सीबीआई का AI हेल्पबॉट 'अभय' लॉन्च: फर्जी नोटिस और 'डिजिटल अरेस्ट' धोखाधड़ी की तुरंत पहचान होगी

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सीबीआई का AI हेल्पबॉट 'अभय' लॉन्च: फर्जी नोटिस और 'डिजिटल अरेस्ट' धोखाधड़ी की तुरंत पहचान होगी

सारांश

CBI ने 'अभय' AI हेल्पबॉट लॉन्च किया है जो नागरिकों को फर्जी नोटिस और 'डिजिटल अरेस्ट' ठगी से तुरंत सतर्क करेगा। भारतीय कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई प्रक्रिया नहीं है — फिर भी यह ठगी लाखों को शिकार बना चुकी है। 'अभय' इस खतरे के खिलाफ नागरिकों के हाथ में पहला AI ढाल है।

मुख्य बातें

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 15 मई 2025 को AI-आधारित हेल्पबॉट 'अभय' लॉन्च किया।
'अभय' नागरिकों को CBI नोटिस की रियल-टाइम प्रामाणिकता जांचने की सुविधा देता है — मोबाइल OTP और स्कैन कॉपी अपलोड के जरिए।
CBI ने स्पष्ट किया: 'डिजिटल अरेस्ट' भारतीय कानून में कोई मान्य प्रक्रिया नहीं है — यह पूरी तरह धोखाधड़ी है।
अपराधी AI और डीपफेक तकनीक का दुरुपयोग कर फर्जी नोटिस भेजकर पीड़ितों को मानसिक दबाव में रखते हैं।
संदिग्ध गतिविधि की सूचना साइबर अपराध पोर्टल पर तुरंत दें; CBI ने बैंकिंग और टेलीकॉम दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई का संकल्प दोहराया।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 15 मई 2025 को साइबर अपराध और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी बढ़ती धोखाधड़ी से नागरिकों को बचाने के लिए एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रियल-टाइम हेल्पबॉट 'अभय' लॉन्च किया है। यह प्रणाली नागरिकों को CBI द्वारा जारी किसी भी नोटिस की प्रामाणिकता तत्काल जांचने की सुविधा देती है। बढ़ते साइबर अपराधों और डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग की पृष्ठभूमि में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या है 'अभय' और यह कैसे काम करता है

CBI की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध 'अभय' हेल्पबॉट को एक सरल तीन-चरणीय प्रक्रिया के जरिए इस्तेमाल किया जा सकता है। उपयोगकर्ता को वेबसाइट पर जाकर 'अभय' विकल्प पर क्लिक करना होगा, फिर अपने मोबाइल नंबर से OTP सत्यापन पूरा करना होगा और संबंधित नोटिस की स्कैन कॉपी अपलोड करनी होगी। इसके बाद AI प्रणाली नोटिस का विश्लेषण कर बताएगी कि वह असली है या संदिग्ध रूप से नकली

एजेंसी के अनुसार, यह तकनीक नागरिकों को तुरंत सतर्क करने और धोखाधड़ी के शिकार होने से बचाने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। गौरतलब है कि यह पहली बार है जब CBI ने नागरिक-उपयोग के लिए इस तरह का AI-आधारित सत्यापन उपकरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया है।

डिजिटल अरेस्ट: क्यों है यह खतरनाक

CBI ने स्पष्ट किया है कि 'डिजिटल अरेस्ट' नाम की कोई भी कानूनी प्रक्रिया भारतीय कानून में अस्तित्व में नहीं है। इस धोखाधड़ी में अपराधी खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसी का अधिकारी बताकर पीड़ित को फर्जी नोटिस भेजते हैं और दावा करते हैं कि वह किसी अपराध में शामिल है।

इसके बाद पीड़ित को मानसिक दबाव में रखकर लंबे समय तक 'डिजिटल निगरानी' में रखा जाता है — अक्सर वीडियो कॉल के जरिए — और रकम ऐंठी जाती है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में AI और डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग से साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़े हैं, जिससे असली और नकली सूचना में अंतर करना आम नागरिकों के लिए कठिन हो गया है।

CBI की चेतावनी और सख्त कार्रवाई का संकल्प

जांच एजेंसी ने नागरिकों को सलाह दी है कि किसी भी अनजान कॉल, ईमेल या संदेश पर तुरंत भरोसा न करें, विशेषकर जब उसमें गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई का भय दिखाया जा रहा हो। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल साइबर अपराध पोर्टल या संबंधित अधिकारियों को देने की अपील की गई है।

CBI ने यह भी कहा है कि वह उन सभी व्यक्तियों और नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखेगी जो बैंकिंग और टेलीकॉम प्रणाली का दुरुपयोग कर साइबर अपराध को बढ़ावा देते हैं।

आम नागरिकों पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि 'अभय' जैसी तकनीक उन वरिष्ठ नागरिकों और कम तकनीकी जानकारी रखने वाले लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है, जो 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी ठगी के सबसे आसान शिकार बनते हैं। सत्यापन प्रक्रिया को सरल रखा गया है ताकि देश के किसी भी कोने से कोई भी नागरिक इसका लाभ उठा सके।

आगे क्या होगा

CBI की यह पहल साइबर अपराध के खिलाफ व्यापक राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। आने वाले समय में 'अभय' की क्षमताओं को और विस्तारित किए जाने की संभावना है, ताकि अन्य प्रकार की सरकारी सूचनाओं की भी जांच इसके जरिए की जा सके। नागरिकों से अपील है कि वे इस सुविधा का उपयोग करें और किसी भी संदिग्ध नोटिस को बिना जांचे स्वीकार न करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली परीक्षा पहुंच में है — क्या वे नागरिक जो सबसे अधिक खतरे में हैं, यानी कम डिजिटल साक्षरता वाले बुजुर्ग, वास्तव में इस वेबसाइट-आधारित टूल तक पहुंच पाएंगे? 'डिजिटल अरेस्ट' घोटाले वर्षों से सक्रिय हैं और करोड़ों की ठगी हो चुकी है, फिर भी यह प्रतिक्रिया अब आई है। असली सवाल यह है कि क्या CBI इस टूल को व्यापक डिजिटल साक्षरता अभियान से जोड़ेगी, या यह महज एक तकनीकी खानापूर्ति बनकर रह जाएगी जिसे वे लोग ही इस्तेमाल करेंगे जिन्हें इसकी सबसे कम जरूरत है।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CBI का 'अभय' हेल्पबॉट क्या है?
'अभय' CBI द्वारा लॉन्च किया गया एक AI-आधारित रियल-टाइम हेल्पबॉट है, जो नागरिकों को CBI द्वारा जारी नोटिस की प्रामाणिकता तुरंत जांचने में मदद करता है। यह CBI की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है और मोबाइल OTP सत्यापन के बाद नोटिस की स्कैन कॉपी अपलोड कर जांच की जा सकती है।
'अभय' हेल्पबॉट का उपयोग कैसे करें?
CBI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर 'अभय' विकल्प पर क्लिक करें, मोबाइल नंबर से OTP सत्यापन पूरा करें और संदिग्ध नोटिस की स्कैन कॉपी अपलोड करें। AI प्रणाली नोटिस का विश्लेषण कर बताएगी कि वह असली है या संदिग्ध रूप से नकली।
'डिजिटल अरेस्ट' क्या होता है और क्या यह कानूनी है?
'डिजिटल अरेस्ट' एक धोखाधड़ी है जिसमें अपराधी खुद को कानून प्रवर्तन अधिकारी बताकर फर्जी नोटिस भेजते हैं और वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित को मानसिक दबाव में रखते हैं। CBI ने स्पष्ट किया है कि भारतीय कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया अस्तित्व में नहीं है।
साइबर ठगी या फर्जी CBI नोटिस मिलने पर क्या करें?
किसी भी संदिग्ध नोटिस, कॉल या ईमेल पर तुरंत भरोसा न करें और 'अभय' हेल्पबॉट से उसकी जांच करें। संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल साइबर अपराध पोर्टल या संबंधित अधिकारियों को दें।
CBI साइबर अपराध के खिलाफ और क्या कदम उठा रही है?
CBI ने कहा है कि वह बैंकिंग और टेलीकॉम प्रणाली का दुरुपयोग कर साइबर अपराध को बढ़ावा देने वाले सभी व्यक्तियों और नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखेगी। 'अभय' हेल्पबॉट इस व्यापक रणनीति का एक हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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