भारत बना दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब, 'स्टार्टअप इंडिया' से MSME को मिली ऐतिहासिक रफ्तार
सारांश
Key Takeaways
- भारत अब अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बन चुका है।
- 2016 में 'स्टार्टअप इंडिया' लॉन्च के समय देश में केवल 400 स्टार्टअप्स थे, जो अब 1.5 लाख से अधिक हो गए हैं।
- एमएसएमई सेक्टर देश में 1.1 करोड़ से अधिक रोजगार सृजित करता है और जीडीपी में लगभग 30%25 योगदान देता है।
- क्रेडिट गारंटी स्कीम, GeM पोर्टल और एनएसआईसी टेक्नोलॉजी हब्स ने स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत किया है।
- पीएचडीसीसीआई के महासचिव रणजीत मेहता ने जिला और ब्लॉक स्तर पर नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत पर जोर दिया।
- एमएसएमई क्लस्टर्स में जागरूकता अभियान और मजबूत इकोसिस्टम निर्माण से 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
नई दिल्ली, 23 अप्रैल: भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बन चुका है — और इस उपलब्धि की नींव 2016 में शुरू हुई 'स्टार्टअप इंडिया' पहल ने रखी। एमएसएमई स्टार्टअप इनोवेशन समिट के 5वें संस्करण में पीएचडीसीसीआई के महासचिव रणजीत मेहता ने यह जानकारी साझा करते हुए कहा कि देश में स्टार्टअप और एमएसएमई सेक्टर की प्रगति अभूतपूर्व रही है और सरकार की नीतियों ने इसे नई दिशा दी है।
400 से 1.5 लाख: स्टार्टअप्स की संख्या में विस्फोटक वृद्धि
रणजीत मेहता ने बताया कि जब 2016 में 'स्टार्टअप इंडिया' कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी, उस समय देश में केवल लगभग 400 स्टार्टअप्स पंजीकृत थे। आज यह संख्या बढ़कर 1.5 लाख से अधिक हो चुकी है। यह वृद्धि न केवल संख्यात्मक है, बल्कि गुणात्मक भी है — इनमें से कई स्टार्टअप्स वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बना रहे हैं।
गौरतलब है कि अमेरिका और चीन के बाद भारत अब स्टार्टअप इकोसिस्टम में विश्व में तीसरे स्थान पर है। यह उपलब्धि तब और महत्वपूर्ण हो जाती है जब हम देखते हैं कि मात्र एक दशक पहले भारत इस क्षेत्र में नगण्य था।
सरकार की नीतियां: क्रेडिट गारंटी से लेकर GeM पोर्टल तक
मेहता ने एमएसएमई और स्टार्टअप्स को मजबूत करने वाली सरकारी पहलों की विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि क्रेडिट गारंटी स्कीम ने छोटे उद्यमियों को बिना जमानत के वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई है। गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल के माध्यम से इन उद्यमों को सरकारी खरीद में भागीदारी का मौका मिला है।
इसके अलावा एनएसआईसी (NSIC) और अन्य संस्थाओं के जरिए स्थापित टेक्नोलॉजी हब्स ने स्टार्टअप्स को तकनीकी बुनियाद प्रदान की है। ये तीनों पहलें मिलकर एमएसएमई इकोसिस्टम की रीढ़ बन रही हैं।
एमएसएमई: भारतीय अर्थव्यवस्था की असली ताकत
रणजीत मेहता ने एमएसएमई सेक्टर को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ करार देते हुए कहा कि यह क्षेत्र देश में 1.1 करोड़ से अधिक रोजगार सृजित करता है। 'विकसित भारत' के लक्ष्य को 2047 तक हासिल करने के लिए इस सेक्टर का निरंतर सशक्तिकरण अनिवार्य है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एमएसएमई क्षेत्र देश की जीडीपी में लगभग 30%25 का योगदान देता है और कुल निर्यात में भी इसकी बड़ी हिस्सेदारी है। ऐसे में यह सेक्टर केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक संप्रभुता का आधार भी है।
जमीनी क्रियान्वयन की चुनौती: नीति से जमीन तक का सफर
मेहता ने एक महत्वपूर्ण बात की ओर ध्यान दिलाया — सरकार की नीतियां तभी प्रभावी होती हैं जब उन्हें जिला और ब्लॉक स्तर तक सही तरीके से लागू किया जाए। एमएसएमई केवल महानगरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये देश के छोटे-छोटे कस्बों और गांवों तक फैले हुए हैं।
उन्होंने राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन से आग्रह किया कि वे केंद्रीय योजनाओं को धरातल पर उतारने में सक्रिय भूमिका निभाएं। साथ ही एमएसएमई क्लस्टर्स में जागरूकता अभियान चलाकर उद्यमियों को उनके अधिकारों और सुविधाओं से अवगत कराया जाए।
समिट का महत्व और भविष्य की राह
एमएसएमई स्टार्टअप इनोवेशन समिट जैसे आयोजन उद्यमियों, नीति-निर्माताओं और निवेशकों को एक मंच पर लाते हैं। मेहता ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम स्टार्टअप्स को न केवल प्रेरणा देते हैं, बल्कि नेटवर्किंग और मेंटरशिप के अवसर भी प्रदान करते हैं।
आने वाले समय में भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम और अधिक परिपक्व होगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन टेक्नोलॉजी और एग्रीटेक जैसे क्षेत्रों में भारतीय स्टार्टअप्स वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यदि नीतिगत निरंतरता बनी रही और क्रियान्वयन मजबूत हुआ, तो भारत निकट भविष्य में स्टार्टअप इकोसिस्टम में विश्व के शीर्ष दो देशों में शामिल हो सकता है।