भारत-अफ्रीका फोरम समिट 2026: सहयोग के नए द्वार खुलेंगे, दक्षिण अफ्रीका के उच्चायुक्त अनिल सूकलाल का बड़ा बयान
सारांश
Key Takeaways
- चौथी भारत-अफ्रीका फोरम समिट 28 से 31 मई 2026 के बीच नई दिल्ली में आयोजित होगी।
- यह समिट 2015 के बाद पहली बार हो रही है — लगभग 11 साल के अंतराल के बाद।
- भारत ने अफ्रीकी महाद्वीप को अब तक 85,000 से अधिक छात्रवृत्तियां और कौशल प्रशिक्षण अवसर प्रदान किए हैं।
- समिट में वैश्विक शासन सुधार, आतंकवाद, शिक्षा और व्यापार पर चर्चा होगी।
- दक्षिण अफ्रीका के उच्चायुक्त अनिल सूकलाल ने पुष्टि की कि दक्षिण अफ्रीका उच्च स्तरीय सरकारी और व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ समिट में भाग लेगा।
- अफ्रीका विश्व के सबसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में और भारत सबसे तेजी से बढ़ रही प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में इस साझेदारी को नई ऊंचाई देंगे।
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। चौथी भारत-अफ्रीका फोरम समिट 2026 भारत और अफ्रीकी महाद्वीप के बीच साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का ऐतिहासिक अवसर बनेगी। भारत में दक्षिण अफ्रीका के उच्चायुक्त अनिल सूकलाल ने गुरुवार को समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में यह उद्गार व्यक्त किए। यह समिट 28 से 31 मई 2026 के बीच नई दिल्ली में आयोजित होने जा रही है।
दशक भर के अंतराल के बाद ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन
अनिल सूकलाल ने कहा कि भारत और अफ्रीकी महाद्वीप के बीच सदियों पुरानी साझा विरासत और मजबूत ऐतिहासिक संबंध रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 2008 में पहली, 2011 में दूसरी और 2015 में तीसरी भारत-अफ्रीका फोरम समिट ने द्विपक्षीय सहयोग के लिए एक ठोस आधार तैयार किया था। 2015 के समिट में स्वयं सूकलाल दक्षिण अफ्रीकी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में शामिल हुए थे।
गौरतलब है कि पिछले एक दशक से यह शिखर सम्मेलन नहीं हो सका था। इसके पीछे कई कारण रहे, जिनमें कोविड-19 महामारी प्रमुख रूप से शामिल थी। अब लगभग 11 वर्षों के अंतराल के बाद यह मंच फिर से जीवंत होने जा रहा है, जो इसे और भी महत्वपूर्ण बनाता है।
समान विकास लक्ष्य और साझा चुनौतियां
उच्चायुक्त सूकलाल ने कहा कि अफ्रीका आज विश्व के सबसे तेजी से उभरते क्षेत्रों में गिना जाता है, जबकि भारत दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ रही प्रमुख अर्थव्यवस्था है। दोनों के सामने विकास की समान चुनौतियां हैं और अपनी जनता के लिए समान आकांक्षाएं भी। यह साझा दृष्टिकोण ही इस साझेदारी की असली शक्ति है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समिट में वैश्विक शासन सुधार, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, ब्रेटन वुड्स संस्थानों और विश्व व्यापार संगठन (WTO) में सुधार जैसे बहुपक्षीय मुद्दों पर गहन चर्चा होगी। साथ ही आतंकवाद जैसी साझा सुरक्षा चुनौतियों से मिलकर निपटने पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा, क्योंकि अफ्रीकी महाद्वीप भी इस खतरे से जूझ रहा है।
शिक्षा और कौशल विकास: भारत की सबसे बड़ी भूमिका
सूकलाल ने शिक्षा और कौशल विकास को इस साझेदारी का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। उन्होंने उल्लेख किया कि 2015 के तीसरे समिट में भारत ने अफ्रीका को 50,000 छात्रवृत्तियां प्रदान करने की प्रतिबद्धता जताई थी। अब तक अफ्रीकी महाद्वीप को 85,000 से अधिक छात्रवृत्तियां और कौशल प्रशिक्षण के अवसर दिए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि अफ्रीका की युवा आबादी के लिए भारत एक आदर्श शिक्षा और कौशल विकास भागीदार बन सकता है। अफ्रीकी महाद्वीप में जो विशाल संभावनाएं मौजूद हैं, उनका लाभ उठाने के लिए कुशल और प्रशिक्षित युवाशक्ति की जरूरत है — और इसमें भारत की भूमिका निर्णायक हो सकती है।
दक्षिण अफ्रीका की उच्च स्तरीय भागीदारी सुनिश्चित
समिट में दक्षिण अफ्रीका की भागीदारी के बारे में सूकलाल ने पूर्ण विश्वास के साथ कहा कि इस शिखर सम्मेलन में उच्च स्तरीय सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ-साथ एक सशक्त व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी शामिल होगा। उन्होंने इसे न केवल महाद्वीपीय और भारतीय स्तर पर, बल्कि भारत-दक्षिण अफ्रीका द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने का एक दुर्लभ अवसर बताया।
यह ध्यान देने योग्य है कि यह समिट ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक व्यापार और भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। ग्लोबल साउथ की एकजुटता और विकासशील देशों की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूत करने के संदर्भ में यह शिखर सम्मेलन एक निर्णायक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
आने वाले हफ्तों में जैसे-जैसे 28 मई 2026 नजदीक आएगा, भारत और अफ्रीका के बीच कूटनीतिक सरगर्मियां और तेज होने की उम्मीद है। इस समिट के नतीजे न केवल द्विपक्षीय संबंधों को, बल्कि वैश्विक दक्षिण की सामूहिक रणनीति को भी नई दिशा देंगे।