महाराष्ट्र में खुले खाद्य तेल की बिक्री पर पाबंदी, उल्लंघन पर ₹10 लाख जुर्माना और उम्रकैद
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के खाद्य सुरक्षा आयुक्त तुकाराम मुंढे ने 20 अगस्त 2026 को एक व्यापक अनुपालन आदेश जारी कर पूरे राज्य में खुले में खाद्य तेल की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से पाबंदी लगा दी है। अब हर विक्रेता को तेल केवल बंद, लेबलयुक्त पैकेट में बेचना होगा, जिसमें उत्पाद की पूरी जानकारी अंकित हो। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर ₹10 लाख तक का जुर्माना और उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान किया गया है।
आदेश का दायरा और 14 बिंदु
खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत जारी यह 14 बिंदुओं वाला आदेश केवल रिटेल दुकानों तक सीमित नहीं है। यह तेल निकालने वाली इकाइयों, सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन इकाइयों, तेल रिफाइनरों और ऑनलाइन विक्रेताओं समेत पूरी सप्लाई चेन पर समान रूप से लागू होता है। आदेश लागू होते ही प्रभावी हो गया है।
गौरतलब है कि यह आदेश ऐसे समय में आया है जब खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की जाँच में सप्लाई चेन में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ उजागर हुई थीं।
मुख्य उल्लंघन जो जाँच में सामने आए
FDA की जाँच में निम्नलिखित गंभीर कमियाँ पाई गईं:
वैध लाइसेंस के बिना या गलत 'बिजनेस कैटेगरी' के तहत कारोबार; तेल में मिलावट, एसिड वैल्यू और इंडस्ट्रियल ट्रांस-फैट की निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा; सरसों के तेल की अनधिकृत ब्लेंडिंग; तेल के असली स्रोत और उत्पादन तारीख छिपाने के लिए री-लेबलिंग; एक्सपायरी के करीब वाले तेल की री-पैकेजिंग; और नॉन-फूड-ग्रेड पैकेजिंग का उपयोग।
पिछले साल के नमूनों का डेटा
आयुक्त तुकाराम मुंढे ने प्रेस वार्ता में बताया कि पिछले वर्ष खाद्य तेल के 1,247 नमूने लिए गए थे। इनमें से 1,142 नमूने मानक स्तर के पाए गए, जबकि 77 सब-स्टैंडर्ड, 13 असुरक्षित और 15 मिसब्रांडेड थे। जब्त कुल स्टॉक 3,20,781 किलोग्राम था, जिसकी बाजार कीमत ₹5.31 करोड़ आँकी गई।
उन्होंने स्पष्ट किया, 'यह पिछले साल का डेटा है। हमने उसी हिसाब से कार्रवाई बढ़ाई है और यह अनुपालन आदेश इस दिशा में अगला और मजबूत कदम है, ताकि लोगों को सुरक्षित खाने वाला तेल मिल सके — न मिसब्रांडेड, न असुरक्षित और न ही सब-स्टैंडर्ड।'
उल्लंघन पर कड़ी सजा का प्रावधान
मुंढे ने चेतावनी दी कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर ₹10 लाख तक का जुर्माना और उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।
आम उपभोक्ता पर असर और आगे की राह
यह आदेश उन करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है जो खुले में बिकने वाले तेल की गुणवत्ता को लेकर चिंतित रहते हैं। बंद पैकेट पर अनिवार्य लेबलिंग से उपभोक्ता तेल का स्रोत, उत्पादन तिथि और पोषण संबंधी जानकारी आसानी से जाँच सकेंगे। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि राज्य का FDA इस आदेश को ज़मीनी स्तर पर कितनी प्रभावी ढंग से लागू कर पाता है — विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी बाजारों में जहाँ खुले तेल की बिक्री सबसे अधिक प्रचलित है।