PM मोदी को FAO का सर्वोच्च 'एग्रीकोला मेडल', खाद्य सुरक्षा और किसान कल्याण में योगदान पर सम्मान

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PM मोदी को FAO का सर्वोच्च 'एग्रीकोला मेडल', खाद्य सुरक्षा और किसान कल्याण में योगदान पर सम्मान

सारांश

रोम के FAO मुख्यालय में प्रधानमंत्री मोदी को 2026 का 'एग्रीकोला मेडल' मिला — यह FAO का सर्वोच्च सम्मान है। 80 करोड़ लोगों को खाद्य सहायता, 11 करोड़ किसानों को सीधी मदद और मिलेट्स को वैश्विक पहचान दिलाने की पहल इस सम्मान की बुनियाद बनी।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 20 मई 2026 को रोम में FAO का सर्वोच्च सम्मान 'एग्रीकोला मेडल 2026' प्रदान किया गया।
FAO महानिदेशक क्यू डोंग्यू ने FAO प्लेनरी हॉल में यह पदक प्रदान किया।
कोविड-19 के बाद से 80 करोड़ लोगों को खाद्य सहायता और 11 करोड़ से अधिक किसानों को सीधी आर्थिक सहायता भारत की प्रमुख उपलब्धियों में गिनाई गई।
इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स के ज़रिए मोटे अनाज को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने की भारतीय पहल की विशेष सराहना की गई।
G20 अध्यक्षता के दौरान डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारत के जोर को विकासशील देशों के लिए उपयोगी बताया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 20 मई 2026 को रोम स्थित संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के मुख्यालय में आयोजित एक विशेष समारोह में वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित 'एग्रीकोला मेडल' प्रदान किया गया। यह FAO का सर्वोच्च सम्मान है, जो खाद्य सुरक्षा, कृषि विकास और किसानों के कल्याण में असाधारण योगदान के लिए दिया जाता है। यह सम्मान ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक खाद्य नीति में एक निर्णायक भूमिका निभाने की दिशा में अग्रसर है।

समारोह और सम्मान का विवरण

FAO के महानिदेशक क्यू डोंग्यू ने ऐतिहासिक FAO प्लेनरी हॉल में प्रधानमंत्री मोदी को यह पदक प्रदान किया। संगठन के अनुसार, यह सम्मान कृषि उत्पादकता बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा मजबूत करने और किसानों के जीवन को बेहतर बनाने के प्रति प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

क्यू डोंग्यू ने प्रधानमंत्री को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान मोदी की उस दृष्टि को मान्यता देता है, जिसने किसान-केंद्रित और तकनीक-आधारित नीतियों के ज़रिए भारत की कृषि व्यवस्था में गहरा बदलाव लाया है।

भारत की कृषि उपलब्धियाँ जो बनीं सम्मान का आधार

FAO प्रमुख ने भारत की प्रमुख खाद्य और कृषि योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि कोविड-19 महामारी के बाद से लगभग 80 करोड़ लोगों को खाद्य सहायता प्रदान की गई और 11 करोड़ से अधिक किसानों को सीधे आर्थिक सहायता पहुँचाई गई। गौरतलब है कि ये आँकड़े भारत को दुनिया के सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों में से एक का संचालक बनाते हैं।

क्यू डोंग्यू ने प्राकृतिक एवं टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के भारत के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने FAO के साथ मिलकर 'इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स' के माध्यम से पौष्टिक मोटे अनाज को वैश्विक स्तर पर प्रोत्साहित करने की भारतीय पहल को विशेष रूप से उल्लेखनीय बताया।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और G20 की भूमिका

FAO प्रमुख ने G20 अध्यक्षता के दौरान डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारत के जोर को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, इस पहल से विकासशील देशों में डिजिटल तकनीक तक पहुँच बढ़ाने और सेवाओं को अधिक प्रभावी ढंग से आम लोगों तक पहुँचाने में सहायता मिली है। क्यू डोंग्यू ने यह भी कहा कि इन निरंतर प्रयासों की बदौलत भारत में लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में बड़ी मदद मिली है।

भूख और गरीबी के खिलाफ वैश्विक सहयोग

FAO महानिदेशक ने भूख और गरीबी से लड़ने, सार्वभौमिक खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देने और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को आगे बढ़ाने में FAO के प्रयासों के लिए भारत के सहयोग की सराहना की। यह ऐसे वैश्विक परिदृश्य में आया है जब जलवायु परिवर्तन और भू-राजनीतिक तनाव के कारण खाद्य सुरक्षा एक बार फिर वैश्विक एजेंडे में सबसे ऊपर है।

आगे की राह

यह सम्मान भारत की कृषि कूटनीति को नई ऊँचाई देता है और आने वाले समय में FAO के साथ भारत के सहयोग को और गहरा करने का मार्ग प्रशस्त करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस मान्यता से वैश्विक दक्षिण के देशों में भारत की कृषि नीतियों को एक मॉडल के रूप में अपनाने की संभावना बढ़ेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे घरेलू कृषि संकट के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए — जहाँ किसानों की आय, फसल बीमा और MSP की वास्तविक पहुँच जैसे सवाल अभी भी बहस में हैं। FAO की प्रशंसा मुख्यतः खाद्य वितरण और डिजिटल बुनियादी ढाँचे पर केंद्रित है, न कि कृषि आय या ऋण राहत पर — जो विपक्ष के लिए एक खुला मैदान छोड़ती है। मिलेट्स को वैश्विक ब्रांड बनाने की पहल सराहनीय है, पर यह देखना होगा कि इसका लाभ छोटे और सीमांत किसानों तक किस हद तक पहुँचा। अंतरराष्ट्रीय मान्यता और जमीनी हकीकत के बीच की यह खाई ही असली कसौटी है।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एग्रीकोला मेडल क्या है और यह किसे दिया जाता है?
'एग्रीकोला मेडल' FAO (खाद्य एवं कृषि संगठन) का सर्वोच्च सम्मान है, जो खाद्य सुरक्षा, कृषि विकास और किसानों के कल्याण में असाधारण योगदान के लिए दिया जाता है। यह पुरस्कार उन व्यक्तियों या नेताओं को प्रदान किया जाता है जिन्होंने वैश्विक भूख और गरीबी उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हो।
PM मोदी को एग्रीकोला मेडल क्यों दिया गया?
FAO के अनुसार, यह सम्मान कृषि उत्पादकता बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा मजबूत करने और किसानों के जीवन को बेहतर बनाने में प्रधानमंत्री मोदी के योगदान के लिए दिया गया। कोविड-19 के बाद 80 करोड़ लोगों को खाद्य सहायता, 11 करोड़ से अधिक किसानों को सीधी आर्थिक मदद और 'इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स' की पहल को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
यह समारोह कहाँ और कब आयोजित हुआ?
यह समारोह 20 मई 2026 को इटली के रोम स्थित FAO मुख्यालय के ऐतिहासिक FAO प्लेनरी हॉल में आयोजित हुआ। FAO महानिदेशक क्यू डोंग्यू ने प्रधानमंत्री मोदी को पदक प्रदान किया।
भारत ने FAO के साथ मिलकर किन क्षेत्रों में काम किया है?
भारत ने FAO के साथ मिलकर मुख्यतः तीन क्षेत्रों में सहयोग किया है — खाद्य सुरक्षा और वितरण, टिकाऊ एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना, और 'इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स' के ज़रिए मोटे अनाज का वैश्विक प्रचार। इसके अलावा G20 अध्यक्षता के दौरान डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारत के जोर की भी FAO ने सराहना की।
इस सम्मान का भारत की कृषि कूटनीति पर क्या असर होगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह सम्मान वैश्विक दक्षिण के देशों में भारत की कृषि नीतियों को एक मॉडल के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा। साथ ही, FAO के साथ भारत के भविष्य के सहयोग को और गहरा करने का मार्ग प्रशस्त होगा, विशेषकर खाद्य सुरक्षा और सतत विकास लक्ष्यों के क्षेत्र में।
राष्ट्र प्रेस
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