बंगाल पहले चरण में रिकॉर्ड वोटिंग: अधीर रंजन बोले — 'यह सत्ता विरोधी लहर है'
सारांश
Key Takeaways
- पश्चिम बंगाल के पहले चरण में ऐतिहासिक 91 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो पिछले चुनावों से काफी अधिक है।
- बहरामपुर से कांग्रेस उम्मीदवार अधीर रंजन चौधरी ने इसे सत्ता विरोधी लहर करार दिया और महिला मतदाताओं की भारी भागीदारी को रेखांकित किया।
- एसआईआर प्रक्रिया को लेकर मतदाताओं में फैले भय को विपक्षी नेताओं ने उच्च मतदान की प्रमुख वजह बताया।
- तमिलनाडु में पहले चरण में 84 प्रतिशत मतदान हुआ; सपा नेता रविदास मेहरोत्रा ने इसे भी एसआईआर विरोध का संकेत माना।
- टीएमसी उम्मीदवार अब्दुर रहीम बख्शी ने दावा किया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में बंगाल की जनता ने केंद्र सरकार के खिलाफ एकजुट होकर मतदान किया।
- श्रीरामपुर से कांग्रेस उम्मीदवार शुभंकर सरकार ने टीएमसी और भाजपा पर द्विध्रुवीय राजनीति के जरिए माहौल बनाने का आरोप लगाया।
मुर्शिदाबाद, 23 अप्रैल 2026 — पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में ऐतिहासिक मतदान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। बहरामपुर सीट से कांग्रेस उम्मीदवार अधीर रंजन चौधरी ने इस बंपर वोटिंग को सत्ता विरोधी लहर करार दिया। उन्होंने कहा कि मतदान केंद्रों पर महिला मतदाताओं की असाधारण उपस्थिति ने स्पष्ट संकेत दिया कि जनता बदलाव चाहती है।
अधीर रंजन का बड़ा बयान — 'महिलाएं बदलाव की वाहक बनीं'
अधीर रंजन चौधरी ने कहा, "सुबह जब मैं घर से बाहर निकला तो मतदान केंद्रों के बाहर लंबी-लंबी कतारें देख हैरान रह गया। इन कतारों में महिला मतदाताओं की तादाद बेहद प्रभावशाली थी। मुझे तत्काल महसूस हुआ कि यह मौजूदा सत्ता के विरुद्ध एक सुनियोजित जनभावना है।"
उन्होंने एसआईआर (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को भी बड़े मतदान की एक अहम वजह बताया। चौधरी के अनुसार, लोगों के मन में यह डर घर कर गया था कि यदि उन्होंने मतदान नहीं किया तो उन्हें उनके लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित किया जा सकता है। इस भय ने भी मतदाताओं को केंद्रों तक खींचने में भूमिका निभाई।
उन्होंने हुमायूं कबीर पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें "मानसिक रूप से अस्थिर" करार दिया, हालांकि उन्होंने इस टिप्पणी का विस्तार नहीं किया।
कांग्रेस उम्मीदवार शुभंकर सरकार का आकलन
श्रीरामपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार शुभंकर सरकार ने पहले चरण में मतदान करने वाले सभी नागरिकों को बधाई दी। उन्होंने माना कि कुछ स्थानों पर छिटपुट घटनाएं हुईं, लेकिन समग्र चुनाव प्रक्रिया संपन्न हुई।
सरकार ने टीएमसी और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों दलों ने जान-बूझकर यह माहौल बनाया कि केवल उन्हीं का प्रचार अभियान सबसे प्रभावी रहा, जबकि जमीनी आंकड़े एक अलग तस्वीर पेश करते हैं।
सपा नेता ने एसआईआर को बताया जनाक्रोश की वजह
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लगभग 91 प्रतिशत और तमिलनाडु में करीब 84 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। उन्होंने इसे भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत से लागू की गई एसआईआर नीति के विरुद्ध जनता के प्रतिरोध का प्रतीक बताया।
गौरतलब है कि एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने पहले से ही आरोप लगाए थे कि इसके जरिए अल्पसंख्यक और गरीब मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं। इस आशंका ने मतदाताओं को अपना नाम सुरक्षित रखने के लिए मतदान केंद्रों तक आने के लिए प्रेरित किया।
टीएमसी उम्मीदवार बोले — 'बंगाल ने केंद्र को जवाब दिया'
मालताइपुर विधानसभा क्षेत्र से टीएमसी उम्मीदवार अब्दुर रहीम बख्शी ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एसआईआर का खुलकर विरोध किया और मोदी सरकार के सामने आंखें मिलाकर लड़ाई लड़ी। उनका दावा है कि बंगाल की जनता एकजुट होकर केंद्र सरकार की नीतियों के विरुद्ध मतदान करने उमड़ी।
यह बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि 2021 के विधानसभा चुनावों में भी टीएमसी ने केंद्र बनाम राज्य के इसी आख्यान पर बड़ी जीत हासिल की थी। 2026 के चुनावों में भी वही रणनीति दोहराई जाती दिख रही है।
विश्लेषण — बंपर मतदान किसके लिए शुभ संकेत?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 91 प्रतिशत मतदान ऐतिहासिक दृष्टि से असाधारण है। 2021 के बंगाल चुनावों में पहले चरण का मतदान प्रतिशत इससे कम था। उच्च मतदान आमतौर पर सत्ता विरोधी भावना का सूचक माना जाता है, लेकिन इसे किसी एक दल के पक्ष में मान लेना जल्दबाजी होगी।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि एसआईआर विवाद ने चुनाव से पहले ही राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में संज्ञान लिया था। ऐसे में यह मतदान केवल स्थानीय राजनीति का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर जनता के भरोसे का भी परीक्षण है।
आने वाले चरणों में मतदान के आंकड़े और मतगणना के नतीजे यह तय करेंगे कि यह लहर किस दिशा में बह रही है। सभी दलों की नजरें अब अगले चरणों पर टिकी हैं।