क्या महाराष्ट्र निकाय चुनावों में हार के बाद ईवीएम पर उठे सवाल सही हैं?

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क्या महाराष्ट्र निकाय चुनावों में हार के बाद ईवीएम पर उठे सवाल सही हैं?

सारांश

महाराष्ट्र में निकाय चुनावों में कांग्रेस की हार के बाद ईवीएम पर सवाल उठाए गए हैं। नाना पटोले ने बैलेट पेपर के इस्तेमाल की मांग की है। जानिए क्या हैं उनके तर्क और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की स्थिति।

Key Takeaways

  • ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए हैं।
  • कांग्रेस ने बैलेट पेपर के उपयोग की मांग की है।
  • मतदाता के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।
  • चुनाव आयोग की नाकामी के संकेत मिले हैं।
  • लोकतंत्र के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

मुंबई, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र में निकाय चुनावों में कठोर हार के बाद कांग्रेस ने यह मांग की है कि राज्य में जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव बैलेट पेपर के माध्यम से कराए जाएं। कांग्रेस के नेता नाना पटोले ने इस संदर्भ में राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने ईवीएम पर भी सवाल उठाए हैं।

नाना पटोले ने कहा कि ईवीएम पर से भरोसा उठ चुका है। नगर निगम चुनावों में हुई गड़बड़ी के कारण चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास कम हुआ है। वीवीपैट का प्रयोग न होना पारदर्शिता पर प्रश्न उठाता है। यह चुनावी उदासीनता नहीं, बल्कि प्रशासनिक अक्षमता का संकेत है। उन्होंने पत्र में कहा है कि लोकतंत्र को बचाने के लिए बैलेट पेपर का उपयोग फिर से शुरू करना चाहिए।

कांग्रेस नेता ने पत्र में लिखा, "29 नगर निगमों के चुनावों ने महाराष्ट्र में चुनावी प्रणाली की खामियों को उजागर किया है। शहरी क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत का कम होना केवल 'मतदाता की बेपरवाही' का संकेत नहीं है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया में जनता के कम होते भरोसे का भी संकेत है। सबसे गंभीर बात यह है कि इन चुनावों में वीवीपैट मशीनों का उपयोग नहीं किया गया। इसलिए मतदाता को अपने वोट की पुष्टि करने का अधिकार छीन लिया गया। इसके अलावा, मीडिया में सैकड़ों वीडियो और वास्तविक उदाहरण प्रस्तुत हुए हैं, जिनमें दिखाया गया है कि वोटरों की उंगलियों पर लगी स्याही हाथ धोने के बाद आसानी से उतर जाती है। इन सभी कारणों से चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न उठे हैं।"

उन्होंने लिखा, "मतदाता सूची में गड़बड़ी, मतदाताओं को मतदान केंद्र खोजने के लिए 2-3 घंटे इंतजार करना, और अंत में हजारों लोगों का बिना वोट दिए लौटना। ये सब चुनाव आयोग की नाकामी के गंभीर संकेत हैं। यह स्थिति लोकतंत्र के लिए खतरनाक है और इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, यह सवाल जनता के मन में उठ गया है। देश के कई राज्यों ने लोगों का विश्वास बनाए रखने और विवाद से बचने के लिए स्थानीय निकाय चुनाव ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर पर कराने का निर्णय लिया है। तो महाराष्ट्र में ईवीएम पर इतना जोर क्यों? यह मजबूरी किसके फायदे के लिए है? यही सवाल आज आम मतदाता पूछ रहा है।"

कांग्रेस नेता नाना पटोले ने कहा कि जिला परिषद और पंचायत समिति ग्रामीण लोकतंत्र की रीढ़ हैं। यदि इन चुनावों को लेकर शक, अविश्वास और कुप्रबंधन का माहौल बना रहा, तो इसका राज्य के लोकतांत्रिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। इसलिए आने वाले जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव बैलेट पेपर पर ही होने चाहिए, यह जनता की भावना है। इस भावना का सम्मान करते हुए आने वाले जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव बैलेट पेपर पर होने चाहिए।

Point of View

NationPress
17/01/2026

Frequently Asked Questions

क्या ईवीएम पर सवाल उठाना सही है?
ईवीएम पर उठे सवाल चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता की आवश्यकता को दर्शाते हैं।
बैलेट पेपर का उपयोग क्यों किया जाना चाहिए?
बैलेट पेपर का उपयोग चुनावी प्रक्रिया में अधिक विश्वसनीयता और पारदर्शिता लाने के लिए किया जाना चाहिए।
क्या दूसरी राज्यों में बैलेट पेपर का इस्तेमाल बढ़ रहा है?
हाँ, कई राज्यों ने ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर पर चुनाव कराने का निर्णय लिया है।
क्या चुनावी प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता है?
हाँ, चुनावी प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता है, ताकि जनता का विश्वास बहाल हो सके।
नाना पटोले की मांग क्या है?
नाना पटोले ने बैलेट पेपर के उपयोग की मांग की है ताकि लोकतंत्र की रक्षा की जा सके।
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