मोहन भगवत मुंबई में 2,000 युवाओं से करेंगे संवाद, IIMUN के 15वें सम्मेलन में भारत की वैश्विक भूमिका पर चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भगवत 6 अगस्त 2026 को मुंबई में इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (IIMUN) के वार्षिक चैम्पियनशिप सम्मेलन में 100 से अधिक शहरों के 2,000 से अधिक छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद करेंगे। यह सम्मेलन नेतृत्व, राष्ट्र निर्माण और विश्व को एकजुट करने में भारत की भूमिका जैसे विषयों पर जेन-ज़ी और जेन-अल्फा पीढ़ी के साथ विमर्श का मंच बनेगा।
सम्मेलन का केंद्रीय विषय और आयोजन स्थल
उद्घाटन सत्र का विषय 'भारतीय दृष्टिकोण से विश्व को एकजुट करने में युवाओं की भूमिका' रखा गया है। यह कार्यक्रम नीता मुकेश अंबानी सांस्कृतिक केंद्र (NMACC) में आयोजित होगा। IIMUN इस वर्ष अपनी 15वीं वर्षगांठ मना रहा है और इस सम्मेलन को दुनिया के सबसे बड़े युवा नेतृत्व वाले आयोजनों में से एक बताया जा रहा है।
भगवत का यह तीसरा IIMUN संवाद
IIMUN के संस्थापक ऋषभ शाह के अनुसार, यह तीसरा अवसर होगा जब मोहन भगवत युवा पीढ़ी से संवाद के लिए IIMUN के किसी कार्यक्रम में भाग लेंगे। शाह ने बताया कि संगठन से लगभग 30,000 छात्र जुड़े हुए हैं और वर्षों से इस मंच के साथ सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।
युवाओं को बहुविचारधारा से परिचित कराने की पहल
ऋषभ शाह ने कहा, 'मेरा मानना है कि RSS और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) जैसे संगठनों के साथ-साथ अन्य प्रमुख संस्थानों का अध्ययन युवा पीढ़ी को करना चाहिए। इन संगठनों की विचारधाराएँ अलग-अलग हैं, इसलिए नई पीढ़ी को इनके बारे में जानना चाहिए।' यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब 15 से 19 वर्ष की आयु के छात्र-छात्राएँ लोकतंत्र, शासन और राष्ट्र निर्माण पर चर्चाओं में तेज़ी से सक्रिय हो रहे हैं।
अन्य प्रमुख हस्तियाँ भी होंगी शामिल
भगवत के अतिरिक्त, अभिनेत्री शबाना आज़मी, अभिनेता बोमन ईरानी और भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ सहित कई प्रमुख हस्तियों के भी इस सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद है। इन विविध क्षेत्रों की हस्तियों की उपस्थिति सम्मेलन को एक बहु-आयामी विमर्श का मंच बनाती है।
आगे क्या
IIMUN का यह सम्मेलन देश के विभिन्न हिस्सों के स्कूलों और कॉलेजों के प्रतिनिधियों को एक साझा मंच पर लाएगा। इस तरह के आयोजन भविष्य में युवा नेतृत्व की दिशा और राष्ट्रीय विमर्श में नई पीढ़ी की भागीदारी को आकार देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।