अफ्रीका दिवस 2026: कीर्तिवर्धन सिंह बोले — भारत-अफ्रीका की किस्मत अटूट रूप से जुड़ी है
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने 21 मई 2026 को नई दिल्ली स्थित मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस (MP-IDSA) में आयोजित अफ्रीका दिवस 2026 स्मारक सम्मेलन को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि तेज़ी से परस्पर जुड़ती दुनिया में भारत और अफ्रीका की नियति एक-दूसरे से अविभाज्य है।
सम्मेलन में कौन-कौन शामिल हुए
इस उच्चस्तरीय कार्यक्रम में MP-IDSA के महानिदेशक, नई दिल्ली में अफ्रीकी एवं अरब राजनयिक कोर के डीन राजदूत मोहम्मद मलिकी, MP-IDSA के राजदूत सुजान आर. चिनोजी तथा अफ्रीकी महाद्वीप के अनेक उच्चायुक्त एवं राजदूत उपस्थित रहे। इस विविध राजनयिक उपस्थिति ने सम्मेलन को एक महत्त्वपूर्ण द्विपक्षीय मंच का स्वरूप दिया।
मंत्री के संबोधन की मुख्य बातें
कीर्तिवर्धन सिंह ने कहा, 'अफ्रीका दिवस अफ्रीका के लोगों की आज़ादी, एकता, मज़बूती और दृढ़ इच्छाशक्ति का उत्सव है। भारत सरकार और भारत के लोगों की ओर से मैं दिल से शुभकामनाएँ देता हूँ।' उन्होंने रेखांकित किया कि भारत और अफ्रीका उपनिवेशवाद और रंगभेद के विरुद्ध संघर्ष की एक साझी विरासत से जुड़े हैं और आज शांति, समृद्धि तथा समावेशी विकास की समान आकांक्षाओं से एकजुट हैं।
मंत्री ने यह भी कहा कि MP-IDSA ने सदैव भारत-अफ्रीका मित्रता और सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए एक अनिवार्य मंच की भूमिका निभाई है। सम्मेलन की थीम — 'एक साझा भविष्य की ओर अफ्रीका-भारत साझेदारी' — को उन्होंने समसामयिक और अत्यंत आवश्यक बताया।
चौथे भारत-अफ्रीका फोरम समिट का संदर्भ
कीर्तिवर्धन सिंह ने सम्मेलन में उल्लेख किया कि 28 से 31 मई 2026 के बीच चौथे भारत-अफ्रीका फोरम समिट (IAFS-4) की मेज़बानी भारत करने वाला था। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने पिछले माह समिट का लोगो जारी करते हुए इसकी थीम — 'ARISE: अफ्रीका-भारत रणनीतिक साझेदारी, नवाचार, दृढ़ता और समावेशी परिवर्तन के लिए' — की घोषणा की थी। गौरतलब है कि इबोला वायरस के प्रकोप के कारण यह समिट फिलहाल स्थगित कर दी गई है।
भारत-अफ्रीका साझेदारी का व्यापक संदर्भ
मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत और अफ्रीका मिलकर विश्व की एक-तिहाई से अधिक मानवता का प्रतिनिधित्व करते हैं। बढ़ते भू-राजनीतिक विभाजन और वैश्विक अनिश्चितताओं के इस दौर में, यह साझेदारी न्याय, स्थिरता और समावेशी विकास के लिए एक ज़रूरी आधार है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक दक्षिण के देश बहुध्रुवीय व्यवस्था में अपनी भूमिका को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं।
आगे की राह
IAFS-4 के स्थगन के बावजूद भारत सरकार ने संकेत दिया है कि द्विपक्षीय कूटनीतिक संवाद जारी रहेगा। इस सम्मेलन ने स्पष्ट किया कि भारत अफ्रीकी महाद्वीप के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को नई गहराई देने के लिए प्रतिबद्ध है।