बांग्लादेश में हिरासत यातना पर UN विशेषज्ञ ऐलिस एडवर्ड्स की चेतावनी, 'ए-स्टेटस' आयोग की कमी उजागर
सारांश
Key Takeaways
- UN विशेषज्ञ ऐलिस एडवर्ड्स ने 28 अप्रैल को ढाका में बांग्लादेश के मानवाधिकार ढाँचे की कमियाँ उजागर कीं।
- बांग्लादेश में 'ए-स्टेटस' राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय रोकथाम तंत्र का अभाव है।
- बांग्लादेश के संविधान में यातना पर रोक है और 2013 में यातना विरोधी कानून बना, परंतु क्रियान्वयन अधूरा है।
- हिरासत में वकील का अधिकार, मेडिकल जाँच, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग और शीघ्र अदालत पेशी सुनिश्चित करने की माँग।
- एडवर्ड्स के दौरे के बाद संयुक्त राष्ट्र को विस्तृत सिफारिशों सहित रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
संयुक्त राष्ट्र की यातना मामलों की विशेष प्रतिवेदक ऐलिस एडवर्ड्स ने 28 अप्रैल को ढाका में आयोजित एक सलाहकार बैठक में बांग्लादेश में 'ए-स्टेटस' राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की अनुपस्थिति और हिरासत में यातना रोकने के लिए राष्ट्रीय रोकथाम तंत्र के न होने पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि देश में हिंसा बहुत गहराई से व्यवस्थित रूप से और लंबे समय से मौजूद है।
बैठक का उद्देश्य और आयोजन
यह सलाहकार बैठक ढाका के होटल हॉलिडे इन में आयोजित की गई, जिसका मकसद बांग्लादेश में यातना रोकने और जवाबदेही बढ़ाने के ढाँचे को मज़बूत करना था। इस कार्यक्रम का आयोजन बांग्लादेश लीगल एड सर्विसेज ट्रस्ट, एसोसिएशन फॉर द प्रिवेंशन ऑफ टॉर्चर, इंटरनेशनल रिहैबिलिटेशन काउंसिल फॉर टॉर्चर विक्टिम्स और रेड्रेस ने संयुक्त रूप से किया। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब एडवर्ड्स बांग्लादेश के एक सप्ताह के अध्ययन दौरे पर हैं।
कानूनी ढाँचा मज़बूत, सहायक संरचना अधूरी
विशेष प्रतिवेदक ने स्वीकार किया कि बांग्लादेश के पास एक मज़बूत कानूनी ढाँचा तो है, परंतु उसका सहायक ढाँचा अधूरा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश के संविधान में यातना पर रोक है, देश ने 'कन्वेंशन अगेंस्ट टॉर्चर' को मंजूरी दी है, और 2013 में यातना को अपराध घोषित करने वाला कानून भी बनाया गया है। गौरतलब है कि इन कानूनी प्रावधानों के बावजूद ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वयन की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
पुलिस हिरासत में सुरक्षा उपायों की माँग
एडवर्ड्स ने हिरासत में रखे गए व्यक्तियों के लिए कई बुनियादी सुरक्षा उपायों की ज़रूरत रेखांकित की। उनके अनुसार हिरासत में रखे गए व्यक्ति की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए; उसे वकील से मिलने का अधिकार, मेडिकल जाँच, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग और शीघ्र अदालत में पेशी सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायाधीश भी इस जवाबदेही से अलग नहीं हैं — उन्हें यातना को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए और न ही लोगों को उन जेलों में भेजना चाहिए जहाँ भीड़ और हिंसा आम है।
स्वतंत्र जाँच तंत्र की अनिवार्यता
विशेष प्रतिवेदक ने ज़ोर दिया कि हिरासत में यातना के मामलों की जाँच के लिए स्वतंत्र संस्थाओं की आवश्यकता है जो दोषियों से पूरी तरह अलग हों। जाँच त्वरित और निष्पक्ष होनी चाहिए। आलोचकों का कहना है कि ग्लोबल एलायंस ऑफ नेशनल ह्यूमन राइट्स इंस्टीट्यूशंस के मानकों के अनुरूप 'ए-स्टेटस' आयोग के बिना बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही मानकों से पीछे बना रहेगा। यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच मानवाधिकार उल्लंघनों की रिपोर्टें बढ़ी हैं।
आगे की राह
विशेष प्रतिवेदक का यह दौरा बांग्लादेश में मानवाधिकार ढाँचे की व्यापक समीक्षा का हिस्सा है। द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, एडवर्ड्स के दौरे के बाद संयुक्त राष्ट्र को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी जाएगी जिसमें बांग्लादेश के लिए ठोस सिफारिशें होंगी। अब देखना यह है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार इन सिफारिशों पर कितनी तेज़ी से और कितनी गंभीरता से अमल करती है।