प्रतीभा रांटा ने खोला 'द रेवोल्यूशनरीज' का राज़: 'प्रतिभा लाहिड़ी थीं जिज्ञासु और किताबों की दीवानी'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री प्रतीभा रांटा ने 20 सितंबर 2026 को मुंबई में वेब सीरीज 'द रेवोल्यूशनरीज' के प्रमोशन इवेंट के दौरान अपनी ऐतिहासिक भूमिका पर विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि किस तरह उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी प्रतिभा लाहिड़ी के किरदार को समझा और उसे पर्दे पर जीवंत किया।
किरदार को समझने की चुनौती
प्रतीभा रांटा ने बताया, "हमें सार्वजनिक तौर पर प्रतिभा लाहिड़ी के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं मिलती है — यही बात निखिल आडवाणी ने भी हमारी चर्चाओं में कही थी।" उन्होंने उस ऐतिहासिक प्रसंग का उल्लेख किया जब चंद्रशेखर आज़ाद अंग्रेज़ों से लड़ते हुए अपनी बंदूक की आखिरी गोली खुद को मार लेते हैं, ताकि दुश्मन उन्हें पकड़ न सके। उसके बाद प्रतिभा लाहिड़ी ने उनके अस्थि अवशेषों की राख युवा क्रांतिकारियों के माथे पर लगाई थी।
अभिनेत्री ने कहा, "अब आप ऐसे व्यक्ति के बारे में सोचिए, जो यह समझने में सक्षम हो कि यह एक युवा पीढ़ी है। उन्हें यह बताना ज़रूरी था कि देश को आज़ादी दिलाने के लिए किस तरह का बलिदान दिया जा रहा है।"
17 साल की उम्र में सामाजिक मानदंडों से संघर्ष
रांटा ने अपने किरदार की आंतरिक दुनिया को भी सामने रखा। उनके अनुसार, "जब वह 17 साल की रही होंगी, तब उन्हें किन सामाजिक मानदंडों से लड़ना पड़ता होगा? वह दुनिया को किस नज़रिए से देखती होंगी?" उन्होंने कहा कि उनके लिए प्रतिभा लाहिड़ी एक ऐसी जिज्ञासु लड़की थीं जो अपने आसपास हो रही हर चीज़ के बारे में जानना चाहती थीं।
यह उस दौर की पृष्ठभूमि में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, जब एक किशोरी का क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़ना समाज की नज़र में असाधारण कदम था।
कोडेड पत्रों को सुलझाने की क़ाबिलियत
अभिनेत्री ने बताया कि प्रतिभा लाहिड़ी पढ़ाई में असाधारण रूप से प्रतिभाशाली थीं। "वह पढ़ने की बहुत शौकीन थीं। प्रतिभा और सचिंद्र नाथ सान्याल के बीच जो कोडेड पत्रों का आदान प्रदान हुआ था, उन सभी को वह हल कर लेती थीं — क्योंकि वह बहुत होशियार और तेज़ तर्रार थीं। यह वाकई अद्भुत था।" रांटा ने इस विशेषता को किरदार की सबसे बड़ी खूबी बताया।
सीरीज़ की पृष्ठभूमि और कलाकार
'द रेवोल्यूशनरीज' चार ऐतिहासिक स्वतंत्रता सेनानियों — रास बिहारी बोस, प्रतिभा लाहिड़ी, सचिंद्र नाथ सान्याल और बाघा जतिन — की कहानी पर आधारित है, जिन्होंने ब्रिटिश राज के विरुद्ध सशस्त्र प्रतिरोध का नेतृत्व किया था। यह सीरीज़ सत्य घटनाओं से प्रेरित है।
सीरीज़ में रोहित सराफ, गुरफतेह पीरजादा और जेसन शाह भी अहम भूमिकाओं में हैं, जबकि निखिल आडवाणी इसे निर्देशित कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इन क्रांतिकारियों के लगातार प्रयासों के कारण ही ब्रिटिश साम्राज्य को अपनी राजधानी कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित करनी पड़ी थी — यह तथ्य सीरीज़ की ऐतिहासिक प्रासंगिकता को और गहरा करता है।
कहाँ देखें यह सीरीज़
'द रेवोल्यूशनरीज' को प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम किया जा सकता है। यह सीरीज़ उन भुला दिए गए क्रांतिकारियों की दास्तान को मुख्यधारा तक लाने का प्रयास है, जिनका योगदान इतिहास की पुस्तकों में उतनी जगह नहीं पा सका जितना वे हकदार थे।