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स्वच्छता अभियान: सेना की 'स्पीयरहेड डिवीजन' ने अरुणाचल की सीमावर्ती घाटियों में चलाया बड़ा अभियान

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स्वच्छता अभियान: सेना की 'स्पीयरहेड डिवीजन' ने अरुणाचल की सीमावर्ती घाटियों में चलाया बड़ा अभियान

सारांश

भारतीय सेना की स्पीयरहेड डिवीजन ने अरुणाचल की सियोम, सुबनसिरी और सियांग घाटियों में बड़ा स्वच्छता अभियान चलाया। मिजोरम में असम राइफल्स ने दिव्यांग छात्रों से राज्यपाल का संवाद कराया। सेना की यह नागरिक आउटरीच पहल सीमावर्ती क्षेत्रों में सामाजिक सद्भाव को मजबूत कर रही है।

मुख्य बातें

स्पीयर कोर की स्पीयरहेड डिवीजन ने 23 अप्रैल को अरुणाचल प्रदेश की सियोम, सुबनसिरी और सियांग घाटियों में व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया।
अभियान की थीम 'स्वच्छ परिवेश, सशक्त समुदाय' रखी गई, जिसमें स्वास्थ्य, स्वच्छता और नागरिक गौरव पर जोर दिया गया।
रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि स्थानीय समुदाय ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर सामूहिक जिम्मेदारी की भावना का परिचय दिया।
मिजोरम में असम राइफल्स ने शालोम स्पेशल स्कूल के सेरछिप जिले के 18 दिव्यांग छात्रों और 5 शिक्षकों के लिए शैक्षिक भ्रमण आयोजित किया।
मिजोरम के राज्यपाल जनरल विजय कुमार सिंह (सेवानिवृत्त) ने आइजोल के लोक भवन में दिव्यांग छात्रों से संवाद कर उन्हें अपने सपने पूरे करने के लिए प्रोत्साहित किया।
असम राइफल्स नागरिक-सैन्य संबंधों को मजबूत करने और पूर्वोत्तर के समाज के समग्र विकास में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।

ईटानगर/आइजोल, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय सेना की स्पीयर कोर की स्पीयरहेड डिवीजन ने अरुणाचल प्रदेश की सियोम, सुबनसिरी और सियांग घाटियों में नागरिक आउटरीच कार्यक्रम के तहत व्यापक स्वच्छता अभियान का सफलतापूर्वक संचालन किया। यह अभियान पर्यावरण संरक्षण और सुदूर सीमावर्ती क्षेत्रों में बसे समुदायों के कल्याण के प्रति सेना की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है। रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने इस अभियान की जानकारी देते हुए कहा कि स्थानीय निवासियों की सक्रिय भागीदारी इसे और अधिक सार्थक बनाती है।

अभियान की थीम और उद्देश्य

इस स्वच्छता अभियान को 'स्वच्छ परिवेश, सशक्त समुदाय' की थीम पर आधारित किया गया था। अभियान का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य, स्वच्छता और नागरिक गौरव की भावना को बढ़ावा देना था। लेफ्टिनेंट कर्नल रावत ने बताया कि स्वच्छ सार्वजनिक स्थानों का महत्व केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समुदाय के समग्र स्वास्थ्य और आत्मसम्मान से भी जुड़ा हुआ है।

अभियान के दौरान आयोजित जागरूकता सत्रों में स्थानीय निवासियों को पर्यावरण अनुकूल आदतें अपनाने और एक स्वस्थ व स्वच्छ वातावरण के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया। यह सत्र सेना और स्थानीय समाज के बीच संवाद का एक प्रभावी माध्यम बने।

सामुदायिक भागीदारी और सेना-नागरिक संबंध

इस अभियान में स्थानीय समुदाय के लोगों ने पूरे जोश और उत्साह के साथ हिस्सा लिया। रक्षा प्रवक्ता ने कहा कि यह भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों में अपने परिवेश को स्वच्छ रखने और क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को बचाए रखने की गहरी साझा जिम्मेदारी की भावना है।

अभियान की व्यापक सराहना ने सेना और आम नागरिकों के बीच के भावनात्मक और सामाजिक बंधन को और मजबूती दी। लेफ्टिनेंट कर्नल रावत ने स्पष्ट किया कि स्वच्छता केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक सामूहिक कर्तव्य है जो सामुदायिक एकता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करता है।

मिजोरम में असम राइफल्स की दिव्यांग छात्रों से संवाद पहल

मिजोरम में असम राइफल्स ने समावेशिता और सामाजिक सरोकार की दिशा में एक सराहनीय कदम उठाते हुए शालोम स्पेशल स्कूल के दिव्यांग छात्रों के साथ एक विशेष संवाद सत्र का आयोजन किया। गुरुवार को आइजोल स्थित लोक भवन में सेरछिप जिले के विशेष रूप से सक्षम छात्रों से मिजोरम के राज्यपाल जनरल विजय कुमार सिंह (सेवानिवृत्त) ने सीधे संवाद किया।

यह संवाद सत्र असम राइफल्स द्वारा आयोजित शैक्षिक भ्रमण कार्यक्रम का हिस्सा था, जिसमें सेरछिप जिले के 18 छात्र और पांच शिक्षक शामिल हुए। राज्यपाल जनरल विजय कुमार सिंह ने छात्रों के उत्साह की भूरि-भूरि प्रशंसा की और उन्हें आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रोत्साहित किया।

व्यापक संदर्भ: सेना का सामाजिक दायित्व

यह उल्लेखनीय है कि भारतीय सेना और अर्धसैनिक बल पूर्वोत्तर भारत में केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे दशकों से सामाजिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। अरुणाचल प्रदेश जैसे दुर्गम सीमावर्ती राज्यों में जहां सरकारी सेवाओं की पहुंच सीमित होती है, वहां सेना की यह नागरिक आउटरीच गतिविधियां स्थानीय जनता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वोत्तर में सेना की यह सामाजिक भूमिका नागरिक-सैन्य संबंधों को सुदृढ़ करने के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता की भावना को भी प्रगाढ़ करती है। आने वाले समय में इस तरह के अभियानों का विस्तार और अधिक सुदूर क्षेत्रों तक किए जाने की संभावना है, जो इन इलाकों के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो स्थानीय जनता का भरोसा जीतना उतना ही जरूरी है जितना सीमा पर तैनाती। मिजोरम में दिव्यांग बच्चों के साथ राज्यपाल का संवाद बताता है कि सेना समाज के सबसे कमजोर वर्गों तक भी पहुंच रही है — यह 'सॉफ्ट पावर' की असली ताकत है। मुख्यधारा की मीडिया इन खबरों को अक्सर नजरअंदाज करती है, लेकिन यही वो काम है जो राष्ट्र निर्माण की नींव रखता है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरुणाचल प्रदेश में सेना का स्वच्छता अभियान किन घाटियों में चला?
सेना की स्पीयरहेड डिवीजन ने अरुणाचल प्रदेश की सियोम, सुबनसिरी और सियांग घाटियों में स्वच्छता अभियान चलाया। यह अभियान 'स्वच्छ परिवेश, सशक्त समुदाय' थीम पर आधारित था।
स्पीयरहेड डिवीजन का यह अभियान क्यों महत्वपूर्ण है?
यह अभियान पर्यावरण संरक्षण और सुदूर सीमावर्ती क्षेत्रों के समुदायों की भलाई के प्रति सेना की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे सेना और स्थानीय नागरिकों के बीच का बंधन और मजबूत होता है।
मिजोरम में असम राइफल्स ने दिव्यांग छात्रों के लिए क्या किया?
असम राइफल्स ने सेरछिप जिले के 18 दिव्यांग छात्रों और 5 शिक्षकों के लिए शैक्षिक भ्रमण आयोजित किया। आइजोल के लोक भवन में राज्यपाल जनरल विजय कुमार सिंह ने इन छात्रों से संवाद किया।
सेना की नागरिक आउटरीच पहल का पूर्वोत्तर में क्या महत्व है?
पूर्वोत्तर के दुर्गम इलाकों में जहां सरकारी सेवाएं सीमित हैं, वहां सेना की सामाजिक पहल नागरिक-सैन्य संबंधों को मजबूत करती है। यह राष्ट्रीय एकता और सामाजिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
स्वच्छता अभियान में स्थानीय लोगों की क्या भूमिका रही?
स्थानीय निवासियों ने इस अभियान में पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। जागरूकता सत्रों के माध्यम से उन्हें पर्यावरण अनुकूल आदतें अपनाने और स्वच्छ वातावरण बनाने के लिए प्रेरित किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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