'द रेवोल्यूशनरीज' 11 सितंबर को Amazon Prime पर, 6 भाषाओं में स्ट्रीम होगी निखिल आडवाणी की पीरियड सीरीज
सारांश
मुख्य बातें
निखिल आडवाणी निर्देशित पीरियड ड्रामा सीरीज 'द रेवोल्यूशनरीज' की रिलीज डेट का आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है। 18 अगस्त 2026 को मेकर्स ने घोषणा की कि यह सीरीज 11 सितंबर से Amazon Prime Video पर दुनियाभर में उपलब्ध होगी। यह सीरीज हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़ और बंगाली — कुल 6 भाषाओं में स्ट्रीम होगी, साथ ही अंग्रेज़ी और कई अंतरराष्ट्रीय भाषाओं के सबटाइटल्स भी उपलब्ध रहेंगे।
सीरीज की पृष्ठभूमि और विषयवस्तु
यह सीरीज प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और लेखक संजीव सान्याल की पुस्तक 'द रेवोल्यूशनरीज: द अदर स्टोरी ऑफ हाउ इंडिया वॉन इट्स फ्रीडम' पर आधारित है। यह उन युवा क्रांतिकारियों की अनसुनी गाथाओं को पर्दे पर उतारती है, जिन्होंने 1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष की राह चुनी। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इन कम चर्चित लेकिन प्रभावशाली अध्यायों को मुख्यधारा के मनोरंजन में शायद ही इतनी गहराई से दिखाया गया हो।
मुख्य किरदार और कलाकार
सीरीज में 4 युवा क्रांतिकारियों की केंद्रीय कहानी है। भुवन बाम ने राश बिहारी बोस, रोहित सराफ ने सचिन्द्र नाथ सान्याल, प्रतिभा रांटा ने प्रतिभा लाहिरी और गुरफतेह पीरजादा ने बाघा जतिन की भूमिका निभाई है। इसके अलावा जेसन शाह, पाओली दाम और तोता रॉय चौधरी भी महत्वपूर्ण किरदारों में नज़र आएंगे।
निर्माण और लेखन टीम
सीरीज का निर्माण मोनिशा आडवाणी और मधु भोजवानी ने एम्मे एंटरटेनमेंट के बैनर तले किया है। स्क्रिप्ट संयुता चावला शेख, अक्षिता वाधवाना, शोभित नारंग और रुत्वी मेहता ने मिलकर लिखी है। सीरीज में बहादुरी, कुर्बानी, दोस्ती, धोखे और उन निर्णायक पलों को दर्शाया गया है जिन्होंने भारत की आज़ादी की लड़ाई के एक अहम अध्याय को आकार दिया।
क्यों है यह सीरीज खास
यह ऐसे समय में आई है जब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर ऐतिहासिक और देशभक्ति-केंद्रित कंटेंट की माँग तेज़ी से बढ़ रही है। 6 भाषाओं में एक साथ रिलीज होना यह दर्शाता है कि निर्माताओं ने इसे पैन-इंडिया दर्शकों तक पहुँचाने की रणनीति बनाई है। गौरतलब है कि निखिल आडवाणी इससे पहले 'बॉम्बे वेलवेट' और 'डी-डे' जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम कर चुके हैं। 11 सितंबर की रिलीज डेट — जो भारत के स्वतंत्रता माह के ठीक बाद आती है — भी रणनीतिक रूप से सोची-समझी लगती है।