महाराष्ट्र एफडीए की बड़ी छापेमारी: बीड में ₹1.94 करोड़ का मिलावटी खाद्य तेल जब्त, 5 इकाइयों के लाइसेंस निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने 6 और 7 अगस्त 2026 को बीड जिले में 'सेफ फूड, सेफ महाराष्ट्र' अभियान के तहत खाद्य तेल कारोबार से जुड़ी पाँच इकाइयों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस कार्रवाई में 1,19,187.5 किलोग्राम खाद्य तेल — जिसकी अनुमानित बाज़ार कीमत ₹1.94 करोड़ है — जब्त किया गया और सभी पाँचों प्रतिष्ठानों के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए गए। यह कार्रवाई एफडीए के संयुक्त आयुक्त श्रीकांत करकले और सहायक आयुक्त नितिन मोहिते की प्रत्यक्ष निगरानी में की गई।
मुख्य घटनाक्रम: किस इकाई पर क्या मिला
6 अगस्त को बीड एमआईडीसी स्थित स्वागत ऑयल इंडस्ट्रीज पर पड़े छापे में सबसे बड़ी अनियमितता सामने आई — एक ही टैंक में रखे सोयाबीन तेल को 'रिफाइंड' और 'अल्ट्रा रिफाइंड' जैसी अलग-अलग श्रेणियों में पैक किया जा रहा था। अस्वच्छ परिसर, पुराने टिनों का पुनः उपयोग, प्रयोगशाला का अभाव और गुणवत्ता प्रमाणपत्रों की कमी भी पाई गई। यहाँ से 66,652.6 किलोग्राम तेल — मूल्य ₹1,05,85,236 — जब्त किया गया और 10 नमूने जाँच के लिए भेजे गए।
उसी दिन बीड एमआईडीसी की चरखा ऑयल मिल में पामोलीन तेल की भ्रामक पैकेजिंग, पुराने टिनों का उपयोग और आवश्यक दस्तावेज़ों की कमी उजागर हुई। यहाँ से 45,995.7 किलोग्राम तेल — मूल्य ₹78,22,050 — जब्त किया गया और 11 नमूने प्रयोगशाला को भेजे गए।
7 अगस्त को वडवाणी स्थित जय हनुमान ट्रेडर्स से 4,545.2 किलोग्राम तेल (₹7,24,596) जब्त हुआ। माजलगांव की जाह्नवी कमर्शियल्स से बिना लेबल वाला 1,746 किलोग्राम खुला रिफाइंड सोयाबीन तेल (₹2,79,360) और विनायक ऑयल इंडस्ट्रीज से 248 किलोग्राम रिफाइंड सोयाबीन तेल (₹39,680) जब्त किया गया। तीनों इकाइयों में असुरक्षित भंडारण और रिकॉर्ड की कमी पाई गई।
उपभोक्ताओं पर असर और स्वास्थ्य जोखिम
खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, एक ही टैंक के तेल को अलग-अलग गुणवत्ता श्रेणियों में बेचना न केवल उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी है, बल्कि अस्वच्छ परिस्थितियों में पैक किया गया तेल स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा भी पैदा कर सकता है। गौरतलब है कि बीड जैसे अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ता अक्सर खुले तेल पर निर्भर रहते हैं, जहाँ मिलावट की जाँच की सुविधा सीमित होती है।
एफडीए ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल लाइसेंसधारी विक्रेताओं से खाद्य तेल खरीदें और पैकेट पर एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि तथा उचित लेबलिंग की जाँच अवश्य करें।
एफडीए की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई
एफडीए ने स्पष्ट किया है कि जनस्वास्थ्य और उपभोक्ता सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। विभाग ने बताया कि जब्त नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर संबंधित इकाइयों के विरुद्ध आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब 'सेफ फूड, सेफ महाराष्ट्र' अभियान के तहत राज्यभर में खाद्य सुरक्षा जाँच तेज़ की जा रही है।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्यभर में ऐसे विशेष अभियान निरंतर जारी रहेंगे। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाइयाँ तभी प्रभावी होंगी जब लाइसेंस निलंबन के साथ-साथ आपराधिक मुकदमे भी दर्ज किए जाएँ, ताकि उल्लंघनकर्ताओं पर वास्तविक अंकुश लगे।
क्या होगा आगे
जब्त किए गए नमूनों की प्रयोगशाला जाँच रिपोर्ट आने के बाद एफडीए तय करेगा कि किन इकाइयों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत अभियोजन कार्यवाही शुरू की जाए। पाँचों निलंबित इकाइयाँ तब तक बंद रहेंगी जब तक वे निर्धारित मानकों का अनुपालन सुनिश्चित नहीं कर लेतीं और विभाग से पुनः लाइसेंस प्राप्त नहीं कर लेतीं।