गडकरी का चिंतन शिविर 2026 में आह्वान: इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं समय पर पूरी करने को केंद्र-राज्य तालमेल अनिवार्य
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 5 अक्टूबर 2026 को गुजरात में आयोजित 'चिंतन शिविर 2026 — ए नेशनल कॉन्क्लेव ऑन हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर' का उद्घाटन करते हुए स्पष्ट किया कि देश की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को तय समय-सीमा में पूरा करने के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और परियोजना क्रियान्वयन एजेंसियों के बीच ठोस समन्वय और संयुक्त प्रयास अपरिहार्य हैं। यह दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन राजमार्ग विकास और अवसंरचना निर्माण की चुनौतियों पर केंद्रित है।
चिंतन शिविर का उद्देश्य और भागीदारी
इस सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के परिवहन एवं लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, क्रियान्वयन एजेंसियों के प्रतिनिधि और अन्य हितधारक शामिल हुए। गडकरी ने कहा कि यह शिविर केंद्र और राज्यों को एक साझा मंच देता है जहाँ जमीनी अनुभव साझा कर राजमार्ग विकास की व्यावहारिक बाधाओं का समाधान तलाशा जा सकता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि विभिन्न राज्यों में अपनाई गई सफल कार्यप्रणालियों और नवाचारों को चिह्नित कर जहाँ संभव हो, दूसरे राज्यों में भी लागू किया जाए। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में कई प्रमुख राजमार्ग परियोजनाएँ भूमि अधिग्रहण और वैधानिक मंजूरियों में देरी के कारण लंबित हैं।
DPR तैयारी और योजना पर विशेष बल
गडकरी ने डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया को मजबूत करने पर विशेष ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि DPR बनाते समय विस्तृत सर्वेक्षण, सड़क संरेखण (Alignment) की योजना, भूमि अधिग्रहण, उपयोगिताओं का स्थानांतरण और आवश्यक वैधानिक मंजूरियाँ समय पर सुनिश्चित की जानी चाहिए। मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक चरण में बेहतर तैयारी परियोजनाओं की देरी और लागत वृद्धि दोनों को काफी हद तक रोक सकती है।
गौरतलब है कि भारत के राजमार्ग क्षेत्र में बड़े पैमाने पर परियोजनाएँ तकनीकी एवं प्रशासनिक अड़चनों के चलते तय बजट से अधिक खर्च और निर्धारित समय से अधिक अवधि लेती रही हैं। मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार परियोजना विलंब के प्रमुख कारणों में भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण मंजूरी सबसे ऊपर हैं।
सड़क सुरक्षा और गुणवत्ता पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने सड़क सुरक्षा को राजमार्ग नियोजन और परियोजना डिज़ाइन का अभिन्न हिस्सा बनाने की माँग रखी। उन्होंने कहा कि दुर्घटना-संभावित स्थलों (Blackspots) की पहचान निर्माण और योजना चरण में ही की जाए और उचित सुरक्षा उपाय तभी शामिल किए जाएँ। राजमार्ग विकास का फोकस गुणवत्ता, सुरक्षा, गति और विश्वस्तरीय मानकों पर होना चाहिए — यह उनका स्पष्ट संदेश था।
तकनीकी नवाचार और टिकाऊ निर्माण सामग्री
गडकरी ने नई तकनीकों, नवाचारी निर्माण पद्धतियों और कम लागत वाली किंतु टिकाऊ निर्माण सामग्रियों के व्यापक उपयोग का आह्वान किया। उनका तर्क था कि इससे परियोजनाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और निर्माण तथा रखरखाव, दोनों की लागत घटेगी। उन्होंने राज्यों और एजेंसियों से अनुरोध किया कि वे अपने नवाचार और जमीनी अनुभव राष्ट्रीय स्तर पर साझा करें।
चिंतन शिविर के विषयगत सत्रों में परियोजना क्रियान्वयन की चुनौतियों, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों और ऐसे समाधानों पर विचार-मंथन हो रहा है जिन्हें देशभर में दोहराया जा सके। यह पहल भारत को विश्वस्तरीय सड़क अवसंरचना की दिशा में और तेज़ी से आगे ले जाने की रणनीति का हिस्सा है।