3 अक्टूबर 2026
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महाराष्ट्र FDA ने सिप्ला के पुणे वेयरहाउस का लाइसेंस रद्द किया, पैकेजिंग-स्टोरेज में खामियाँ

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महाराष्ट्र FDA ने सिप्ला के पुणे वेयरहाउस का लाइसेंस रद्द किया, पैकेजिंग-स्टोरेज में खामियाँ

सारांश

महाराष्ट्र FDA ने पुणे के वाडकी स्थित सिप्ला के सीएंडएफ वेयरहाउस का लाइसेंस रद्द कर दिया है। बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश पर पुनः समीक्षा के बाद 1 अक्टूबर को आया यह आदेश पैकेजिंग के अनधिकृत दावों, स्टोरेज खामियों और एक्सपायर दवाओं के अनुचित प्रबंधन को लेकर जारी किया गया है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र एफडीए ने 1 अक्टूबर 2026 को सिप्ला के पुणे वाडकी स्थित सीएंडएफ वेयरहाउस का दवा बिक्री व वितरण लाइसेंस रद्द किया।
कार्रवाई का आधार — शेड्यूल-एच दवा 'रिएक्टिन प्लस टैबलेट्स' की पैकेजिंग पर अनधिकृत दावे, स्टोरेज खामियाँ और एक्सपायर दवाओं का अनुचित प्रबंधन।
बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश पर पहले 27 अगस्त की कार्रवाई वापस ली गई, फिर संशोधित प्रक्रिया के तहत पुनः समीक्षा हुई।
सिप्ला को 4 सितंबर को कारण बताओ नोटिस मिला; 11 सितंबर को लिखित जवाब और 21 सितंबर को व्यक्तिगत सुनवाई हुई।
एफडीए ने पैकेजिंग पर मानव आकृति और मांसपेशियों के दर्द से राहत दर्शाने वाले चित्रों पर भी आपत्ति जताई।

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने 1 अक्टूबर 2026 को पुणे के वाडकी स्थित सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड के कैरीइंग एंड फॉरवर्डिंग (सीएंडएफ) वेयरहाउस के दवाओं की बिक्री और वितरण से संबंधित लाइसेंस रद्द कर दिए। एफडीए ने दवाओं की पैकेजिंग, स्टोरेज, स्टॉक प्रबंधन और दस्तावेज़ीकरण में कथित खामियों को आधार बनाकर यह कार्रवाई की है।

मुख्य घटनाक्रम

पुणे के डिवीजन-3 के सहायक आयुक्त (ड्रग्स) ने बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार मामले की पुनः समीक्षा के बाद यह आदेश जारी किया। इससे पहले 27 अगस्त को वेयरहाउस के खिलाफ प्रारंभिक कार्रवाई की गई थी, जिसे बाद में वापस लेकर संशोधित प्रक्रिया के तहत पुनर्विचार किया गया।

एफडीए ने 4 सितंबर को सिप्ला को संशोधित कारण बताओ नोटिस जारी किया। कंपनी ने 11 सितंबर को लिखित जवाब दिया और 21 सितंबर को व्यक्तिगत सुनवाई में भी अपना पक्ष प्रस्तुत किया। कंपनी के जवाब, रिकॉर्ड और संबंधित कानूनी प्रावधानों की जाँच के बाद लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने लाइसेंस रद्द करने का नया आदेश जारी किया।

पैकेजिंग पर आपत्तियाँ

एफडीए की जाँच में शेड्यूल-एच की प्रिस्क्रिप्शन दवा 'रिएक्टिन प्लस टैबलेट्स' की पैकेजिंग और प्रचार प्रमुख मुद्दों में रहे। एफडीए के अनुसार, दवा की पैकेजिंग पर इसे दर्द निवारक के रूप में प्रस्तुत किया गया था और सिरदर्द, मांसपेशियों के दर्द, कमर दर्द, जोड़ों के दर्द, मोच, शरीर के दर्द और दांत दर्द में राहत सहित कई उपयोग बताए गए थे, जिनकी कथित तौर पर अनुमति नहीं थी।

एफडीए ने पैकेजिंग पर मानव आकृति और मांसपेशियों के दर्द में राहत का संकेत देने वाले चित्रों के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई। गौरतलब है कि शेड्यूल-एच दवाओं के लिए ऐसे प्रचार-सामग्री और दावे दवा नियमों के तहत प्रतिबंधित हैं।

स्टोरेज और दस्तावेज़ीकरण की खामियाँ

पैकेजिंग के अलावा, एफडीए ने वेयरहाउस में दवाओं के भंडारण, रिकॉर्ड रखने और एक्सपायर हो चुकी दवाओं को संभालने की प्रक्रिया में भी कथित कमियाँ पाई। ये खामियाँ भारतीय दवा नियमों के तहत वेयरहाउस संचालन की अनिवार्य शर्तों का उल्लंघन मानी गई हैं।

एफडीए ने स्पष्ट किया कि यह आदेश पुनः की गई पूरी प्रक्रिया में सामने आए तथ्यों के आधार पर लिया गया है और यह केवल पूर्व कार्रवाई की पुनरावृत्ति नहीं है।

सरकार और नियामक की स्थिति

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय दवा नियामक निकाय देशभर में फार्मा वेयरहाउस और विनिर्माण इकाइयों पर निगरानी सख्त कर रहे हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट की सक्रिय भूमिका यह दर्शाती है कि न्यायपालिका भी दवा नियमन में सक्रिय रुचि ले रही है।

सिप्ला भारत की अग्रणी दवा कंपनियों में से एक है और इस कार्रवाई से कंपनी के पुणे स्थित वितरण नेटवर्क पर असर पड़ने की संभावना है। अभी तक कंपनी की ओर से इस ताज़ा आदेश पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आगे की राह

लाइसेंस रद्द होने के बाद सिप्ला के पास उच्च न्यायालय या उचित अपीलीय मंच में चुनौती देने का विकल्प उपलब्ध है। दवा उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी नियामक कार्रवाइयाँ अन्य फार्मा कंपनियों को भी अपने वेयरहाउस संचालन और पैकेजिंग अनुपालन की समीक्षा करने का संकेत देती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ विनिर्माण इकाइयाँ तो अक्सर कड़े ऑडिट से गुज़रती हैं लेकिन वेयरहाउस स्तर की निगरानी अपेक्षाकृत ढीली रहती है।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र FDA ने सिप्ला के पुणे वेयरहाउस का लाइसेंस क्यों रद्द किया?
एफडीए ने दवाओं की पैकेजिंग पर अनधिकृत दावे, स्टोरेज में खामियाँ, रिकॉर्ड रखने में लापरवाही और एक्सपायर दवाओं के अनुचित प्रबंधन को आधार बनाकर यह लाइसेंस रद्द किया। खासतौर पर शेड्यूल-एच प्रिस्क्रिप्शन दवा 'रिएक्टिन प्लस टैबलेट्स' की पैकेजिंग पर ऐसे दावे किए गए थे जिनकी दवा नियमों के तहत अनुमति नहीं थी।
बॉम्बे हाई कोर्ट का इस मामले में क्या रोल रहा?
बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों पर एफडीए ने 27 अगस्त की प्रारंभिक कार्रवाई वापस ली और संशोधित प्रक्रिया के तहत मामले की पुनः समीक्षा की। इसके बाद 4 सितंबर को संशोधित कारण बताओ नोटिस जारी हुआ और 1 अक्टूबर को नया आदेश आया।
'रिएक्टिन प्लस टैबलेट्स' की पैकेजिंग पर क्या आपत्तियाँ थीं?
एफडीए के अनुसार, दवा की पैकेजिंग पर इसे दर्द निवारक बताते हुए सिरदर्द, मांसपेशियों के दर्द, कमर दर्द, जोड़ों के दर्द, मोच और दांत दर्द सहित कई उपयोग बताए गए थे, जो अनुमत नहीं थे। इसके अलावा मानव आकृति और मांसपेशियों के दर्द में राहत दर्शाने वाले चित्रों के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई गई।
सिप्ला को इस कार्रवाई का बचाव करने का मौका मिला था?
हाँ, सिप्ला को पूरा अवसर दिया गया। कंपनी ने 11 सितंबर को लिखित जवाब दिया और 21 सितंबर को व्यक्तिगत सुनवाई में भी अपना पक्ष रखा। इन सभी तथ्यों की जाँच के बाद लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने लाइसेंस रद्द करने का अंतिम आदेश जारी किया।
इस लाइसेंस रद्द होने का क्या असर होगा?
लाइसेंस रद्द होने से सिप्ला के पुणे वाडकी स्थित सीएंडएफ वेयरहाउस से दवाओं की बिक्री और वितरण तत्काल प्रभाव से बंद हो जाएगा। कंपनी के पास उच्च न्यायालय या उचित अपीलीय मंच में इस आदेश को चुनौती देने का विकल्प है।
राष्ट्र प्रेस
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