क्या पाकिस्तान में बलोच नागरिकों को जबरन गायब किया जा रहा है?
सारांश
Key Takeaways
- 18 बलोच नागरिकों के गायब होने की घटना बलूचिस्तान में मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
- सुरक्षा बलों द्वारा लक्षित छापे और दमन की नीति को दर्शाते हैं।
- बीवाईसी ने सभी गायब व्यक्तियों की सुरक्षित रिहाई की मांग की है।
क्वेटा, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में पिछले दो हफ्तों में पाकिस्तानी सशस्त्र बलों द्वारा छापों के दौरान कम से कम 18 बलोच नागरिकों के जबरन गायब होने का आरोप लगाया गया है। यह जानकारी बलोच यकजहती कमेटी (बीवाईसी) ने एक बयान में दी है।
बीवाईसी के अनुसार, केच जिले के होथाबाद क्षेत्र से 11 व्यक्तियों और ग्वादर जिले के पनवान जिवानी क्षेत्र से 7 व्यक्तियों को गायब किया गया। इस संगठन ने कहा कि ये घटनाएं घरों में छापेमारी और लक्षित अभियानों के माध्यम से हुईं, जो बलूचिस्तान के निवासियों के खिलाफ एक सुनियोजित दंडात्मक नीति को दर्शाती हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बीवाईसी ने कहा, “पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने पिछले दो हफ्तों में कम से कम 18 बलोच नागरिकों को जबरन गायब किया है- केच के होथाबाद से 11 और ग्वादर के पनवान जिवानी से 7। ये घटनाएं समन्वित छापों और लक्षित कार्रवाइयों के तहत हुईं, जो बलूच राष्ट्र के खिलाफ सामूहिक दमन के स्पष्ट पैटर्न को दर्शाती हैं।”
बीवाईसी ने बताया कि 7 जनवरी 2026 को दोपहर करीब 12 बजे सुरक्षा बलों ने केच के होथाबाद क्षेत्र में सैन्य छापेमारी की और 11 व्यक्तियों को उनके घरों से जबरन उठा लिया। इन व्यक्तियों में हसरत हासिल (20, वायुसेना कर्मी), काशिफ अयूब (22, दुकानदार), रियाज याकूब (36, दुकानदार), दाद करीम (24), जलील अहमद (22, ड्राइवर), सगीर इलाही (23, छात्र), सलाम (25, दुकानदार), फुजैल रफीक (22, छात्र), सिराज बरकत (20, छात्र), रियाज हसन (32, कतर में श्रमिक), और सज्जाद बरकत (22, कतर में श्रमिक) शामिल हैं।
संगठन के अनुसार, रियाज हसन और सज्जाद बरकत को 10 जनवरी को रिहा कर दिया गया, जबकि अन्य 9 लोग अभी भी अवैध हिरासत में हैं और उनके बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
बीवाईसी ने आगे कहा कि 25 दिसंबर से 7 जनवरी के बीच ग्वादर के पनवान जिवानी क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने दमन को तेज किया, जहां स्थानीय मछुआरा समुदाय को निशाना बनाया गया। इस दौरान जहांगिर (25), शम्सुद्दीन (18), शब्बीर (25), समीद (25), रिज़वान (26), आसिफ (35) और इसराज (22) नामक 7 मछुआरों को जबरन गायब कर दिया गया।
बीवाईसी के अनुसार, इन घटनाओं के दौरान घरों में हिंसक छापे मारे गए, परिवारों को डराया-धमकाया गया और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में भय का माहौल बन गया। संगठन ने कहा कि निशाना बनाए गए लोग आम नागरिक हैं और उनका एकमात्र “अपराध” उनकी बलोच पहचान है। ऐसे कृत्य बुनियादी मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हैं और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ हैं।
बीवाईसी ने सभी जबरन गायब किए गए लोगों की तत्काल और सुरक्षित रिहाई की मांग की है और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मुद्दे पर तत्काल संज्ञान लेने और जिम्मेदारी तय करने की अपील की है।
गौरतलब है कि बलूचिस्तान लंबे समय से पाकिस्तानी अधिकारियों की कथित ज्यादतियों का सामना कर रहा है, जहां जबरन गायब होने, न्यायेतर हत्याओं और अवैध हिरासत जैसी घटनाओं के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं।