नितिन गडकरी ने शिलांग में नॉर्थ ईस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर समिट 2026 का उद्घाटन किया, पूर्वोत्तर कनेक्टिविटी को मिलेगी नई रफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 15 जून 2026 को मेघालय की राजधानी शिलांग में 'नॉर्थ ईस्ट इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर समिट एंड एग्जीबिशन' का औपचारिक उद्घाटन किया। उन्होंने पूर्वोत्तर क्षेत्र में त्वरित बुनियादी ढाँचा विकास की ज़रूरत को रेखांकित करते हुए कहा कि इससे कनेक्टिविटी, व्यापार, पर्यटन और समग्र आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। यह सम्मेलन पूर्वोत्तर के आठ राज्यों में निवेश और विकास की दिशा तय करने का अहम मंच बन रहा है।
सम्मेलन का स्वरूप और स्थान
यह दो दिवसीय सम्मेलन 15 और 16 जून 2026 को लारिटी इंटरनेशनल सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स एंड कल्चर, शिलांग में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में देशभर के नीति निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, बुनियादी ढाँचा विशेषज्ञ और विभिन्न हितधारक शामिल हुए हैं। सम्मेलन के साथ आयोजित प्रदर्शनी में क्षेत्र की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएँ, नई तकनीकी खोजें और विकास मॉडल प्रदर्शित किए गए हैं।
मुख्य अतिथि और उपस्थित नेता
गडकरी के शिलांग पहुँचने पर उमरोई हवाई अड्डे पर मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा और उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन टिनसॉन्ग ने उनका स्वागत किया। इसके बाद दोनों नेता उद्घाटन सत्र में शामिल हुए। नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो के साथ-साथ वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, सार्वजनिक क्षेत्र की एजेंसियों के प्रतिनिधि, निजी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के अधिकारी, निवेशक और विकास सहयोगी भी इस अवसर पर मौजूद रहे।
सम्मेलन की प्रमुख विषयवस्तु
वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि पूर्वोत्तर भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए भारत का प्रवेश द्वार है। इसलिए यहाँ सड़कों, राष्ट्रीय राजमार्गों, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, शहरी ढाँचे, नवीकरणीय ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी में निरंतर निवेश अनिवार्य है। उद्योग जगत के प्रतिनिधि परिवहन, पर्यटन, शहरी विकास, टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर और स्मार्ट तकनीकों जैसे क्षेत्रों में निवेश के नए अवसरों की तलाश कर रहे हैं।
पूर्वोत्तर में इंफ्रास्ट्रक्चर की मौजूदा स्थिति
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में पूर्वोत्तर भारत में बुनियादी ढाँचे के विकास को उल्लेखनीय बढ़ावा मिला है। राष्ट्रीय राजमार्गों, पुलों, हवाई अड्डों, रेलवे कनेक्टिविटी और सीमा व्यापार गलियारों में बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है। केंद्र सरकार की 'एक्ट ईस्ट नीति' के तहत यह क्षेत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों से बेहतर जुड़ाव स्थापित करने में केंद्रीय भूमिका निभा रहा है।
आगे क्या होगा
सम्मेलन 16 जून 2026 (मंगलवार) को समाप्त होगा। समापन से पहले विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञ चर्चाएँ, व्यापारिक बैठकें और नीतिगत विचार-विमर्श आयोजित किए जाएँगे, जिनका उद्देश्य पूर्वोत्तर में बुनियादी ढाँचे के माध्यम से विकास को नई दिशा देना है।