राजस्थान में DA 2%25 बढ़ा: 12.46 लाख कर्मचारी-पेंशनभोगियों को बड़ा फायदा
सारांश
Key Takeaways
- राजस्थान सरकार ने 7वें वेतन आयोग के तहत महंगाई भत्ता 58%25 से बढ़ाकर 60%25 किया।
- यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से प्रभावी है और 12.46 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिलेगा।
- 7.02 लाख कर्मचारियों को बढ़ा डीए जून 2026 में नकद मिलेगा; बकाया जीपीएफ में जमा होगा।
- 5.44 लाख पेंशनभोगियों को बढ़ी हुई महंगाई राहत 1 जनवरी 2026 से सीधे नकद मिलेगी।
- इस फैसले से राज्य के खजाने पर सालाना ₹1,156 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।
- पंचायत समितियों और जिला परिषदों के कर्मचारी भी इस बढ़ोतरी के दायरे में शामिल किए गए हैं।
जयपुर, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राजस्थान सरकार ने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के निर्देश पर राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ता (डीए) एवं महंगाई राहत (डीआर) में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी को औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के बाद 7वें वेतन आयोग के अंतर्गत डीए 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गया है। यह संशोधित दर 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएगी और इससे प्रदेशभर के 12.46 लाख से अधिक लोगों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।
किन्हें और कितना फायदा?
इस फैसले का लाभ राज्य के 7.02 लाख सरकारी कर्मचारियों और 5.44 लाख पेंशनभोगियों को मिलेगा। इसके अतिरिक्त पंचायत समितियों और जिला परिषदों के कर्मचारियों को भी इस बढ़ोतरी के दायरे में शामिल किया गया है, जिससे ग्रामीण स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों को भी राहत मिलेगी।
सरकारी आदेश के अनुसार, कर्मचारियों को संशोधित महंगाई भत्ता मई 2026 के वेतन के साथ नकद रूप में प्राप्त होगा, जिसका वास्तविक भुगतान जून 2026 में किया जाएगा। 1 जनवरी से 30 अप्रैल 2026 तक की अवधि का बकाया कर्मचारियों के जनरल प्रोविडेंट फंड (जीपीएफ) खातों में जमा होगा।
पेंशनभोगियों को यह सुविधा और अधिक तत्काल रूप में मिलेगी — उन्हें बढ़ी हुई महंगाई राहत 1 जनवरी 2026 से ही नकद रूप में देय होगी, जिससे उन्हें किसी प्रकार की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी।
राजकोष पर वित्तीय भार
यह निर्णय आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि इस बढ़ोतरी से राज्य के खजाने पर प्रतिवर्ष लगभग ₹1,156 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। राजस्थान सरकार ने वित्तीय दबाव के बावजूद कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के कल्याण को प्राथमिकता देने का स्पष्ट संकेत दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती महंगाई और घरेलू खर्चों के बोझ तले दबे सरकारी कर्मचारियों के लिए यह राहत समय पर आई है। खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में हो रही लगातार वृद्धि के बीच डीए में यह संशोधन उनकी वास्तविक क्रय शक्ति को बनाए रखने में सहायक होगा।
केंद्र सरकार के फैसले की अनुगूंज
गौरतलब है कि इससे पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भी केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए डीए में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दी थी, जिससे केंद्रीय स्तर पर भी डीए 58 प्रतिशत से 60 प्रतिशत हो गया। केंद्र के इस निर्णय से 49.19 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 68.72 लाख पेंशनभोगियों सहित कुल 1.17 करोड़ से अधिक लोगों को लाभ मिलेगा और केंद्र सरकार पर सालाना ₹6,791 करोड़ का अतिरिक्त खर्च आएगा।
राजस्थान का यह कदम उसी केंद्रीय नीति के अनुरूप है, जो यह दर्शाता है कि भाजपा शासित राज्य केंद्र के डीए संशोधन को अपनाने में तत्परता दिखा रहे हैं। अन्य राज्य सरकारें भी इसी तर्ज पर अपने-अपने कर्मचारियों के लिए डीए बढ़ाने की प्रक्रिया में हैं।
व्यापक संदर्भ और आगे की राह
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब 2026 के स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारियां जोर पकड़ रही हैं और राज्य सरकार पर सरकारी कर्मचारी संगठनों का दबाव लगातार बना हुआ था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के कल्याणकारी निर्णय सरकार की जमीनी पकड़ मजबूत करते हैं।
तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे भाजपा शासित राज्य भी केंद्र के डीए संशोधन के बाद अपने कर्मचारियों को समान लाभ देने की प्रक्रिया में हैं। राजस्थान ने इस मामले में अपेक्षाकृत शीघ्र निर्णय लेकर प्रशासनिक सक्रियता का परिचय दिया है।
आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लेकर क्या रुख अपनाती है, जिसकी रिपोर्ट केंद्र स्तर पर तैयार की जा रही है और जिसका सीधा असर राज्य कर्मचारियों के वेतनमान पर भी पड़ेगा।