बलूचिस्तान के अवारन में पाकिस्तानी सेना ने बुलडोजर चलाया, मानवाधिकार संस्था पांक ने की कड़ी निंदा
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तानी सेना ने 13 मई 2026 को बलूचिस्तान के अवारन जिले के पीर मशकाई, कल्लर इलाके में सैन्य अभियान के दौरान आम नागरिकों के घरों पर बुलडोजर चला दिया। बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग पांक ने 21 मई को इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे सामूहिक दंड की नीति का हिस्सा बताया।
मुख्य घटनाक्रम
पांक के अनुसार, जिन घरों को ध्वस्त किया गया वे नियाज बलूच और हुजूर बख्श बलूच के थे। संस्था ने बताया कि इससे पहले पाकिस्तानी सेना ने 28 फरवरी 2025 को नियाज बलूच के दो बेटों — जहीर नियाज और मेहराज नियाज — को जबरन गायब कर दिया था। बाद में मेहराज नियाज की प्रताड़ना के निशान वाली क्षत-विक्षत लाश 3 मार्च 2025 को मिली, जबकि जहीर नियाज 26 मार्च 2025 को मृत पाया गया।
पांक ने कहा, 'यह घटना बलूचिस्तान में चल रही सामूहिक दंडात्मक नीति को उजागर करती है, जहाँ पूरे परिवारों को जबरन गायब करना, न्यायेतर हत्या, उत्पीड़न और संपत्ति को नुकसान पहुँचाना जारी है।'
नए जबरन गुमशुदगी के मामले
उसी दिन पांक ने दो और नागरिकों के अपहरण की जानकारी दी। 27 वर्षीय छात्र हलीम बलूच को 17 मई को हब चौकी से उस समय उठाया गया जब पाकिस्तान के काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD), रेंजर्स और सैन्य खुफिया विभाग के कर्मियों ने सुबह-सुबह छापा मारा। इसके अलावा, संयुक्त अरब अमीरात में ड्राइवर के तौर पर कार्यरत 33 वर्षीय किय्या बलूच को कथित तौर पर 23 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान के फ्रंटियर कॉर्प्स के जवान घर से उठा ले गए।
बुजुर्ग नागरिक की मौत
एक अलग घटना में, केच जिले के ड्राचकोह इलाके में मंगलवार को पाकिस्तानी सैन्य बलों की कथित फायरिंग में एक बुजुर्ग व्यक्ति की जान चली गई। स्थानीय सूत्रों के हवाले से बताया गया कि मारे गए व्यक्ति का नाम शेर दिल था।
अंतरराष्ट्रीय अपील
पांक ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से इन घटनाओं पर तत्काल संज्ञान लेने और दोषियों को जवाबदेह ठहराने की माँग की है। संस्था ने चेताया कि बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी का यह सिलसिला लगातार जारी है, जिसमें लोगों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के उठाया जाता है और परिवार भय व अनिश्चितता में जीने को मजबूर होते हैं।
व्यापक संदर्भ
बलूचिस्तान में नागरिकों के खिलाफ कथित सैन्य कार्रवाइयों की रिपोर्टें लंबे समय से आती रही हैं। मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि यह क्षेत्र न्यायेतर हत्याओं, जबरन गुमशुदगी और सामूहिक दंड की नीति का केंद्र बना हुआ है। पाकिस्तान सरकार इन आरोपों को आमतौर पर नकारती रही है और सैन्य अभियानों को आतंकवाद-रोधी कार्रवाई बताती है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है।