राजनाथ सिंह-बेलौसोव मुलाकात: बिश्केक में भारत-रूस रक्षा सहयोग पर अहम द्विपक्षीय वार्ता

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राजनाथ सिंह-बेलौसोव मुलाकात: बिश्केक में भारत-रूस रक्षा सहयोग पर अहम द्विपक्षीय वार्ता

सारांश

बिश्केक में SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक के इतर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रूस के आंद्रेई बेलौसोव और चीन के एडमिरल डोंग जुन दोनों से अलग-अलग द्विपक्षीय वार्ता की। रक्षा सहयोग, सैन्य तकनीक और क्षेत्रीय सुरक्षा हालात पर हुई यह बातचीत बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत की कूटनीतिक सक्रियता को दर्शाती है।

Key Takeaways

  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 29 अप्रैल 2025 को बिश्केक में रूसी रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव से द्विपक्षीय वार्ता की।
  • बैठक SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक के इतर किर्गिस्तान की राजधानी में आयोजित हुई।
  • रक्षा सहयोग, सैन्य तकनीक, संयुक्त परियोजनाएँ और भारत में संयुक्त रक्षा उत्पादन प्रमुख एजेंडे में रहे।
  • इसी दिन राजनाथ सिंह ने चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जुन से भी अलग द्विपक्षीय बैठक की।
  • राजनाथ सिंह SCO के अन्य सदस्य देशों के प्रतिनिधियों से भी द्विपक्षीय बैठकें करेंगे और किर्गिस्तान में बसे भारतीय समुदाय से मिलेंगे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 29 अप्रैल 2025 को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में रूस के रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव के साथ द्विपक्षीय वार्ता की, जिसे राजनाथ सिंह ने स्वयं "बेहतरीन और सार्थक" बताया। यह महत्वपूर्ण बैठक शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के रक्षा मंत्रियों की बैठक के इतर आयोजित की गई, जहाँ दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, सैन्य तकनीक और क्षेत्रीय सुरक्षा हालात पर विस्तृत चर्चा हुई।

मुख्य घटनाक्रम

बिश्केक में आयोजित SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान राजनाथ सिंह ने आंद्रेई बेलौसोव के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा हालात पर विस्तार से चर्चा हुई। रक्षा सहयोग, सैन्य तकनीक और संयुक्त परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। इसी दिन राजनाथ सिंह ने चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जुन के साथ भी एक अलग द्विपक्षीय बैठक की।

भारत-रूस रक्षा संबंधों की पृष्ठभूमि

भारत और रूस के बीच दशकों पुराने मज़बूत रक्षा संबंध हैं। भारतीय सशस्त्र बलों में उपयोग होने वाले कई प्रमुख सैन्य उपकरण और प्लेटफॉर्म रूस से जुड़े हैं — इनमें लड़ाकू विमान, पनडुब्बियाँ और मिसाइल प्रणालियाँ शामिल हैं। गौरतलब है कि दोनों देश रक्षा उत्पादन में सहयोग को और विस्तार देने पर लगातार सहमति जताते रहे हैं।

यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चुनौतियाँ तेज़ी से बदल रही हैं। भारत में ही संयुक्त रूप से रक्षा उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे देश की आत्मनिर्भरता और तकनीकी क्षमता दोनों में वृद्धि होगी।

रक्षा परियोजनाओं की समीक्षा

अधिकारियों के अनुसार, दोनों पक्ष समय-समय पर रक्षा परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हैं और तय समयसीमा में उन्हें पूरा करने पर सहमत हैं। माना जा रहा है कि सैन्य-तकनीकी सहयोग को और मज़बूत बनाने के लिए नए क्षेत्रों की पहचान पर भी इस बैठक में चर्चा हुई।

भारत-चीन रक्षा वार्ता

इसी दौरान राजनाथ सिंह और चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जुन के बीच भी SCO बैठक के इतर एक महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। दोनों देशों के रक्षामंत्रियों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और आपसी सहयोग पर चर्चा की। माना जा रहा है कि एशिया की मौजूदा सुरक्षा स्थिति, सीमा क्षेत्रों में बेहतर समन्वय और तनाव कम करने के लिए प्रभावी संचार तंत्र को मज़बूत बनाने पर भी जोर दिया गया।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि SCO जैसे बहुपक्षीय मंच पर इस तरह की द्विपक्षीय वार्ताएँ सदस्य देशों के बीच विश्वास और सहयोग को बढ़ाती हैं। बिश्केक में हुई ये बैठकें भारत-रूस के रणनीतिक संबंधों को और मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं। राजनाथ सिंह किर्गिस्तान में रह रहे भारतीय समुदाय से भी मुलाकात करेंगे और SCO के अन्य सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें करेंगे।

Point of View

तब भारत-रूस रक्षा संबंधों की निरंतरता नई दिल्ली की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति की पुष्टि करती है। वहीं चीन के साथ बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब गलवान के बाद सीमा पर तनाव धीरे-धीरे कम हो रहा है। असली परीक्षा यह है कि क्या ये वार्ताएँ ठोस रक्षा परियोजनाओं और सीमा समझौतों में तब्दील होती हैं, या सिर्फ कूटनीतिक संकेत बनकर रह जाती हैं।
NationPress
28/04/2026

Frequently Asked Questions

राजनाथ सिंह और बेलौसोव की मुलाकात कहाँ और कब हुई?
यह मुलाकात 29 अप्रैल 2025 को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक के इतर हुई। राजनाथ सिंह ने इस बातचीत को 'बेहतरीन और सार्थक' बताया।
भारत-रूस रक्षा वार्ता में किन मुद्दों पर चर्चा हुई?
माना जा रहा है कि दोनों देशों के रक्षामंत्रियों के बीच क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा हालात, रक्षा सहयोग, सैन्य तकनीक, संयुक्त परियोजनाओं और भारत में संयुक्त रक्षा उत्पादन पर चर्चा हुई।
SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक क्या है?
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक बहुपक्षीय सुरक्षा और आर्थिक संगठन है जिसमें भारत, रूस, चीन सहित कई देश सदस्य हैं। इसकी रक्षा मंत्रियों की बैठक में सदस्य देश क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग पर विचार-विमर्श करते हैं।
राजनाथ सिंह ने चीन के रक्षा मंत्री से भी मुलाकात की?
हाँ, इसी दिन राजनाथ सिंह ने चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जुन से भी SCO बैठक के इतर द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों देशों के रक्षामंत्रियों ने क्षेत्रीय सुरक्षा, आपसी सहयोग और सीमा क्षेत्रों में बेहतर समन्वय पर चर्चा की।
भारत-रूस रक्षा संबंध कितने पुराने और मज़बूत हैं?
भारत और रूस के बीच दशकों पुराने मज़बूत रक्षा संबंध हैं। भारतीय सशस्त्र बलों में लड़ाकू विमान, पनडुब्बियाँ और मिसाइल प्रणालियाँ सहित कई प्रमुख सैन्य उपकरण रूस से जुड़े हैं।
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