ग्लोबल ब्रिज बनता भारत: दुनिया के बंटवारे में एकता की आवाज बन रहा है हिंदुस्तान

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ग्लोबल ब्रिज बनता भारत: दुनिया के बंटवारे में एकता की आवाज बन रहा है हिंदुस्तान

सारांश

इजरायली अखबार 'द टाइम्स ऑफ इजरायल' ने भारत को विभाजित दुनिया का नया ग्लोबल सेतु बताया है। 3.5 करोड़ प्रवासी भारतीय, IPL, बॉलीवुड और डिजिटल ताकत के दम पर भारत आर्थिक, सांस्कृतिक और कूटनीतिक मोर्चे पर एक साथ विश्व मंच पर छा रहा है।

Key Takeaways

  • 'द टाइम्स ऑफ इजरायल' ने भारत को विभाजित दुनिया का नया ग्लोबल सेतु और उभरता वैश्विक केंद्र बताया है।
  • भारत अफ्रीका, खाड़ी देशों और दक्षिण-पूर्व एशिया में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, दवाइयों और ऊर्जा क्षेत्र में पहली पसंद का साझेदार बन चुका है।
  • दुनियाभर में फैले 3.5 करोड़ प्रवासी भारतीय सिलिकॉन वैली, ब्रिटिश राजनीति और खाड़ी अर्थव्यवस्थाओं में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।
  • इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) एक वैश्विक व्यापारिक मंच बन चुकी है जिसमें दुनिया के बड़े निवेशक रुचि दिखाते हैं।
  • भारत का उभार आर्थिक, कूटनीतिक और सांस्कृतिक — तीनों स्तरों पर एक साथ हो रहा है, जो उसे अन्य उभरती शक्तियों से अलग बनाता है।
  • भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की नीति — किसी एक खेमे में न झुकना — आज उसकी सबसे बड़ी कूटनीतिक संपत्ति बन चुकी है।

नई दिल्ली, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। जब दुनिया भू-राजनीतिक खेमों में बंटती जा रही है, तब भारत एक अनूठी भूमिका में उभर रहा है — एक ऐसे ग्लोबल सेतु के रूप में, जो पूर्व और पश्चिम, उत्तर और दक्षिण के बीच संवाद का माध्यम बन सकता है। इजरायल के प्रतिष्ठित अखबार 'द टाइम्स ऑफ इजरायल' ने अपने एक विशेष लेख में भारत को न केवल दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था, बल्कि एक नए वैश्विक केंद्र बिंदु के रूप में रेखांकित किया है।

ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज

लेख के अनुसार, भारत आज ग्लोबल साउथ की सबसे सशक्त आवाज बन चुका है। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा परिवर्तन और सुरक्षा सहयोग जैसे अहम क्षेत्रों में भारत अफ्रीका, खाड़ी देशों और दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए पहली पसंद का साझेदार बन चुका है।

भारत की यह खासियत है कि वह एक साथ वॉशिंगटन और ब्रुसेल्स से बात कर सकता है और साथ ही नैरोबी, अबू धाबी और जकार्ता में भी अपनी विश्वसनीयता बनाए रखता है। यह संतुलन आज की दुनिया में दुर्लभ है।

सभ्यतागत पुनरुत्थान: शांत लेकिन गहरा उभार

लेख में भारत के उभार को 'सभ्यतागत पुनरुत्थान' की संज्ञा दी गई है। यह कोई अचानक हुई क्रांति नहीं, बल्कि एक धीमी लेकिन गहरी प्रक्रिया है, जिसमें 1.4 अरब भारतीय नागरिकों के साथ-साथ दुनियाभर में फैला 3.5 करोड़ का विशाल प्रवासी समुदाय शामिल है।

सिलिकॉन वैली की दिग्गज कंपनियों में भारतीय मूल के अधिकारी नीति-निर्धारण कर रहे हैं। यूनाइटेड किंगडम — जिसने कभी भारत पर शासन किया था — वहां की राजनीति में आज भारतीय मूल के नेता गहरा प्रभाव रखते हैं। खाड़ी देशों में भारतीय पेशेवर — डॉक्टरों से लेकर इंजीनियरों तक, मजदूरों से लेकर बड़े अधिकारियों तक — पूरी अर्थव्यवस्था की रीढ़ बने हुए हैं।

सांस्कृतिक विस्तार: रसोई से लेकर सिनेमा तक

भारत का यह उभार केवल आर्थिक या कूटनीतिक नहीं है — यह सांस्कृतिक भी है। दीपावली अब न्यूयॉर्क से मेलबर्न तक सार्वजनिक स्थानों को रोशन करती है। होली उन शहरों में भी मनाई जाने लगी है जिनका कभी भारत से कोई नाता नहीं था।

भारतीय व्यंजन अब 'करी हाउस' की सीमाओं को तोड़ चुके हैं। कैलिफोर्निया में डोसा ट्रक, लंदन में चाट बार और दुबई में बिरयानी चेन इस बात का प्रमाण हैं कि भारतीय स्वाद दुनिया के महानगरों में घर कर चुके हैं।

बॉलीवुड के साथ-साथ तमिल और तेलुगु सिनेमा अब वैश्विक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों दर्शकों तक पहुंच रहा है। भाषा की बाधा के बावजूद, भारतीय कहानियों की भावनात्मक गहराई दुनिया के दर्शकों को छू रही है।

क्रिकेट: भारत की सॉफ्ट पावर का सबसे बड़ा मंच

लेख में क्रिकेट को भारत के बढ़ते सांस्कृतिक प्रभाव का सबसे ठोस उदाहरण बताया गया है। औपनिवेशिक काल में आया यह खेल आज एक ग्लोबल बिजनेस बन चुका है, जिसकी दिशा और दशा भारत तय करता है।

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) अब महज एक घरेलू लीग नहीं रही। यह एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय मंच बन गई है जहां दुनिया के बड़े निवेशक, खिलाड़ी और ब्रांड्स सक्रिय भागीदारी करते हैं।

विश्लेषण: भारत की इस भूमिका के मायने

गौरतलब है कि यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध, रूस-यूक्रेन संघर्ष और मध्य-पूर्व संकट के कारण वैश्विक व्यवस्था अस्थिर है। ऐसे में भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति — जो न किसी एक खेमे में पूरी तरह झुकती है, न दूसरे से कटती है — उसे एक अनमोल मध्यस्थ की भूमिका दे रही है।

आने वाले वर्षों में भारत की यह भूमिका और मजबूत होने की संभावना है, खासकर जब G20 की अध्यक्षता के बाद भारत ने जो वैश्विक नेतृत्व क्षमता दिखाई है, वह अब स्थायी कूटनीतिक पूंजी में बदल रही है।

Point of View

तब भारत की 'न इधर, न उधर' की नीति उसे एक अपरिहार्य मध्यस्थ बना रही है। विडंबना यह है कि जिस 'गुटनिरपेक्षता' को कभी कमजोरी माना जाता था, वही आज भारत की सबसे बड़ी कूटनीतिक ताकत बन चुकी है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि भारत का असली प्रभाव सरकारी कूटनीति से नहीं, बल्कि उसके 3.5 करोड़ प्रवासियों की आर्थिक और सांस्कृतिक उपस्थिति से आता है — और यही शक्ति किसी भी सैन्य या राजनीतिक समझौते से ज्यादा टिकाऊ है।
NationPress
23/04/2026

Frequently Asked Questions

भारत को ग्लोबल सेतु क्यों कहा जा रहा है?
भारत एक साथ अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, खाड़ी देशों और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ संबंध बनाए रखता है, जो उसे विभाजित दुनिया में एक अनूठा मध्यस्थ बनाता है। 'द टाइम्स ऑफ इजरायल' ने इसी संतुलित विदेश नीति को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताया है।
दुनिया में कितने प्रवासी भारतीय हैं और वे कहां हैं?
दुनियाभर में लगभग 3.5 करोड़ प्रवासी भारतीय हैं। ये अमेरिका की टेक इंडस्ट्री, ब्रिटेन की राजनीति और खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।
IPL को ग्लोबल बिजनेस क्यों कहा जा रहा है?
इंडियन प्रीमियर लीग अब केवल भारत की क्रिकेट लीग नहीं रही — इसमें दुनिया के बड़े निवेशक, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी और वैश्विक ब्रांड सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। भारत ने क्रिकेट को एक वैश्विक व्यापारिक मंच में बदल दिया है।
भारत ग्लोबल साउथ की आवाज कैसे बना?
भारत ने G20 अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी देशों को स्थायी सदस्यता दिलाई और विकासशील देशों के मुद्दों को वैश्विक एजेंडे में शामिल कराया। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, दवाइयों और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग ने उसे विकासशील देशों का भरोसेमंद साझेदार बनाया।
भारत की सांस्कृतिक शक्ति दुनिया में कैसे फैल रही है?
दीपावली और होली अब न्यूयॉर्क से मेलबर्न तक मनाई जाती हैं, भारतीय खाना दुनिया के बड़े शहरों में लोकप्रिय है और बॉलीवुड-साउथ सिनेमा वैश्विक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर धूम मचा रहा है। भाषा की बाधा के बावजूद भारतीय कहानियां दुनिया से जुड़ रही हैं।
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