होने की कगार पर है। सवाल यह है कि क्या 'आप' अब एक राष्ट्रीय पार्टी के रूप में अपनी प्रासंगिकता बचा पाएगी, या यह सिर्फ एक क्षेत्रीय ताकत बनकर रह जाएगी?
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राज्यसभा में 'आप' के कितने सांसद अब भाजपा में शामिल हो गए हैं?
राज्यसभा सचिवालय की आधिकारिक सूची के अनुसार 'आप' के 7 पूर्व सांसद अब भाजपा सांसद के रूप में दर्ज हैं। इनमें राघव चड्ढा, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, संदीप कुमार पाठक, डॉ. अशोक कुमार मित्तल, विक्रमजीत सिंह साहनी और राजिंदर गुप्ता शामिल हैं।
राज्यसभा में अभी भाजपा के कितने सांसद हैं?
24 अप्रैल 2026 की स्थिति के अनुसार राज्यसभा में भाजपा के कुल 113 सांसद हैं। यह राज्यसभा में भाजपा की अब तक की सबसे बड़ी संख्या है।
राज्यसभा में अब आम आदमी पार्टी के कितने सांसद बचे हैं?
राज्यसभा सचिवालय की ताज़ा सूची के अनुसार 'आप' के पास अब केवल 3 सांसद रह गए हैं। पहले यह संख्या 10 थी, जो 7 सांसदों के भाजपा में जाने से घटकर 3 हो गई।
राघव चड्ढा भाजपा में कब शामिल हुए?
राघव चड्ढा समेत सात 'आप' सांसदों ने भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया था और 24 अप्रैल 2026 तक की स्थिति में उनके नाम राज्यसभा की आधिकारिक भाजपा सांसद सूची में दर्ज कर दिए गए।
राज्यसभा में बहुमत के लिए कितनी सीटें चाहिए और भाजपा कहां है?
राज्यसभा में बहुमत के लिए लगभग 123 सीटें आवश्यक होती हैं। भाजपा के पास अभी 113 सदस्य हैं, लेकिन एनडीए सहयोगी दलों को मिलाकर सरकार बहुमत के करीब है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले