पाकिस्तानी सेना द्वारा बलूच नागरिकों का हत्या और लापता होने का मामला

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पाकिस्तानी सेना द्वारा बलूच नागरिकों का हत्या और लापता होने का मामला

सारांश

बलूचिस्तान में मानवाधिकारों का उल्लंघन थमने का नाम नहीं ले रहा है। पाकिस्तानी सेना पर आरोप है कि उन्होंने तीन बलूचों की न्यायेतर हत्या की और पांच अन्य को गायब कर दिया। क्या हैं इसके पीछे के कारण? जानिए पूरी कहानी।

Key Takeaways

  • हिंसा का सिलसिला जारी है।
  • न्यायेतर हत्याएँ बढ़ रही हैं।
  • आम बलूचों का अगवा होना एक पैटर्न बन गया है।
  • अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की चेतावनी
  • परिजनों को जानकारी नहीं दी जा रही है।

क्वेटा, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बलूचिस्तान में नागरिकों के खिलाफ होने वाला हिंसा का सिलसिला थमता नहीं दिख रहा है। एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने पाकिस्तानी सेना पर तीन आम बलूचों की न्यायेतर हत्या और पांच को जबरन गायब करने का गंभीर आरोप लगाया है।

बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) के अनुसार, 17 वर्षीय छात्र सादिक नूर और 40 वर्षीय ड्राइवर मुस्लिम दाद के शव शुक्रवार को केच जिले के तुर्बत क्षेत्र में मिले, जो पिछले सात महीनों से लापता थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन्हें सेना ने अगवा किया था।

बीवाईसी ने बताया कि सादिक और दाद को 7 सितंबर, 2025 को पाकिस्तान के फ्रंटियर कॉर्प्स और मिलिट्री इंटेलिजेंस द्वारा तुर्बत के अबसार क्षेत्र में उनके घर से बलात गायब किया गया था।

एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल किलिंग की निंदा करते हुए मानवाधिकार संगठन ने कहा, "यह केवल एक मामला नहीं है। यह एक पैटर्न है, जहाँ बिना किसी जवाबदेही के मानव जीवन का अंत किया जाता है, जहाँ चुप्पी साधी जाती है, और जहाँ जानबूझकर न्याय से इनकार किया जाता है।"

बीवाईसी ने यह भी बताया कि 19 वर्षीय छात्र कंबर बलूच का शव 8 अप्रैल को तुर्बत में फेंका गया था, जिस पर बेरहमी से टॉर्चर के स्पष्ट निशान थे। कंबर को 7 अक्टूबर, 2025 को उनके घर से अगवा किया गया था।

मानवाधिकार संगठन ने बलूच युवाओं के खिलाफ की जा रही क्रूरता पर चिंता जताते हुए कहा, "बिना किसी ट्रायल या आरोप के बलूच युवाओं का अगवा करना, टॉर्चर करना और हत्या करना—यह मानवाधिकारों और पाकिस्तान के संविधान का सीधा उल्लंघन है। यहाँ कोई न्यायालय नहीं है, कोई इंसाफ नहीं है, केवल चुप्पी और डर है।"

बीवाईसी ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से तुरंत कार्रवाई की अपील की है, और चेतावनी दी है कि बलूचिस्तान में हालात बिगड़ते जा रहे हैं, जहाँ न्यायेतर हत्याएँ और जबरन अगवा करने की घटनाएँ बढ़ रही हैं।

बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (बीवीजे) ने भी बलूच समुदाय पर हो रहे अत्याचारों की ओर ध्यान आकर्षित किया, जिसमें पाकिस्तानी सेना ने पांच बलूच नागरिकों को अगवा किया।

बीवीजे ने कहा कि 20 वर्षीय नजीब अशरफ और 30 वर्षीय अल्लाह बख्श, जो एक मजदूर थे, को 8 अप्रैल को बलूचिस्तान के सुराब क्षेत्र से जबरन गायब कर दिया गया, जिससे उनके परिवार लंबे समय तक दुख और अनिश्चितता में रहे।

इसी दिन, पाकिस्तान के काउंटर-टेररिज्म डिपार्टमेंट ने कराची में देर रात को एक समन्वित ऑपरेशन में एक महिला समेत तीन बलूच नागरिकों को हिरासत में लिया।

पीड़ितों की पहचान 18 वर्षीय छात्र सलमान, 16 वर्षीय शहजाद और 24 वर्षीय शिक्षिका शकीला के रूप में हुई है।

इस मामले की आलोचना करते हुए बीवीजे ने कहा, "कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। उन्हें किसी न्यायालय में पेश नहीं किया गया है। परिजनों को उनके ठिकाने के बारे में जानकारी देने से मना कर दिया गया है। तुरंत जानकारी देना और सुरक्षित रिहाई आवश्यक है।"

Point of View

NationPress
12/04/2026

Frequently Asked Questions

पाकिस्तानी सेना पर क्या आरोप हैं?
पाकिस्तानी सेना पर बलूच नागरिकों की न्यायेतर हत्या और जबरन गायब करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस पर प्रतिक्रिया दी है?
हाँ, मानवाधिकार संगठनों ने इस मामले पर तत्काल कार्रवाई की अपील की है।
इस स्थिति का क्या समाधान हो सकता है?
मानवाधिकारों का सम्मान और न्यायालयों की सक्रियता से ही इस स्थिति को सुधारा जा सकता है।
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