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महाराष्ट्र एफडीए ने सिप्ला की पुणे इकाई का दवा बिक्री लाइसेंस रद्द किया, ₹11 लाख से अधिक का स्टॉक जब्त

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महाराष्ट्र एफडीए ने सिप्ला की पुणे इकाई का दवा बिक्री लाइसेंस रद्द किया, ₹11 लाख से अधिक का स्टॉक जब्त

सारांश

महाराष्ट्र एफडीए ने सिप्ला की पुणे-वाडकी सी एंड एफ इकाई का दवा बिक्री लाइसेंस रद्द किया — रिएक्टिन प्लस की पैकेजिंग पर अनधिकृत प्रचार, ₹11 लाख से अधिक का स्टॉक जब्त और रिकॉल निर्देशों की अनदेखी के बाद। एफडीए आयुक्त मुंधे ने दवा सुरक्षा पर शून्य-सहिष्णुता का संकेत दिया।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र एफडीए ने पुणे के वाडकी स्थित सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड की सी एंड एफ सुविधा का दवा बिक्री लाइसेंस रद्द किया।
प्रिस्क्रिप्शन दवा रिएक्टिन प्लस की पैकेजिंग पर 'दर्द निवारक और ज्वरनाशक' शब्द अनधिकृत रूप से मुद्रित पाए गए — अनुसूची एच का उल्लंघन।
₹11 लाख से अधिक मूल्य का रिएक्टिन प्लस स्टॉक जब्त; बाज़ार से वापस मँगाने का आदेश दिया गया, जिसका कंपनी ने पूरी तरह पालन नहीं किया।
दवाएँ सीधे ज़मीन पर रखी मिलीं; स्टॉक रिकॉर्ड में विसंगतियाँ और एक्सपायर दवाओं के निपटान में कमियाँ पाई गईं।
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंधे ने चेतावनी दी कि अनुसूची एच दवाओं के विज्ञापन, भंडारण और वितरण में नियम तोड़ने पर कड़ी कार्रवाई होगी।

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने पुणे के वाडकी स्थित सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड की कैरी एंड फॉरवर्डिंग (सी एंड एफ) सुविधा का दवा बिक्री लाइसेंस रद्द कर दिया है। यह कार्रवाई 'रिएक्टिन प्लस' टैबलेट से जुड़े निरीक्षणों में सामने आई गंभीर अनियमितताओं के बाद की गई है, जिनमें अनधिकृत प्रचार सामग्री, भंडारण में खामियाँ और रिकॉल निर्देशों की अनदेखी शामिल हैं।

मुख्य उल्लंघन: क्या पाया गया निरीक्षण में

जून 2026 में हुए निरीक्षण के दौरान एफडीए अधिकारियों ने पाया कि अनुसूची एच के अंतर्गत आने वाली दवा रिएक्टिन प्लस की पैकेजिंग पर 'दर्द निवारक और ज्वरनाशक' शब्द अनधिकृत रूप से मुद्रित थे। यह एक प्रिस्क्रिप्शन दवा है, जिसका इस तरह प्रत्यक्ष प्रचार औषधि नियमों का उल्लंघन है।

एफडीए ने ₹11 लाख से अधिक मूल्य के रिएक्टिन प्लस स्टॉक को जब्त कर लिया और कंपनी को औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 तथा नियम, 1945 के प्रावधानों के तहत दवा को बाज़ार से वापस मँगाने का आदेश दिया। हालाँकि, कंपनी इन निर्देशों का पूर्ण रूप से पालन करने में विफल रही।

भंडारण और रिकॉर्ड में भी मिलीं गड़बड़ियाँ

सी एंड एफ संचालन की आगामी जाँच में भंडारण और वितरण से जुड़ी अतिरिक्त खामियाँ भी उजागर हुईं। अधिकारियों के अनुसार, भौतिक और कंप्यूटरीकृत स्टॉक रिकॉर्ड में विसंगतियाँ थीं और खरीद-बिक्री के दस्तावेज़ अधूरे पाए गए।

इसके अलावा, दवाइयाँ सीधे ज़मीन पर रखी हुई मिलीं — पैलेट और रैक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। एक्सपायर हो चुकी दवाओं के रिकॉर्ड और उनके निपटान की प्रक्रिया भी मानकों के अनुरूप नहीं थी।

जन स्वास्थ्य पर खतरा: एफडीए की चिंता

एफडीए ने स्पष्ट किया कि प्रिस्क्रिप्शन दवा का इस प्रकार प्रत्यक्ष प्रचार आम लोगों को बिना चिकित्सीय परामर्श के दवा लेने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है, जिससे स्व-दवा (self-medication) का जोखिम बढ़ता है। गौरतलब है कि अनुसूची एच की दवाएँ केवल पंजीकृत चिकित्सक के पर्चे पर ही दी जा सकती हैं।

कारण बताओ नोटिस और लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया

एफडीए ने कथित उल्लंघनों के लिए कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। कंपनी के जवाब की जाँच के बाद, नियामक ने संबंधित प्रावधानों के तहत लाइसेंस रद्द करने का निर्णय लिया।

एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंधे ने कहा, 'विभाग दवा सुरक्षा और जन स्वास्थ्य से संबंधित मामलों में — विशेष रूप से अनुसूची एच की निर्धारित दवाओं के विज्ञापन, बिक्री, भंडारण और वितरण में — कोई नरमी नहीं बरतेगा।' उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि दवाओं के निर्माण और वितरण में शामिल किसी भी संस्था द्वारा नियम तोड़ने पर कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

आगे क्या होगा

लाइसेंस रद्द होने के बाद सिप्ला की वाडकी सी एंड एफ सुविधा से दवाओं की बिक्री और वितरण फिलहाल बंद है। यह मामला भारतीय दवा उद्योग में अनुपालन की बढ़ती सख्ती का संकेत है — ऐसे समय में जब केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर दवा नियामक निगरानी को कड़ा किया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह कार्रवाई एकल उदाहरण बनकर रह जाती है या पूरे वितरण तंत्र की व्यवस्थित जाँच की शुरुआत बनती है।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र एफडीए ने सिप्ला की पुणे इकाई का लाइसेंस क्यों रद्द किया?
एफडीए ने पुणे के वाडकी स्थित सिप्ला की सी एंड एफ सुविधा का लाइसेंस रद्द किया क्योंकि निरीक्षण में रिएक्टिन प्लस की पैकेजिंग पर अनधिकृत प्रचार सामग्री, भंडारण में गंभीर खामियाँ और रिकॉल निर्देशों की अनदेखी पाई गई। कारण बताओ नोटिस के जवाब की जाँच के बाद औषधि अधिनियम के तहत यह कार्रवाई की गई।
रिएक्टिन प्लस टैबलेट पर क्या आपत्ति थी?
रिएक्टिन प्लस एक अनुसूची एच प्रिस्क्रिप्शन दवा है, जिसकी पैकेजिंग पर 'दर्द निवारक और ज्वरनाशक' शब्द अनधिकृत रूप से मुद्रित थे। एफडीए के अनुसार, यह प्रचार लोगों को बिना डॉक्टरी परामर्श के दवा लेने के लिए प्रेरित कर सकता है, जिससे स्व-दवा का खतरा बढ़ता है।
कितने मूल्य की दवाएँ जब्त की गईं?
एफडीए ने ₹11 लाख से अधिक मूल्य का रिएक्टिन प्लस स्टॉक जब्त किया। इसके साथ ही कंपनी को दवा बाज़ार से वापस मँगाने का आदेश भी दिया गया था, जिसका कंपनी ने पूरी तरह पालन नहीं किया।
सिप्ला की सुविधा में भंडारण संबंधी क्या खामियाँ पाई गईं?
निरीक्षण में पाया गया कि दवाइयाँ सीधे ज़मीन पर रखी थीं और पैलेट व रैक की व्यवस्था अपर्याप्त थी। इसके अलावा, भौतिक और कंप्यूटरीकृत स्टॉक रिकॉर्ड में विसंगतियाँ, खरीद-बिक्री दस्तावेज़ों में कमियाँ और एक्सपायर दवाओं के निपटान की प्रक्रिया में भी खामियाँ थीं।
एफडीए आयुक्त ने इस मामले में क्या कहा?
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंधे ने कहा कि विभाग अनुसूची एच दवाओं के विज्ञापन, बिक्री, भंडारण और वितरण में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि नियम तोड़ने वाली किसी भी संस्था के विरुद्ध कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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