इमरजेंसी में किशोर कुमार पर AIR बैन: मंत्रालय के शो से इनकार पड़ा भारी, 2 घंटे में लगी रोक
सारांश
मुख्य बातें
दिग्गज गायक किशोर कुमार को 1975-76 के दौरान इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लगाई गई आपातकाल (इमरजेंसी) के बीच ऑल इंडिया रेडियो (AIR) और दूरदर्शन पर लगभग एक वर्ष के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था। यह प्रतिबंध तब लगाया गया जब किशोर कुमार ने सरकारी मंत्रालय के एक शो में हिस्सा लेने से सीधे इनकार कर दिया। अमित कुमार ने अभिनेता-कॉमेडियन कपिल शर्मा के शो पर इस पूरे वाकये का खुलासा किया।
मंत्रालय का फोन और किशोर कुमार का जवाब
किशोर कुमार के पुत्र अमित कुमार ने बताया कि 1975 में जब इमरजेंसी लागू हुई, उस समय किशोर कुमार प्लेबैक सिंगिंग की दुनिया में शिखर पर थे। एक दिन दिल्ली से मंत्रालय का एक फोन आया। उस व्यक्ति ने किशोर कुमार से कहा, 'किशोर साहब, हम आपका टिकट भेज रहे हैं। आप कल शाम की फ्लाइट से आ जाइए। परसों आपका एक शो है।'
किशोर कुमार ने विनम्रतापूर्वक लेकिन स्पष्ट रूप से जवाब दिया कि जब तक मंत्रालय उनसे बात करने के लिए कोई प्रतिनिधि भेजे, वे नहीं आ पाएँगे। उन्होंने कहा, 'तभी मैं आ पाऊंगा, वरना नहीं। अगर भगवान भी आकर मुझसे कहें, तो भी मैं नहीं आ पाऊंगा।'
दो घंटे में लगा प्रतिबंध
अमित कुमार के अनुसार, किशोर कुमार के इस दृढ़ जवाब से अधिकारी बेहद नाराज हो गए। उन्होंने बैन की धमकी दी और उस फोन कॉल के महज दो घंटे के भीतर किशोर कुमार के गानों को AIR और दूरदर्शन पर प्रसारित करने पर रोक लगा दी गई। यह निर्णय इमरजेंसी काल की उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा था, जिसमें असहमत आवाज़ों को दबाने के लिए सरकारी माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
गौरतलब है कि किशोर कुमार उस दौर में केवल गायक नहीं, बल्कि एक ऐसी सांस्कृतिक उपस्थिति थे, जिन्हें करोड़ों लोग सुनते थे। उन पर लगा यह बैन सरकारी दबाव और कलाकार की स्वायत्तता के टकराव का प्रतीक बन गया।
बैन के बाद भी नहीं डिगी लोकप्रियता
सरकारी माध्यमों पर प्रतिबंध के बावजूद किशोर कुमार की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई। 1977 में जब इमरजेंसी समाप्त हुई, तो उनके गाने फिर से AIR और दूरदर्शन की तरंगों पर गूँजने लगे। यह प्रकरण इस बात का प्रमाण है कि प्रशासनिक प्रतिबंध जन-मानस में बसी कला को नहीं मिटा सकते।
किशोर कुमार की अमर विरासत
किशोर कुमार को गायन का पहला अवसर संगीत निर्देशक खेमचंद प्रकाश ने दिया था, जिन्होंने उन्हें 1948 में फिल्म 'जिद्दी' के गाने 'मरने की दुआएं क्यों मांगू' के लिए चुना। इसके बाद उन्होंने 'एक लड़की भीगी भागी सी', 'मेरे सपनों की रानी', 'ये शाम मस्तानी', 'ओ मेरे दिल के चैन', 'हमें तुमसे प्यार कितना', 'पल पल दिल के पास' और 'जिंदगी एक सफर है सुहाना' जैसे अनगिनत यादगार गाने दिए।
आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में किशोर कुमार की आवाज़ एक अमिट छाप छोड़े हुए है — यह इस बात का प्रमाण है कि वास्तविक प्रतिभा को किसी भी बंधन में नहीं बाँधा जा सकता।