पंजाब में EVM छोड़ बैलेट पेपर से चुनाव: बिट्टू का AAP पर हार के डर का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने 21 मई को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने जानबूझकर स्थानीय निकाय चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) की जगह बैलेट पेपर का इस्तेमाल कराया, क्योंकि उसे चुनाव हारने का भय था। बिट्टू के अनुसार, यह महज प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सुनियोजित देरी थी।
मुख्य आरोप: जानबूझकर की गई देरी
बिट्टू ने दावा किया कि राज्य चुनाव आयोग ने जनवरी में ही EVM की माँग कर दी थी और फरवरी में इसके आदेश भी पक्के हो गए थे। उन्होंने कहा कि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) मशीनें आपूर्ति करने के लिए तैयार था और मार्च तथा अप्रैल में अनुस्मारक भी भेजे गए थे। इसके बावजूद मशीनें लाने के लिए ट्रक नहीं भेजे गए।
बिट्टू ने कहा, 'राज्य सरकार ने जानबूझकर चुनाव आयोग की मशीनें नहीं मँगाईं, क्योंकि उसे हार का डर था। यह देरी सुनियोजित थी।'
हाई कोर्ट में PIL और न्यायिक हस्तक्षेप
बिट्टू ने बताया कि इस मामले में उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई थी, जिसमें सवाल उठाया गया कि चुनाव EVM के बजाय बैलेट पेपर से क्यों कराए जा रहे हैं। उनके अनुसार, न्यायाधीशों ने चुनाव आयोग से इस विषय पर स्पष्टीकरण माँगा, जिस पर चुनाव आयोग ने कहा कि EVM दो दिनों के भीतर पहुँचाए जा सकते थे, किंतु राज्य सरकार ने इस मुद्दे को टालते रहे।
AAP पर सीधा हमला
बिट्टू ने आरोप लगाया, 'पंजाब सरकार किसी बात को लेकर डरी हुई है, इसीलिए स्थानीय निकाय चुनाव में EVM की जगह बैलेट पेपर इस्तेमाल किया जा रहा है। आम आदमी पार्टी चुनाव हार रही है और गलत तरीके से जीतने के लिए बैलेट पेपर का सहारा ले रही है।'
गौरतलब है कि EVM की विश्वसनीयता को लेकर विपक्षी दलों में लंबे समय से बहस चली आ रही है। यह ऐसे समय में आया है जब AAP पंजाब में अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखने की कोशिश कर रही है।
जनता का मूड और आगे की राह
बिट्टू ने दावा किया कि जनता आम आदमी पार्टी से नाराज़ है और स्थानीय निकाय चुनावों के ज़रिए ही उन्हें सत्ता से बाहर कर देगी। उन्होंने कहा कि बैलेट पेपर से चुनाव कराने से AAP की हार नहीं रुकेगी।
यह मामला पंजाब की चुनावी राजनीति में एक नया विवाद खड़ा करता है और आने वाले दिनों में इस पर और सियासी तीखापन देखने को मिल सकता है।