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इमरजेंसी में किशोर कुमार पर AIR बैन: मंत्रालय के शो से इनकार पड़ा भारी, 2 घंटे में लगी रोक

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इमरजेंसी में किशोर कुमार पर AIR बैन: मंत्रालय के शो से इनकार पड़ा भारी, 2 घंटे में लगी रोक

सारांश

इमरजेंसी के दौर में किशोर कुमार ने सरकारी शो में गाने से इनकार कर दिया — और मंत्रालय ने सिर्फ दो घंटे में AIR व दूरदर्शन पर उनके गाने बंद करा दिए। अमित कुमार ने कपिल शर्मा के शो पर इस अनसुनी दास्तान को साझा किया।

मुख्य बातें

1975 की इमरजेंसी के दौरान किशोर कुमार को ऑल इंडिया रेडियो (AIR) और दूरदर्शन पर लगभग एक वर्ष के लिए प्रतिबंधित किया गया।
प्रतिबंध का कारण: किशोर कुमार ने दिल्ली से आए मंत्रालय के फोन पर सरकारी शो में भाग लेने से इनकार कर दिया।
उनके इनकार के दो घंटे के भीतर AIR पर बैन की कार्रवाई हो गई।
पुत्र अमित कुमार ने यह किस्सा कपिल शर्मा के शो पर सुनाया।
बैन के बावजूद किशोर कुमार की लोकप्रियता नहीं घटी; 1977 में इमरजेंसी हटने के बाद उनके गाने फिर प्रसारित होने लगे।
किशोर कुमार को पहला गायन अवसर 1948 की फिल्म 'जिद्दी' में संगीत निर्देशक खेमचंद प्रकाश ने दिया था।

दिग्गज गायक किशोर कुमार को 1975-76 के दौरान इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लगाई गई आपातकाल (इमरजेंसी) के बीच ऑल इंडिया रेडियो (AIR) और दूरदर्शन पर लगभग एक वर्ष के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था। यह प्रतिबंध तब लगाया गया जब किशोर कुमार ने सरकारी मंत्रालय के एक शो में हिस्सा लेने से सीधे इनकार कर दिया। अमित कुमार ने अभिनेता-कॉमेडियन कपिल शर्मा के शो पर इस पूरे वाकये का खुलासा किया।

मंत्रालय का फोन और किशोर कुमार का जवाब

किशोर कुमार के पुत्र अमित कुमार ने बताया कि 1975 में जब इमरजेंसी लागू हुई, उस समय किशोर कुमार प्लेबैक सिंगिंग की दुनिया में शिखर पर थे। एक दिन दिल्ली से मंत्रालय का एक फोन आया। उस व्यक्ति ने किशोर कुमार से कहा, 'किशोर साहब, हम आपका टिकट भेज रहे हैं। आप कल शाम की फ्लाइट से आ जाइए। परसों आपका एक शो है।'

किशोर कुमार ने विनम्रतापूर्वक लेकिन स्पष्ट रूप से जवाब दिया कि जब तक मंत्रालय उनसे बात करने के लिए कोई प्रतिनिधि भेजे, वे नहीं आ पाएँगे। उन्होंने कहा, 'तभी मैं आ पाऊंगा, वरना नहीं। अगर भगवान भी आकर मुझसे कहें, तो भी मैं नहीं आ पाऊंगा।'

दो घंटे में लगा प्रतिबंध

अमित कुमार के अनुसार, किशोर कुमार के इस दृढ़ जवाब से अधिकारी बेहद नाराज हो गए। उन्होंने बैन की धमकी दी और उस फोन कॉल के महज दो घंटे के भीतर किशोर कुमार के गानों को AIR और दूरदर्शन पर प्रसारित करने पर रोक लगा दी गई। यह निर्णय इमरजेंसी काल की उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा था, जिसमें असहमत आवाज़ों को दबाने के लिए सरकारी माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा था।

गौरतलब है कि किशोर कुमार उस दौर में केवल गायक नहीं, बल्कि एक ऐसी सांस्कृतिक उपस्थिति थे, जिन्हें करोड़ों लोग सुनते थे। उन पर लगा यह बैन सरकारी दबाव और कलाकार की स्वायत्तता के टकराव का प्रतीक बन गया।

बैन के बाद भी नहीं डिगी लोकप्रियता

सरकारी माध्यमों पर प्रतिबंध के बावजूद किशोर कुमार की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई। 1977 में जब इमरजेंसी समाप्त हुई, तो उनके गाने फिर से AIR और दूरदर्शन की तरंगों पर गूँजने लगे। यह प्रकरण इस बात का प्रमाण है कि प्रशासनिक प्रतिबंध जन-मानस में बसी कला को नहीं मिटा सकते।

किशोर कुमार की अमर विरासत

किशोर कुमार को गायन का पहला अवसर संगीत निर्देशक खेमचंद प्रकाश ने दिया था, जिन्होंने उन्हें 1948 में फिल्म 'जिद्दी' के गाने 'मरने की दुआएं क्यों मांगू' के लिए चुना। इसके बाद उन्होंने 'एक लड़की भीगी भागी सी', 'मेरे सपनों की रानी', 'ये शाम मस्तानी', 'ओ मेरे दिल के चैन', 'हमें तुमसे प्यार कितना', 'पल पल दिल के पास' और 'जिंदगी एक सफर है सुहाना' जैसे अनगिनत यादगार गाने दिए।

आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में किशोर कुमार की आवाज़ एक अमिट छाप छोड़े हुए है — यह इस बात का प्रमाण है कि वास्तविक प्रतिभा को किसी भी बंधन में नहीं बाँधा जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर सतही तौर पर पेश करती है। विचारणीय यह है कि जब देश के शीर्ष गायक को सरकारी प्रचार का हिस्सा बनने से इनकार करने की सज़ा मिले, तो यह प्रतिबंध कलात्मक असहमति पर राज्य की प्रतिक्रिया का आईना बन जाता है। यह भी उल्लेखनीय है कि किशोर कुमार की लोकप्रियता पर बैन का कोई दीर्घकालिक असर नहीं पड़ा — जो इस बात का प्रमाण है कि सरकारी माध्यमों पर नियंत्रण जनता की पसंद को नहीं बदल सकता।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किशोर कुमार को ऑल इंडिया रेडियो पर बैन क्यों किया गया था?
किशोर कुमार ने 1975 की इमरजेंसी के दौरान मंत्रालय द्वारा आयोजित एक सरकारी शो में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया, जिसके बाद अधिकारियों ने फोन कॉल के महज दो घंटे के भीतर AIR और दूरदर्शन पर उनके गानों के प्रसारण पर रोक लगा दी।
किशोर कुमार पर बैन कब से कब तक रहा?
यह बैन 1975-77 की इमरजेंसी अवधि के दौरान लगभग एक वर्ष तक रहा। 1977 में इमरजेंसी हटने के बाद उनके गाने फिर से AIR और दूरदर्शन पर प्रसारित होने लगे।
किशोर कुमार के बैन की कहानी किसने सुनाई?
किशोर कुमार के पुत्र अमित कुमार ने कॉमेडियन और अभिनेता कपिल शर्मा के शो पर इस पूरे वाकये का विस्तार से खुलासा किया।
बैन के दौरान किशोर कुमार की लोकप्रियता पर क्या असर पड़ा?
सरकारी माध्यमों पर प्रतिबंध के बावजूद किशोर कुमार की लोकप्रियता पर कोई खास असर नहीं पड़ा। इमरजेंसी खत्म होते ही उनके गाने फिर प्रसारित हुए और संगीत प्रेमियों के दिलों में उनकी जगह पहले जैसी बनी रही।
किशोर कुमार का गायन करियर कब शुरू हुआ?
किशोर कुमार को गायन का पहला मौका संगीत निर्देशक खेमचंद प्रकाश ने 1948 की फिल्म 'जिद्दी' के गाने 'मरने की दुआएं क्यों मांगू' के लिए दिया था। इसके बाद उन्होंने दशकों तक हिंदी सिनेमा को अनेक यादगार गाने दिए।
राष्ट्र प्रेस
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