एक्ट ईस्ट पॉलिसी से नॉर्थ-ईस्ट में बदलाव का नया दौर: नागालैंड के सीएम नेफ्यू रियो
सारांश
मुख्य बातें
नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने सोमवार, 15 जून 2026 को कहा कि केंद्र की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' के प्रभाव में पूर्वोत्तर भारत विकास के एक नए और परिवर्तनकारी चरण में प्रवेश कर चुका है। शिलांग में आयोजित 'नॉर्थ ईस्ट इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर समिट एंड एग्जिबिशन 2026' के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए उन्होंने क्षेत्र की पूरी क्षमता का दोहन करने के लिए सरकारों और निवेशकों के बीच ठोस सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
समिट का आयोजन और भागीदारी
मेघालय सरकार द्वारा न्यू शिलांग के लारिटी कॉम्प्लेक्स में आयोजित इस दो दिवसीय समिट में 1,500 से अधिक प्रतिनिधि और 60 से अधिक प्रदर्शक शामिल हुए। आठों पूर्वोत्तर राज्यों के नीति-निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और निवेशक एक मंच पर एकत्रित हुए। उद्घाटन समारोह में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री रियो के मुख्य बिंदु
रियो ने कहा, 'नॉर्थ-ईस्ट एक्ट ईस्ट पॉलिसी से प्रेरित बदलाव के एक गतिशील दौर में प्रवेश कर रहा है। बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी में लगातार निवेश इस क्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा।' उन्होंने इस समिट को विकास योजनाओं को ठोस नतीजों में बदलने के लिए एक अनिवार्य मंच बताया।
मुख्यमंत्री ने सड़क, रेल, हवाई और डिजिटल कनेक्टिविटी को पूर्वोत्तर राज्यों के आर्थिक एकीकरण की रीढ़ बताया। उनके अनुसार, बेहतर कनेक्टिविटी व्यापार, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और उद्यमिता के नए द्वार खोलेगी। गौरतलब है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र कई देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमाएं साझा करता है और भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने वाले एक प्रमुख गेटवे के रूप में उभरने की क्षमता रखता है।
समिट के प्रमुख सत्र और एजेंडा
दो दिवसीय इस आयोजन में बुनियादी ढांचा, लॉजिस्टिक्स, शहरी विकास, ऊर्जा और निवेश संवर्धन पर केंद्रित कई सेक्टर-विशिष्ट सत्र और सीईओ राउंडटेबल आयोजित किए जा रहे हैं। रियो ने मेघालय सरकार की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के सहयोगी मंच क्षेत्रीय विकास की गति को तेज़ करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
क्षेत्र की रणनीतिक अहमियत
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार पूर्वोत्तर को भारत की विदेश नीति और आर्थिक विस्तार की धुरी के रूप में स्थापित करने पर ज़ोर दे रही है। रियो ने स्पष्ट किया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र अब स्थिरता और विकास के एक नए अध्याय में है, और केंद्र तथा राज्य सरकारों के बीच निरंतर सहयोग से आने वाले वर्षों में इसे आर्थिक विकास के एक बड़े केंद्र के रूप में रूपांतरित किया जा सकता है।