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बड़ा फैसला: SAF-मिश्रित जेट ईंधन को मंजूरी, सरकार ने जारी की अधिसूचना

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बड़ा फैसला: SAF-मिश्रित जेट ईंधन को मंजूरी, सरकार ने जारी की अधिसूचना

सारांश

पेट्रोलियम मंत्रालय ने 17 अप्रैल को SAF मिश्रित ATF को कानूनी मान्यता देने वाली अधिसूचना जारी की। भारत ने 2027 में 1%, 2028 में 2% और 2030 में 5% SAF मिश्रण का लक्ष्य रखा है। यह कदम CORSIA की अनिवार्य जरूरतों और वैश्विक हरित विमानन मानकों के अनुरूप है।

मुख्य बातें

पेट्रोलियम मंत्रालय ने 17 अप्रैल 2025 को SAF मिश्रित ATF को कानूनी मान्यता देने वाली अधिसूचना जारी की।
ATF (मार्केटिंग रेगुलेशन) ऑर्डर, 2001 में संशोधन कर SAF को ATF की परिभाषा में शामिल किया गया।
भारत ने 2027 में 1%, 2028 में 2% और 2030 में 5% SAF मिश्रण का सांकेतिक लक्ष्य तय किया है।
CORSIA का अनिवार्य चरण 2027 से लागू होगा, जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को उत्सर्जन की भरपाई करनी होगी।
EU में 2050 तक 70% , UK में 2040 तक 22% और जापान में 2030 तक 10% SAF मिश्रण अनिवार्य है।
SAF फसलों, जैविक अवशेषों और अपशिष्ट पदार्थों से बनता है और ASTM व ICAO मानकों पर खरा उतरता है।

नई दिल्ली, 23 अप्रैल 2025पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) मिश्रित एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के उपयोग को कानूनी मान्यता देने वाली अधिसूचना जारी कर दी है। 17 अप्रैल 2025 को जारी इस अधिसूचना का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाओं से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना और भारत को वैश्विक हरित ईंधन परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ाना है।

क्या है यह अधिसूचना और इसमें क्या बदला?

मंत्रालय ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (मार्केटिंग रेगुलेशन) ऑर्डर, 2001 में संशोधन करते हुए SAF को ATF की परिभाषा के दायरे में शामिल किया है। पहले ATF को केवल BIS विनिर्देशों के अनुरूप पेट्रोलियम-आधारित ईंधन के रूप में परिभाषित किया गया था।

अब संशोधित परिभाषा में दो श्रेणियां जोड़ी गई हैं — पहली, पेट्रोलियम रिफाइनरियों में IS 1571 के अनुसार ATF के साथ सह-संसाधित SAF; और दूसरी, IS 17081 के अनुरूप SAF जिसे IS 1571 को पूरा करने वाले ATF के साथ मिश्रित किया गया हो। यह एक प्रशासनिक उपाय है जो SAF को ATF नियंत्रण आदेश के दायरे में लाता है।

SAF क्या है और यह क्यों जरूरी है?

सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) एक नवीकरणीय ईंधन है जो फसलों, जैविक अवशेषों, अपशिष्ट पदार्थों और अन्य वैकल्पिक स्रोतों से तैयार किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) द्वारा मान्यता प्राप्त यह ईंधन पारंपरिक जेट ईंधन की तुलना में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी करता है।

SAF रासायनिक रूप से ATF के समान होता है और विमान इंजनों के साथ पूरी तरह संगत है। इसे विमानन उपयोग में शामिल करने से पहले ASTM इंटरनेशनल के कठोर परीक्षण मानकों से गुजरना पड़ता है, जिससे इसकी सुरक्षा और प्रदर्शन सुनिश्चित होता है।

CORSIA और भारत के मिश्रण लक्ष्य

ICAO अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए CORSIA (Carbon Offsetting and Reduction Scheme for International Aviation) लागू कर रहा है। इसका अनिवार्य चरण 2027 से शुरू होगा, जिसके तहत एयरलाइनों को एक निर्धारित सीमा से अधिक उत्सर्जन की भरपाई करनी होगी।

इस वैश्विक दबाव को देखते हुए भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए SAF मिश्रण के सांकेतिक लक्ष्य पहले ही घोषित कर दिए हैं — 2027 में 1 प्रतिशत, 2028 में 2 प्रतिशत और 2030 में 5 प्रतिशत। ATF नियंत्रण आदेश में यह संशोधन इन्हीं लक्ष्यों को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम है।

वैश्विक परिदृश्य: भारत कहां खड़ा है?

दुनियाभर में SAF को अपनाने की होड़ तेज हो चुकी है। यूरोपीय संघ में SAF मिश्रण का अनिवार्य नियम 2025 में 2%, 2030 में 6% और 2050 तक 70% तक है। यूनाइटेड किंगडम में यह 2025 में 2%, 2030 में 10% और 2040 में 22% है।

जापान ने 2030 तक 10% और सिंगापुर ने 2026 से 1% और 2030 तक 3-5% SAF उपयोग का लक्ष्य रखा है। संयुक्त राज्य अमेरिका उत्पादन प्रोत्साहन के जरिए SAF को बढ़ावा दे रहा है। इस तुलनात्मक नजरिए से भारत के लक्ष्य अभी भी रूढ़िवादी हैं, लेकिन यह अधिसूचना एक ठोस शुरुआत है।

भारत की हरित ऊर्जा प्रतिबद्धता और आगे की राह

मंत्रालय के बयान के अनुसार, भारत कार्बन उत्सर्जन घटाने, SAF जैसे टिकाऊ ईंधन को प्रोत्साहित करने, घरेलू उत्पादन क्षमता मजबूत करने और वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र में देश को एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने पर केंद्रित है।

यह संशोधन भारत को SAF की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए भी जरूरी था। गौरतलब है कि CORSIA के तहत योग्य SAF को न केवल BIS के गुणवत्ता मानकों बल्कि CORSIA के स्थिरता मानदंडों को भी पूरा करना होगा।

आने वाले वर्षों में जैसे-जैसे CORSIA का अनिवार्य चरण निकट आएगा, भारतीय एयरलाइनों पर SAF अपनाने का दबाव बढ़ेगा। घरेलू SAF उत्पादन क्षमता विकसित करना अब भारत की ऊर्जा नीति की प्राथमिकता बन चुकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह भारत के उस बड़े भू-राजनीतिक दबाव का जवाब है जो CORSIA के जरिए 2027 से अनिवार्य होने वाला है। विडंबना यह है कि भारत के SAF मिश्रण लक्ष्य — 2030 तक मात्र 5% — यूरोपीय संघ के 6% और यूके के 10% से अभी भी पीछे हैं, जबकि भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में से एक है। असली सवाल यह है कि घरेलू SAF उत्पादन क्षमता के बिना ये लक्ष्य केवल आयात पर निर्भरता बढ़ाएंगे — जो ऊर्जा सुरक्षा के नजरिए से चिंताजनक है। सरकार को अधिसूचना से आगे जाकर घरेलू SAF उत्पादन को प्रोत्साहित करने वाली ठोस नीति बनानी होगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SAF मिश्रित जेट ईंधन क्या होता है?
SAF यानी सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल एक नवीकरणीय ईंधन है जो फसलों, जैविक अवशेषों और अपशिष्ट पदार्थों से बनाया जाता है। इसे पारंपरिक एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के साथ मिलाकर विमानों में इस्तेमाल किया जाता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आती है।
भारत सरकार ने SAF के लिए क्या अधिसूचना जारी की है?
पेट्रोलियम मंत्रालय ने 17 अप्रैल 2025 को ATF (मार्केटिंग रेगुलेशन) ऑर्डर, 2001 में संशोधन करते हुए SAF मिश्रित ATF को कानूनी दायरे में शामिल किया है। यह संशोधन SAF को ATF नियंत्रण आदेश के तहत मान्यता देता है।
भारत का SAF मिश्रण लक्ष्य क्या है?
भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए 2027 में 1%, 2028 में 2% और 2030 में 5% SAF मिश्रण का सांकेतिक लक्ष्य निर्धारित किया है। ये लक्ष्य CORSIA की अनिवार्य जरूरतों के अनुरूप हैं।
CORSIA क्या है और यह भारत को कैसे प्रभावित करता है?
CORSIA (Carbon Offsetting and Reduction Scheme for International Aviation) ICAO की एक अंतरराष्ट्रीय योजना है जो 2027 से अनिवार्य रूप से लागू होगी। इसके तहत भारतीय एयरलाइनों को एक निर्धारित सीमा से अधिक उत्सर्जन की भरपाई करनी होगी, जिसमें SAF का उपयोग सहायक होगा।
क्या SAF विमान इंजनों के लिए सुरक्षित है?
हां, SAF रासायनिक रूप से ATF के समान होता है और विमान इंजनों के साथ पूरी तरह संगत है। इसे ASTM इंटरनेशनल के कठोर परीक्षण मानकों और ICAO की मान्यता प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही विमानन उपयोग के लिए स्वीकृत किया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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