राजस्थान हाई कोर्ट ने रिश्वत मामले में आरएएस अधिकारी पिंकी मीणा का निलंबन रोका, साढ़े पाँच साल बाद मिली राहत

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राजस्थान हाई कोर्ट ने रिश्वत मामले में आरएएस अधिकारी पिंकी मीणा का निलंबन रोका, साढ़े पाँच साल बाद मिली राहत

सारांश

राजस्थान हाई कोर्ट ने आरएएस अधिकारी पिंकी मीणा को साढ़े पाँच साल के निलंबन के बाद अंतरिम राहत दी। जस्टिस सुदेश बंसल की पीठ ने कहा — एसीबी जाँच पूरी, चार्जशीट दाखिल, अभियोजन स्वीकृत; अब निलंबन जारी रखना दंड समान है।

मुख्य बातें

राजस्थान उच्च न्यायालय ने 21 मई 2026 को आरएएस अधिकारी पिंकी मीणा के निलंबन आदेश पर रोक लगाई।
जस्टिस सुदेश बंसल की पीठ ने कहा कि निलंबन समीक्षा समिति निलंबन जारी रखने का ठोस कारण नहीं बता सकी।
पिंकी मीणा 15 जनवरी 2021 से निलंबित हैं; उन पर ₹10 लाख रिश्वत माँगने का कथित आरोप है।
इसी मामले में अधिकारी पुष्कर मित्तल के निलंबन पर पहले ही रोक लग चुकी थी; समानता के आधार पर यह आदेश दिया गया।
एसीबी की जाँच पूर्ण, चालान दाखिल और राज्य सरकार से अभियोजन स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।
मामला दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान कथित रिश्वतखोरी से जुड़ा है।

राजस्थान उच्च न्यायालय ने 21 मई 2026 को निलंबित आरएएस अधिकारी पिंकी मीणा को अंतरिम राहत देते हुए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे परियोजना से जुड़े कथित रिश्वत मामले में उनके निलंबन आदेश पर रोक लगा दी। जस्टिस सुदेश बंसल की पीठ ने यह आदेश पारित किया और स्पष्ट किया कि निलंबन समीक्षा समिति इस निलंबन को जारी रखने का कोई ठोस कारण प्रस्तुत नहीं कर सकी।

मुख्य घटनाक्रम

पीठ ने अपने आदेश में कहा कि पिंकी मीणा 15 जनवरी 2021 से निलंबन पर हैं और करीब पाँच वर्ष बाद उनके विरुद्ध विभागीय चार्जशीट दाखिल की गई। अदालत ने समानता के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि इसी मामले में एक अन्य आरोपी अधिकारी पुष्कर मित्तल के निलंबन पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है, इसलिए पिंकी मीणा के मामले में भी वही आधार लागू होता है।

याचिकाकर्ता के वकीलों की दलीलें

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विपुल सिंघवी और आदेश अरोड़ा ने दलील दी कि सेवा विधि के अंतर्गत निलंबन केवल एक अस्थायी और एहतियाती उपाय होता है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरोपी अधिकारी जाँच को प्रभावित न कर सके। उन्होंने तर्क रखा कि साढ़े पाँच वर्ष से अधिक समय तक निलंबन पर रखना व्यावहारिक रूप से दंड देने के समान है, जो सेवा न्यायशास्त्र के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है।

वकीलों ने यह भी बताया कि एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की जाँच पूर्ण हो चुकी है, अदालत में चालान पेश किया जा चुका है और राज्य सरकार ने अभियोजन की स्वीकृति भी दे दी है। ऐसे में अधिकारी द्वारा गवाहों को प्रभावित करने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ की कोई संभावना शेष नहीं रही।

मामले की पृष्ठभूमि

यह प्रकरण जनवरी 2021 का है और राजस्थान के दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान कथित रिश्वतखोरी से जुड़ा है। एसीबी के अनुसार, एक्सप्रेसवे परियोजना के प्रतिनिधियों ने शिकायत की थी कि स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य से संबंधित बाधाएँ दूर करने के एवज में रिश्वत की माँग कर रहे थे।

13 जनवरी 2021 को एसीबी ने पिंकी मीणा को गिरफ्तार किया, जो उस समय बांदीकुई की उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) के पद पर तैनात थीं। उन पर कथित तौर पर ₹10 लाख की रिश्वत माँगने का आरोप है। उसी दौरान दौसा के एसडीएम पुष्कर मित्तल को कथित तौर पर ₹5 लाख की रिश्वत माँगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

विशेष परिस्थिति

पिंकी मीणा की गिरफ्तारी उस समय विशेष रूप से चर्चा में आई थी क्योंकि यह उनके विवाह से कुछ ही दिन पूर्व हुई थी। उच्च न्यायालय ने उन्हें विवाह की रस्मों में सम्मिलित होने के लिए अंतरिम जमानत प्रदान की थी, जिसके पश्चात उन्होंने अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था।

आगे की राह

निलंबन पर रोक के इस आदेश के बाद अब विभागीय कार्यवाही और आपराधिक मुकदमे की प्रक्रिया समानांतर रूप से जारी रहेगी। यह मामला राजस्थान में प्रशासनिक सेवाओं में भ्रष्टाचार-विरोधी कार्रवाइयों और सेवा न्यायशास्त्र के बीच संतुलन की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण नज़ीर बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे सर्वोच्च न्यायालय भी कई बार दोहरा चुका है। विडंबना यह है कि एसीबी ने जाँच पूरी कर ली, चालान दाखिल हो गया, अभियोजन स्वीकृति भी मिल गई — फिर भी निलंबन जारी रहा। यह प्रकरण राज्य सरकारों को संकेत देता है कि दीर्घकालिक निलंबन अब न्यायिक समीक्षा से बच नहीं सकते, विशेषकर जब जाँच की आवश्यकता समाप्त हो चुकी हो।
RashtraPress
22 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान हाई कोर्ट ने पिंकी मीणा के निलंबन पर रोक क्यों लगाई?
अदालत ने पाया कि निलंबन समीक्षा समिति निलंबन जारी रखने का कोई ठोस कारण नहीं बता सकी और एसीबी की जाँच पूरी हो चुकी है। साथ ही, इसी मामले में सह-आरोपी अधिकारी पुष्कर मित्तल के निलंबन पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी थी, इसलिए समानता के आधार पर यह राहत दी गई।
पिंकी मीणा पर क्या आरोप हैं और मामला कब का है?
पिंकी मीणा पर जनवरी 2021 में दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान कथित तौर पर ₹10 लाख की रिश्वत माँगने का आरोप है। एसीबी ने 13 जनवरी 2021 को उन्हें गिरफ्तार किया था, जब वह बांदीकुई की एसडीएम थीं।
इस मामले में पुष्कर मित्तल कौन हैं?
पुष्कर मित्तल उस समय दौसा के एसडीएम थे और उन्हें कथित तौर पर ₹5 लाख की रिश्वत माँगने के आरोप में उसी मामले में गिरफ्तार किया गया था। उनके निलंबन पर हाई कोर्ट पहले ही रोक लगा चुका था।
क्या एसीबी की जाँच अभी भी जारी है?
नहीं, एसीबी की जाँच पूरी हो चुकी है। अदालत में चालान दाखिल किया जा चुका है और राज्य सरकार ने अभियोजन की स्वीकृति भी दे दी है। अब मामला न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में है।
निलंबन पर रोक लगने के बाद आगे क्या होगा?
निलंबन पर रोक के बाद विभागीय कार्यवाही और आपराधिक मुकदमा समानांतर रूप से जारी रहेंगे। पिंकी मीणा को अंतरिम राहत मिली है, लेकिन उनके विरुद्ध आरोप और अभियोजन की प्रक्रिया अप्रभावित रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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