धर्मनिरपेक्षता पर कीर्ति आजाद की टिप्पणी: क्रिकेट का कोई मजहब नहीं

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धर्मनिरपेक्षता पर कीर्ति आजाद की टिप्पणी: क्रिकेट का कोई मजहब नहीं

सारांश

भारत ने टी20 विश्व कप 2026 का खिताब जीता, लेकिन कीर्ति आजाद ने ट्रॉफी को मंदिर में ले जाने पर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि क्रिकेट खिलाड़ी और खेल का कोई मजहब नहीं होता। जानें उनके विचार और इसका महत्व।

Key Takeaways

  • भारत धर्मनिरपेक्ष है.
  • क्रिकेट का कोई मजहब नहीं होता.
  • सभी धर्म के लोग टीम का हिस्सा हैं.
  • कीर्ति आजाद ने ट्रॉफी को मंदिर में ले जाने पर विरोध किया.
  • यह ट्रॉफी हर धर्म के भारतीयों की है.

नई दिल्ली, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत ने न्यूजीलैंड को हराकर टी20 विश्व कप 2026 का खिताब जीता, जिसके बाद टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव, जय शाह और गौतम गंभीर हनुमान मंदिर गए। टीएमसी सांसद और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने पहले सोशल मीडिया के जरिए ट्रॉफी लेकर मंदिर में जाने पर आपत्ति जताई और अब कहा कि हमारा देश धर्मनिरपेक्ष है, इसलिए जो हुआ वह सही नहीं था।

कीर्ति आजाद ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि आप टीम के लिए खेलते हैं। देश में सभी धर्म के लोग रहते हैं। सभी उस टीम का हिस्सा हैं। 1983 में जब हम जीते थे, तब भी सभी धर्म के लोग थे। खिलाड़ी और खेल का कोई मजहब नहीं होता, वो अपनी टीम का होता है। इन लोगों ने हमारा सिर गर्व से ऊंचा किया है। उन्होंने संजू सैमसन और मोहम्मद शिराज की तारीफ करते हुए कहा कि टीम भारत, हिंदुस्तान की टीम है।

उन्होंने ट्रॉफी को मंदिर ले जाने पर कहा कि फिर भारत और पाकिस्तान में क्या अंतर रह गया। उन्होंने कहा कि मैं खुद हिन्दू हूं, लेकिन खेलते वक्त कभी धर्म को नहीं जोड़ा। आर्ट का कोई धर्म नहीं होता, इसलिए मैंने इसका विरोध किया। हर मैच से पहले और बाद में मैं भी मंदिर जाता था। उन्होंने कहा, "हमारा देश धर्मनिरपेक्ष है, इसलिए जो हुआ वह सही नहीं था।"

बता दें कि कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर ट्रॉफी को मंदिर में ले जाने पर तीखी आलोचना की थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था कि टीम इंडिया पर शर्म आती है।

उन्होंने लिखा कि जब हमने 1983 में कपिल देव की कप्तानी में विश्व कप जीता था, तब हमारी टीम में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्म के खिलाड़ी थे। हम ट्रॉफी को अपनी धार्मिक जन्मभूमि, अपनी मातृभूमि भारत (हिंदुस्तान) में लाए थे। आखिर भारतीय क्रिकेट ट्रॉफी को क्यों घसीटा जा रहा है? मस्जिद क्यों नहीं? चर्च क्यों नहीं? गुरुद्वारा क्यों नहीं?

उन्होंने आगे लिखा कि यह टीम भारत का प्रतिनिधित्व करती है, सूर्यकुमार यादव या जय शाह के परिवार का नहीं! सिराज कभी ट्रॉफी को मस्जिद में नहीं ले गए। संजू कभी इसे चर्च में नहीं ले गए। संजू ने टूर्नामेंट में अहम भूमिका निभाई थी और उन्हें मैन ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया था। यह ट्रॉफी हर धर्म के भारतीयों की है। यह किसी एक धर्म की जीत नहीं है।

Point of View

जो भारतीय क्रिकेट के धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत को चुनौती देता है। यह मामला न केवल खेल के प्रति दृष्टिकोण को दर्शाता है, बल्कि समाज में धार्मिक सहिष्णुता का भी प्रतीक है।
NationPress
11/03/2026

Frequently Asked Questions

कीर्ति आजाद ने ट्रॉफी को मंदिर में ले जाने पर क्या कहा?
कीर्ति आजाद ने कहा कि हमारा देश धर्मनिरपेक्ष है और ट्रॉफी को मंदिर में ले जाना सही नहीं था।
क्या क्रिकेट का कोई मजहब होता है?
कीर्ति आजाद के अनुसार, क्रिकेट और खिलाड़ी का कोई मजहब नहीं होता, वे अपनी टीम के लिए खेलते हैं।
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