ऐतिहासिक मतदान: बंगाल में 91.78% और तमिलनाडु में 84.69% वोटिंग, महिलाएं सबसे आगे
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 23 अप्रैल 2026 — भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने गुरुवार को घोषणा की कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में मतदाताओं की भागीदारी ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। दोनों राज्यों में महिला मतदाताओं ने पुरुषों से अधिक संख्या में वोट डालकर लोकतंत्र की नई इबारत लिखी। यह आजादी के बाद से भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
तमिलनाडु में टूटा दशकों पुराना रिकॉर्ड
तमिलनाडु में शाम 5 बजे तक 84.69 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। यह 2011 के विधानसभा चुनावों में दर्ज 78.29 प्रतिशत के पिछले सर्वोच्च आंकड़े को पार कर गया।
लिंग-आधारित आंकड़े और भी उत्साहजनक रहे। महिला मतदाताओं की भागीदारी 85.76 प्रतिशत रही, जबकि पुरुष मतदाताओं की भागीदारी 83.57 प्रतिशत दर्ज हुई। यह अंतर महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक जागरूकता और सशक्तिकरण का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो 2021 के विधानसभा चुनावों में मतदान प्रतिशत 73.63 था और 2024 के लोकसभा चुनावों में यह घटकर 70.14 प्रतिशत रह गया था। इस पृष्ठभूमि में 2026 का आंकड़ा एक असाधारण उछाल को दर्शाता है।
तमिलनाडु में 234 विधानसभा सीटों के लिए 5.7 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने भाग लिया। ऐतिहासिक रूप से इस राज्य में 1950-60 के दशकों में मतदान का स्तर मध्यम था, लेकिन 20वीं सदी के अंत से इसमें सुधार आता रहा। 2026 के आंकड़े इस यात्रा की सबसे ऊंची चोटी हैं।
पश्चिम बंगाल में 91.78% — देश में सर्वाधिक
पश्चिम बंगाल के पहले चरण में शाम 5 बजे तक 91.78 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ, जो 2011 के 84.72 प्रतिशत के पिछले रिकॉर्ड को काफी पीछे छोड़ देता है।
यहां भी महिला मतदाताओं ने 92.69 प्रतिशत भागीदारी के साथ बाजी मारी, जबकि पुरुष मतदाताओं का प्रतिशत 90.92 रहा। पश्चिम बंगाल पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर उच्च मतदान प्रतिशत वाले राज्यों में गिना जाता है। 1980 और 1990 के दशकों में यह राज्य 80 प्रतिशत का आंकड़ा पार कर चुका था।
इस चरण में 152 विधानसभा सीटों पर लगभग 3.6 करोड़ मतदाताओं ने वोट डाले। 2026 का यह आंकड़ा न केवल निरंतरता बल्कि मतदाताओं के असाधारण उत्साह को भी दर्शाता है।
चुनाव आयोग की तकनीकी और प्रशासनिक तैयारी
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी ने पोलिंग स्टेशनों की 100 प्रतिशत लाइव वेबकास्टिंग के जरिए रियल-टाइम निगरानी की। यह पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
ईसीआईएनईटी प्लेटफॉर्म के माध्यम से पीठासीन अधिकारियों ने मतदान समाप्त होते ही डेटा तत्काल अपलोड किया, जिससे रिपोर्टिंग में देरी न्यूनतम हुई। दोनों राज्यों में 9.33 करोड़ से अधिक मतदाताओं के लिए 1.19 लाख से अधिक मतदान केंद्र स्थापित किए गए और लगभग 6 लाख मतदान कर्मी तैनात रहे।
गुजरात और महाराष्ट्र में उपचुनाव — तुलनात्मक तस्वीर
गुजरात और महाराष्ट्र में हुए उपचुनावों में मतदान अपेक्षाकृत कम रहा। गुजरात के उमरेठ में 59.03 प्रतिशत, महाराष्ट्र के बारामती में 57.48 प्रतिशत और राहुरी में 55.31 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि उपचुनावों में मतदाताओं की रुचि विधानसभा चुनावों की तुलना में कम होती है।
महिला मतदाताओं की भागीदारी — एक राष्ट्रीय प्रवृत्ति
दोनों बड़े राज्यों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से अधिक रहना कोई संयोग नहीं है। ECI के आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक दशक में देशभर में महिला मतदाताओं की सक्रियता लगातार बढ़ी है। इसके पीछे महिला-केंद्रित योजनाओं, शिक्षा में सुधार और सामाजिक जागरूकता अभियानों की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है।
यह उल्लेखनीय है कि ये प्रारंभिक आंकड़े हैं और इनमें सर्विस वोटरों तथा पोस्टल बैलेट को अभी शामिल नहीं किया गया है। अंतिम आंकड़े आने के बाद यह प्रतिशत और बढ़ सकता है।
अब सभी की नजरें मतगणना की तारीख और दोनों राज्यों में सरकार गठन की प्रक्रिया पर टिकी हैं। इस रिकॉर्ड मतदान ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत का लोकतंत्र न केवल जीवित है, बल्कि हर चुनाव के साथ और अधिक परिपक्व और समावेशी होता जा रहा है।