गडकरी का अमेरिकी हाईटेक कंपनियों संग जॉइंट वेंचर का आह्वान, लॉजिस्टिक्स लागत 16% से घटकर 10% पर

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गडकरी का अमेरिकी हाईटेक कंपनियों संग जॉइंट वेंचर का आह्वान, लॉजिस्टिक्स लागत 16% से घटकर 10% पर

सारांश

गडकरी का संदेश साफ था — तकनीक के लिए अमेरिका से हाथ मिलाओ। IIT-IIM अध्ययन के हवाले से लॉजिस्टिक्स लागत में 16% से 10% की गिरावट, ₹22 लाख करोड़ के ईंधन आयात बोझ से मुक्ति के लिए ग्रीन हाइड्रोजन, और ₹22 लाख करोड़ के ऑटोमोबाइल उद्योग को वैश्विक नंबर-1 बनाने का संकल्प — यही तीन धुरियाँ थीं उनके AmCham भाषण की।

मुख्य बातें

नितिन गडकरी ने 21 मई 2026 को अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स लीडरशिप समिट में भारतीय कंपनियों से अमेरिकी हाईटेक फर्मों के साथ जॉइंट वेंचर करने का आह्वान किया।
IIT चेन्नई, IIT कानपुर और IIM बेंगलुरु के अध्ययन के अनुसार भारत की लॉजिस्टिक्स लागत 16% से घटकर 10% पर आई।
भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग ₹14 लाख करोड़ से बढ़कर ₹22 लाख करोड़ हुआ; अगले 5 वर्षों में वैश्विक नंबर-1 बनाने का लक्ष्य।
ईंधन आयात पर सालाना ₹22 लाख करोड़ के खर्च को देखते हुए 10 ग्रीन हाइड्रोजन हाईवे कॉरिडोर चिन्हित।
सड़क परिवहन मंत्रालय हाईवे DPR में अमेरिकी कंपनियों से परामर्श लेने पर विचार कर रहा है।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 21 मई 2026 को नई दिल्ली में अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स के वार्षिक लीडरशिप समिट को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय कंपनियों को नवीनतम प्रौद्योगिकियों तक पहुँच के लिए अमेरिकी हाईटेक कंपनियों के साथ संयुक्त उपक्रम (जॉइंट वेंचर) स्थापित करना अनिवार्य है। उन्होंने भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बताते हुए इस साझेदारी को दोनों देशों के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी बताया।

जॉइंट वेंचर की ज़रूरत क्यों

गडकरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है, जबकि अमेरिकी कंपनियां नई तकनीकों का विकास कर रही हैं। ऐसे में भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी कंपनियों के साथ जॉइंट वेंचर करना बेहद ज़रूरी है।' उन्होंने यह भी बताया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय हाईवे परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने में अमेरिकी कंपनियों से परामर्श लेने पर विचार कर रहा है।

लॉजिस्टिक्स लागत में ऐतिहासिक गिरावट

मंत्री ने बताया कि IIT चेन्नई, IIT कानपुर और IIM बेंगलुरु द्वारा तैयार ताज़ा अध्ययन के अनुसार, एक्सप्रेसवे और आर्थिक कॉरिडोर के निर्माण से भारत की लॉजिस्टिक्स लागत 16 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत रह गई है। तुलनात्मक रूप से, अमेरिका और यूरोपीय देशों में यह लागत 12 प्रतिशत है, जबकि चीन में 8 से 10 प्रतिशत के बीच है। गडकरी ने इसे लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भारत की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मकता का प्रमाण बताया।

ऑटोमोबाइल उद्योग: नंबर-1 का लक्ष्य

गडकरी ने खुलासा किया कि जब उन्होंने परिवहन मंत्री का कार्यभार संभाला था, तब भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग का आकार ₹14 लाख करोड़ था, जो अब बढ़कर ₹22 लाख करोड़ हो गया है। सरकार का लक्ष्य अगले पाँच वर्षों में इस उद्योग को वैश्विक स्तर पर नंबर-1 बनाना है। वर्तमान में अमेरिका का ऑटोमोबाइल उद्योग ₹78 लाख करोड़ और चीन का ₹47 लाख करोड़ का है। उन्होंने यह भी बताया कि यह क्षेत्र लगभग 4 लाख युवाओं को रोज़गार देता है और केंद्र व राज्यों को सर्वाधिक GST इसी से प्राप्त होता है।

जीवाश्म ईंधन निर्भरता और ग्रीन हाइड्रोजन

मंत्री ने चेताया कि जीवाश्म ईंधन पर भारत की निर्भरता आर्थिक बोझ बन चुकी है — ईंधन आयात पर हर साल ₹22 लाख करोड़ खर्च होते हैं। इसके पर्यावरणीय दुष्प्रभावों को देखते हुए सरकार ने देशभर में 10 हाईवे कॉरिडोर चिन्हित किए हैं, जहाँ ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाले ट्रकों का संचालन होगा। इन मार्गों में ग्रेटर नोएडा-दिल्ली-आगरा, भुवनेश्वर-पुरी-कोणार्क, अहमदाबाद-वडोदरा-सूरत, साहिबाबाद-फरीदाबाद-दिल्ली, जमशेदपुर-कलिंगनगर, तिरुवनंतपुरम-कोच्चि और जामनगर-अहमदाबाद हाईवे शामिल हैं।

अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स का महत्व

गौरतलब है कि अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स में 400 से अधिक अमेरिकी कंपनियाँ तथा व्यक्तिगत और मानद सदस्य शामिल हैं। भारत में अमेरिका के मौजूदा राजदूत इस संगठन के मानद अध्यक्ष होते हैं। यह मंच भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को मज़बूत करने में केंद्रीय भूमिका निभाता है। गडकरी का यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब दोनों देश व्यापार एवं प्रौद्योगिकी सहयोग को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या भारतीय कंपनियाँ तकनीक-हस्तांतरण की शर्तों पर अमेरिकी भागीदारों के साथ बराबरी का सौदा कर पाएंगी। लॉजिस्टिक्स लागत का 16% से 10% पर आना निस्संदेह उल्लेखनीय है, लेकिन यह आँकड़ा IIT-IIM अध्ययन पर आधारित है — स्वतंत्र सत्यापन अभी बाकी है। ऑटोमोबाइल उद्योग को नंबर-1 बनाने की महत्वाकांक्षा के साथ-साथ ₹22 लाख करोड़ के ईंधन आयात की निर्भरता तोड़ना उतना ही ज़रूरी है — और ग्रीन हाइड्रोजन कॉरिडोर की घोषणा इस दिशा में ठोस कदम है, बशर्ते क्रियान्वयन की गति घोषणाओं से मेल खाए।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नितिन गडकरी ने अमेरिकी कंपनियों के साथ जॉइंट वेंचर की बात क्यों कही?
गडकरी ने कहा कि भारत तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और अमेरिकी कंपनियाँ नई तकनीकें विकसित कर रही हैं, इसलिए नवीनतम प्रौद्योगिकियों तक पहुँच के लिए जॉइंट वेंचर ज़रूरी है। उन्होंने हाईवे DPR में भी अमेरिकी परामर्श लेने का संकेत दिया।
भारत की लॉजिस्टिक्स लागत कितनी घटी और इसका आधार क्या है?
IIT चेन्नई, IIT कानपुर और IIM बेंगलुरु के अध्ययन के अनुसार, एक्सप्रेसवे और आर्थिक कॉरिडोर के निर्माण से लॉजिस्टिक्स लागत 16 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत रह गई है। तुलनात्मक रूप से अमेरिका-यूरोप में यह 12 प्रतिशत और चीन में 8-10 प्रतिशत है।
भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग को नंबर-1 बनाने का लक्ष्य क्या है?
सरकार का लक्ष्य अगले पाँच वर्षों में भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग को वैश्विक स्तर पर नंबर-1 बनाना है। यह उद्योग ₹14 लाख करोड़ से बढ़कर ₹22 लाख करोड़ हो चुका है और लगभग 4 लाख युवाओं को रोज़गार देता है।
ग्रीन हाइड्रोजन हाईवे कॉरिडोर कहाँ-कहाँ बनेंगे?
सरकार ने 10 हाईवे कॉरिडोर चिन्हित किए हैं जहाँ ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाले ट्रक संचालित होंगे। इनमें ग्रेटर नोएडा-दिल्ली-आगरा, भुवनेश्वर-पुरी-कोणार्क, अहमदाबाद-वडोदरा-सूरत, तिरुवनंतपुरम-कोच्चि और जामनगर-अहमदाबाद जैसे प्रमुख मार्ग शामिल हैं।
अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स क्या है और भारत से इसका क्या संबंध है?
अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स में 400 से अधिक अमेरिकी कंपनियाँ और सदस्य शामिल हैं, और भारत में अमेरिका के राजदूत इसके मानद अध्यक्ष होते हैं। यह संगठन भारत-अमेरिका व्यापार एवं निवेश संबंधों को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
राष्ट्र प्रेस
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