गडकरी की अध्यक्षता में एकता नगर में दो दिवसीय 'चिंतन शिविर', हाईवे इंफ्रा की चुनौतियों पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) 5 और 6 अक्टूबर 2026 को गुजरात के नर्मदा जिले के एकता नगर में एक महत्वपूर्ण दो दिवसीय 'चिंतन शिविर' का आयोजन करने जा रहा है, जिसमें देशभर की राजमार्ग अवसंरचना परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं और उनके समाधानों पर केंद्र व राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी मिलकर विचार-विमर्श करेंगे। इस शिविर का उद्घाटन केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी करेंगे।
शिविर का उद्देश्य और स्वरूप
मंत्रालय के अनुसार, इस चिंतन शिविर का प्रमुख उद्देश्य राजमार्ग परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली रुकावटों की पहचान करना, विभिन्न पक्षों के बीच समन्वय बेहतर बनाना और व्यावहारिक समाधान खोजना है। मंत्रालय का मानना है कि यह मंच केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को नई मजबूती देगा तथा जमीनी अनुभवों व सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान करेगा।
कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा और हर्ष मल्होत्रा भी उपस्थित रहेंगे। इसके साथ ही विभिन्न राज्यों के सड़क परिवहन और लोक निर्माण विभागों के मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, परियोजना क्रियान्वयन एजेंसियों के प्रतिनिधि तथा क्षेत्र विशेषज्ञ भी आमंत्रित हैं।
पाँच प्रमुख विषयगत सत्र
दो दिवसीय कार्यक्रम में पाँच विशेष सत्र आयोजित होंगे। पहला सत्र पीएम गतिशक्ति और एकीकृत अवसंरचना योजना पर केंद्रित रहेगा, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के बीच बेहतर तालमेल पर चर्चा होगी। दूसरे सत्र में भूमि अधिग्रहण और भूमि राशि प्लेटफॉर्म से जुड़ी परियोजना बाधाओं को दूर करने के उपाय खोजे जाएँगे।
तीसरा सत्र मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट और रेटिंग्स पर होगा, जिसमें अनुबंध संबंधी मुद्दों और क्रियान्वयन की चुनौतियों पर फोकस रहेगा। चौथे सत्र में हाईवे सुरक्षा — विशेष रूप से सड़क सुरक्षा उपायों को डिज़ाइन और निर्माण प्रक्रिया में प्रभावी ढंग से शामिल करने — पर विचार होगा। पाँचवाँ और अंतिम सत्र गुणवत्ता आश्वासन एवं परियोजना निगरानी को समर्पित है, जिसमें निर्माण मानकों को ऊँचा उठाने और निगरानी तंत्र को मजबूत करने पर चर्चा की जाएगी।
नीतिगत सुधार पर जोर
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि शिविर में परियोजना क्रियान्वयन की बाधाओं की पहचान के साथ-साथ नवाचारी और दोहराए जा सकने वाले समाधानों की खोज पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नीति और संस्थागत सुधारों पर भी गहन विचार-विमर्श होगा, ताकि भविष्य की परियोजनाओं के लिए एक ठोस नीतिगत ढाँचा तैयार किया जा सके।
गौरतलब है कि देश में राजमार्ग निर्माण की गति पिछले कुछ वर्षों में तेज हुई है, लेकिन भूमि अधिग्रहण में देरी, अनुबंध विवाद और गुणवत्ता संबंधी चिंताएँ अभी भी परियोजनाओं के समय पर पूरा होने में बड़ी बाधाएँ बनी हुई हैं। यह शिविर उन्हीं व्यावहारिक अड़चनों को दूर करने का एक व्यवस्थित प्रयास है।
आगे की राह
मंत्रालय के अनुसार, चिंतन शिविर से निकलने वाली सिफारिशें और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियाँ देशभर की राजमार्ग परियोजनाओं की गति, गुणवत्ता और सुरक्षा को बेहतर बनाने में सहायक होंगी। यह आयोजन केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग का एक नया अध्याय लिखने के साथ-साथ सड़क अवसंरचना विकास को अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनाने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।