राजस्थान पुलिस की चेतावनी: डीपफेक और एआई से आधार बायोमेट्रिक खतरे में, अभी करें लॉक

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राजस्थान पुलिस की चेतावनी: डीपफेक और एआई से आधार बायोमेट्रिक खतरे में, अभी करें लॉक

सारांश

राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने चेतावनी दी है कि अपराधी डीपफेक और एआई टूल्स से आधार बायोमेट्रिक सुरक्षा तोड़ रहे हैं। एडीजीपी वी.के. सिंह ने नागरिकों से तत्काल बायोमेट्रिक लॉक करने और हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की है।

मुख्य बातें

राजस्थान पुलिस साइबर क्राइम शाखा ने 20 मई 2026 को डीपफेक और एआई आधारित साइबर धोखाधड़ी के विरुद्ध सार्वजनिक चेतावनी जारी की।
अपराधी गूगल जेमिनी , चैटजीपीटी और ग्रोक जैसे टूल्स से फर्जी वीडियो बनाकर फेस ऑथेंटिकेशन को धोखा दे रहे हैं।
ठगी का तरीका: पहले आधार नंबर व फोटो चुराना, फिर मोबाइल नंबर बदलकर ओटीपी हासिल करना।
नागरिकों से अनुरोध — एमआधार ऐप या यूआईडीएआई वेबसाइट पर जाकर तत्काल बायोमेट्रिक लॉक करें।
यूआईडीएआई पोर्टल पर पिछले 6 महीनों की आधार ऑथेंटिकेशन हिस्ट्री नियमित जाँचें।
साइबर धोखाधड़ी होने पर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।

राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने 20 मई 2026 को जयपुर से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डीपफेक तकनीक पर आधारित साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को लेकर नागरिकों के लिए एक सार्वजनिक सुरक्षा चेतावनी जारी की है। अधिकारियों के अनुसार, साइबर अपराधी अब उन्नत एआई टूल्स का दुरुपयोग कर आधार की बायोमेट्रिक सुरक्षा को भेदने और वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम देने में लगे हैं।

कैसे होती है यह ठगी

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (साइबर क्राइम) वी.के. सिंह ने बताया कि अपराधी सबसे पहले फिशिंग, सोशल इंजीनियरिंग और डेटा लीक के माध्यम से पीड़ित का आधार नंबर, फोटो और मोबाइल नंबर हासिल करते हैं। इसके बाद वे कॉमन सर्विस सेंटर या यूसीएल किट का गलत इस्तेमाल कर आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर बदलने की कोशिश करते हैं।

एक बार मोबाइल नंबर बदल जाने पर ओटीपी सीधे अपराधियों के पास पहुँचने लगते हैं, जिससे वे डिजिटल खातों और सेवाओं तक अनधिकृत पहुँच बना लेते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में डिजिटल वित्तीय सेवाओं का दायरा तेज़ी से बढ़ रहा है और करोड़ों नागरिक आधार-आधारित प्रमाणीकरण पर निर्भर हैं।

डीपफेक से फेस ऑथेंटिकेशन को खतरा

अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधी अब गूगल जेमिनी, ओपनएआई चैटजीपीटी और एक्स एआई ग्रोक जैसे टूल्स का दुरुपयोग करते हुए अत्यंत वास्तविक दिखने वाले फर्जी वीडियो तैयार कर रहे हैं। इन वीडियो में व्यक्ति के चेहरे और आँखों की हरकतों की नकल इतनी सटीक होती है कि फेस ऑथेंटिकेशन सिस्टम भी धोखा खा सकते हैं।

ऐसे डीपफेक वीडियो का उपयोग डिजिलॉकर, ई-केवाईसी प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन बैंकिंग सेवाओं तक अवैध पहुँच बनाने में किया जा सकता है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब डीपफेक तकनीक को साइबर अपराध के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है — पिछले दो वर्षों में देश के विभिन्न राज्यों में इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं।

आधार बायोमेट्रिक लॉक करने की अपील

राजस्थान पुलिस ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे तत्काल एमआधार ऐप या यूआईडीएआई की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपने आधार बायोमेट्रिक्स को लॉक करें। लॉक होने के बाद फिंगरप्रिंट और आईरिस डेटा का उपयोग तब तक नहीं किया जा सकता, जब तक आधार धारक स्वयं उसे अनलॉक न करे।

एडीजीपी सिंह ने यह भी सलाह दी कि नागरिक नियमित रूप से यूआईडीएआई पोर्टल पर अपनी आधार ऑथेंटिकेशन हिस्ट्री की जाँच करें ताकि यह पता चल सके कि पिछले छह महीनों में उनका आधार कहाँ और कैसे उपयोग हुआ। आधार से जुड़े मोबाइल नंबर में बदलाव के एसएमएस अलर्ट को नज़रअंदाज़ न करें और एक सक्रिय ईमेल आईडी भी आधार से जोड़कर रखें।

शिकायत कहाँ और कैसे करें

साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में नागरिकों को नज़दीकी पुलिस स्टेशन, साइबर पुलिस स्टेशन या राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर तत्काल शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इसके अलावा साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर भी शिकायत की जा सकती है।

राजस्थान पुलिस की यह पहल डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे एआई तकनीक सुलभ होती जाएगी, ऐसे साइबर हमलों की आवृत्ति और परिष्कार दोनों बढ़ेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े संस्थागत विरोधाभास को उजागर करती है — सरकार एक ओर आधार-आधारित डिजिटल सेवाओं का विस्तार कर रही है, दूसरी ओर वही बायोमेट्रिक ढाँचा अब परिष्कृत एआई हमलों के निशाने पर है। बायोमेट्रिक लॉक जैसे उपाय नागरिक की ज़िम्मेदारी पर निर्भर हैं, जबकि अधिकांश ग्रामीण और अर्ध-शहरी उपयोगकर्ता इन तकनीकी प्रक्रियाओं से अनजान हैं। असली सवाल यह है कि क्या यूआईडीएआई सिस्टम-स्तर पर डीपफेक-रोधी सुरक्षा परत जोड़ेगी, या जागरूकता अभियान ही एकमात्र ढाल बने रहेंगे।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीपफेक और एआई से आधार धोखाधड़ी कैसे होती है?
अपराधी पहले फिशिंग या डेटा लीक से पीड़ित का आधार नंबर और फोटो हासिल करते हैं, फिर एआई टूल्स से डीपफेक वीडियो बनाकर फेस ऑथेंटिकेशन सिस्टम को धोखा देते हैं। इसके बाद आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर बदलकर ओटीपी अपने पास मँगवा लेते हैं और डिजिटल खातों तक अनधिकृत पहुँच बना लेते हैं।
आधार बायोमेट्रिक लॉक कैसे करें?
एमआधार ऐप डाउनलोड करें या यूआईडीएआई की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ और 'बायोमेट्रिक लॉक' विकल्प चुनें। लॉक होने के बाद आपका फिंगरप्रिंट और आईरिस डेटा तब तक उपयोग नहीं किया जा सकता जब तक आप स्वयं इसे अनलॉक न करें।
आधार ऑथेंटिकेशन हिस्ट्री कैसे जाँचें?
यूआईडीएआई पोर्टल पर लॉग इन करके 'आधार ऑथेंटिकेशन हिस्ट्री' सेक्शन में जाएँ, जहाँ पिछले छह महीनों का पूरा रिकॉर्ड देखा जा सकता है। किसी अनजान स्थान या सेवा से ऑथेंटिकेशन दिखे तो तुरंत हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करें।
साइबर धोखाधड़ी होने पर कहाँ शिकायत करें?
साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। नज़दीकी पुलिस स्टेशन या साइबर पुलिस स्टेशन पर भी जाकर शिकायत की जा सकती है।
राजस्थान पुलिस ने नागरिकों को और क्या सावधानियाँ बरतने की सलाह दी है?
एडीजीपी वी.के. सिंह ने सलाह दी है कि आधार से एक सक्रिय ईमेल आईडी जोड़ें ताकि किसी भी बदलाव की तत्काल सूचना मिले। आधार से जुड़े मोबाइल नंबर में बदलाव का एसएमएस अलर्ट आए तो उसे नज़रअंदाज़ न करें और तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।
राष्ट्र प्रेस
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