गुजरात के राजकोट में 'श्री वाजपेयी बैंक योग्य योजना' के तहत 2,913 लोगों को मिला ऋण
सारांश
Key Takeaways
- श्री वाजपेयी बैंक योग्य योजना के तहत 2,913 लाभार्थियों को ऋण मिला।
- राजकोट जिले में आवेदन की संख्या 4,157 थी।
- कच्छ जिले में 1,919 आवेदन प्राप्त हुए थे।
- ऋण की अधिकतम सीमा बढ़ाकर 25 लाख रुपए की गई।
- सब्सिडी की सीमा बढ़ाकर 3.75 लाख रुपए की गई।
गांधीनगर, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात सरकार ने सोमवार को राज्य विधानसभा में बताया कि पिछले वर्ष के दौरान राजकोट जिले में श्री वाजपेयी बैंक योग्य योजना के तहत 2,900 से अधिक लाभार्थियों को ऋण सहायता मिली है।
विधानसभा में एक सदस्य के प्रश्न के उत्तर में खादी, कुटीर एवं ग्रामीण उद्योग राज्य मंत्री स्वरूपजी ठाकोर ने कहा कि 31 दिसंबर 2025 तक इस योजना के तहत राजकोट जिले में कुल 4,157 आवेदन प्राप्त हुए थे।
इन सभी आवेदनों को बैंकों के लिए भेजा गया था। मंत्री ने बताया कि बैंकों ने इनमें से 2,913 आवेदनों को मंजूरी दी और लाभार्थियों को ऋण का लाभ प्रदान किया गया।
मंत्री ने कच्छ जिले के बारे में भी जानकारी दी। उनके अनुसार, इसी अवधि में कच्छ जिले में 1,919 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 1,915 को बैंकों को भेजा गया।
बैंकों ने इनमें से 1,463 आवेदनों को स्वीकृत किया और लाभार्थियों को ऋण सहायता दी।
ठाकोर ने विधानसभा को बताया कि हाल ही में इस योजना के तहत वित्तीय सीमा में वृद्धि की गई है। पहले इस योजना के तहत अधिकतम 8 लाख रुपए का ऋण मिलता था और उस पर 1.25 लाख रुपए तक की सब्सिडी मिलती थी।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में ऋण सीमा बढ़ाकर 25 लाख रुपए और सब्सिडी की सीमा बढ़ाकर 3.75 लाख रुपए कर दी गई है।
श्री वाजपेयी बैंक योग्य योजना के अंतर्गत छोटे व्यवसाय, उद्योग, और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए ऋण और सब्सिडी के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
यह योजना गुजरात के 18 से 65 वर्ष के नागरिकों के लिए है, जिन्होंने कम से कम चौथी कक्षा पास की हो या जिनके पास संबंधित प्रशिक्षण या कार्य अनुभव हो।
इस योजना में आवेदन करने के लिए आय की कोई सीमा नहीं है। योग्य उम्मीदवार आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन मंजूर होने पर राष्ट्रीयकृत या सहकारी बैंक ऋण प्रदान करते हैं।
सरकार का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य छोटे व्यवसाय शुरू करने या उन्हें आगे बढ़ाने के इच्छुक लोगों को संस्थागत ऋण उपलब्ध कराकर स्वरोजगार को बढ़ावा देना है।