एफएओ का 'एग्रीकोला मेडल' PM मोदी को, कृषि विशेषज्ञों और किसान दंपती ने जताई प्रसन्नता

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एफएओ का 'एग्रीकोला मेडल' PM मोदी को, कृषि विशेषज्ञों और किसान दंपती ने जताई प्रसन्नता

सारांश

संयुक्त राष्ट्र के एफएओ ने PM मोदी को कृषि के सर्वोच्च सम्मान 'एग्रीकोला मेडल' से नवाजा। पद्मश्री भारत भूषण त्यागी से लेकर बिहार की 'किसान चाची' राजकुमारी देवी तक — देशभर के कृषि जगत ने इसे भारतीय किसानों और कृषि नीति की वैश्विक स्वीकृति बताया।

मुख्य बातें

एफएओ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सर्वोच्च कृषि सम्मान 'एग्रीकोला मेडल' से सम्मानित किया।
पद्मश्री भारत भूषण त्यागी ने कहा कि 2014 के बाद किसानों की आमदनी और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
मुजफ्फरपुर की 'किसान चाची' राजकुमारी देवी (पद्मश्री 2019 ) और उनके पति ('किसान श्री' 2007 ) ने भी सम्मान पर प्रसन्नता जताई।
मोटे अनाज (मिलेट्स) को वैश्विक एजेंडे पर लाने की भारत की पहल को इस पुरस्कार से जोड़कर देखा जा रहा है।
किसान चाचा-किसान चाची दंपती ने हाथ से निर्मित अचार का सफल लघु उद्योग स्थापित कर ग्रामीण उद्यमिता की मिसाल पेश की है।

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सर्वोच्च कृषि सम्मान 'एग्रीकोला मेडल' से नवाजा है। 21 मई को इस घोषणा के बाद देशभर में कृषि विशेषज्ञों, किसान संगठनों और प्रतिष्ठित कृषि हस्तियों ने इस सम्मान पर प्रसन्नता व्यक्त की है। यह पुरस्कार वैश्विक खाद्य सुरक्षा और कृषि विकास में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदान किया जाता है।

विशेषज्ञ की प्रतिक्रिया

पद्मश्री से सम्मानित कृषि विशेषज्ञ भारत भूषण त्यागी ने इस अवसर पर कहा, 'यह सम्मान देश के लिए गौरव की बात है। हम नए संकल्प के साथ आगे बढ़ेंगे, इसकी कल्पना इस सम्मान के साथ जुड़ी हुई है।' त्यागी ने आगे कहा कि मोटे अनाज को वैश्विक स्तर पर जो पहचान मिली है, उसके लिए प्रधानमंत्री मोदी को साधुवाद देना उचित है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 2014 के बाद से किसानों की आमदनी और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। त्यागी के अनुसार खाद्य सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय कृषि की पहचान — दोनों गहरे मुद्दों पर ठोस काम हुआ है, जिसका लाभ देश के आम नागरिकों को मिल रहा है।

किसान चाचा-किसान चाची की खुशी

मुजफ्फरपुर जिले के सरैया प्रखंड के आनंदपुर गाँव निवासी राजकुमारी देवी — जिन्हें पूरे देश में 'किसान चाची' के नाम से जाना जाता है — ने भी इस सम्मान पर प्रसन्नता जताई। उन्हें वर्ष 2019 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था, जबकि उनके पति को 2007 में 'किसान श्री' सम्मान प्राप्त हो चुका है।

इस दंपती ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत ने खाद्य सुरक्षा और कृषि क्षेत्र में बड़ी प्रगति की है तथा दुनिया अब भारत की कृषि नीतियों और मॉडल को मान्यता दे रही है। उनके अनुसार यह सम्मान देश के किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत है।

ग्रामीण उद्यमिता का प्रतीक

गौरतलब है कि किसान चाचा-किसान चाची की जोड़ी ने खेती-किसानी में संघर्ष करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई है। इस दंपती ने हाथ से निर्मित अचार का एक सफल लघु उद्योग स्थापित किया है, जो ग्रामीण उद्यमिता और कृषि-आधारित आजीविका का एक प्रेरक उदाहरण बन चुका है।

एग्रीकोला मेडल का महत्व

एफएओ का 'एग्रीकोला मेडल' उन व्यक्तियों या संस्थाओं को प्रदान किया जाता है जिन्होंने वैश्विक खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ कृषि और पोषण के क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया हो। भारत द्वारा मोटे अनाज (मिलेट्स) को वैश्विक एजेंडे पर लाने और अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष-2023 की पहल में अग्रणी भूमिका निभाने को इस सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पुरस्कार भारत की कृषि कूटनीति की वैश्विक स्वीकृति का प्रतीक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे जमीनी कृषि सुधारों की कसौटी पर भी परखा जाना चाहिए। भारत ने मिलेट्स को वैश्विक मंच दिया — यह सराहनीय है — परंतु किसानों की वास्तविक आमदनी, MSP की व्यापकता और कृषि ऋण माफी जैसे बुनियादी सवाल अभी भी बहस में हैं। यह सम्मान भारतीय कृषि कूटनीति की सफलता दर्शाता है, किंतु मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं पूछती कि पुरस्कार की चमक खेत तक कैसे पहुँचेगी।
RashtraPress
22 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एफएओ का 'एग्रीकोला मेडल' क्या है?
यह संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) का सर्वोच्च कृषि सम्मान है, जो वैश्विक खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ कृषि और पोषण के क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए प्रदान किया जाता है। PM मोदी को यह पुरस्कार 21 मई को प्रदान किया गया।
PM मोदी को एग्रीकोला मेडल क्यों दिया गया?
भारत द्वारा मोटे अनाज (मिलेट्स) को वैश्विक एजेंडे पर लाने और अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष-2023 की पहल में अग्रणी भूमिका, तथा खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में भारत की नीतिगत प्रगति को इस सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह भारतीय कृषि कूटनीति की वैश्विक स्वीकृति का प्रतीक है।
'किसान चाची' राजकुमारी देवी कौन हैं?
राजकुमारी देवी बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के आनंदपुर गाँव की निवासी हैं, जिन्हें देशभर में 'किसान चाची' के नाम से जाना जाता है। उन्हें वर्ष 2019 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था और उनके पति को 2007 में 'किसान श्री' सम्मान मिल चुका है।
पद्मश्री भारत भूषण त्यागी ने इस सम्मान पर क्या कहा?
त्यागी ने कहा कि यह सम्मान देश के लिए गौरव की बात है और 2014 के बाद किसानों की आमदनी व गुणवत्तापूर्ण उत्पादन में बड़ा काम हुआ है। उन्होंने मोटे अनाज को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए PM मोदी की सराहना की।
इस सम्मान का भारतीय किसानों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
किसान चाचा-किसान चाची सहित कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मान भारतीय किसानों के लिए प्रेरणास्रोत है और दुनिया अब भारत की कृषि नीतियों व मॉडल को मान्यता दे रही है। इससे भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक बाज़ार में स्वीकार्यता बढ़ने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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